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कैरव गांधी अपहरणकांड : शेखपुरा, दिल्ली, लुधियाना और कोलकाता से 5 गिरफ्तार; फॉर्चूनर बरामद

Updated at : 22 Feb 2026 4:00 PM (IST)
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Kairav Gandhi

सकुशल घर वापसी के बाद लोगों का अभिवादन करने कैरव गांधी और उनके पिता.

Jamshedpur: जमशेदपुर का युवा उद्धमी कैरव गांधी भले ही घर लौट आए हों, लेकिन पुलिस उनके अपहरणकर्ताओं की तलाश में अब भी जगह-जगह छापेमारी कर रही है. शेखपुरा, दिल्ली, लुधियान और कोलकाता से पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया है, जिसमें मास्टरमाइंड तेजिंदर पाल सिंह और अमरिंदर सिंह उर्फ करतार भी शामिल है.

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Jamshedpur: बिष्टुपुर सीएच एरिया के युवा उद्यमी कैरव गांधी के अपहरण मामले में पुलिस ने पांच युवकों को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने उनकी निशानदेही पर लुधियाना स्थित तेजिंदर पाल सिंह के घर से अपहरण में प्रयुक्त फॉर्चूनर कार और गयाजी से रुपेश पासवान की पजेरो कार बरामद की है. हालांकि पुलिस उसे लेकर शहर नहीं पहुंची है. शनिवार को केस का उद्भेदन करते हुए एसएसपी पीयूष पांडेय ने पत्रकारों को बताया कि कैरव गांधी के अपहरण में पूर्व में छह आरोपी को गिरफ्तार किया गया था. इस मामले में अब पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. जिसमें अमरिंदर सिंह उर्फ करतार सिंह और मनप्रीत सिंह को लुधियाना, गुरदीत शेर सिंह को कोलकाता, संतोष कुमार को दिल्ली के गाजियाबाद और राजकरण यादव को शेखपुरा से गिरफ्तार किया गया है.

6 माह से रेकी कर रहा था गिरोह

गिरफ्तार लोगों के पास से 5 मोबाइल फोन बरामद किये गये हैं. उन्होंने बताया कि कैरव अपहरणकांड में अमरिंदर सिंह उर्फ करतार सिंह की मुख्य भूमिका थी. वह सह साजिशकर्ता के रूप में था. कैरव के अपहरण के लिये छह माह से गिरोह द्वारा रेकी की जा रही थी. इसके लिये अमरिंदर सिंह व उसके साथी ने साकची में एक किराये का मकान लिया था. जहां उनलोगों ने अपहरण की योजना बनायी. इसके अलावा वहां रहकर हर दिन कैरव गांधी पर नजर रखता था. वारदात के दिन अमरिंदर सिंह, गुड्डू सिंह, इमरान, रमीज व उसके साथी ने पुलिस की वर्दी पहनी थी. पुलिस की वर्दी पहन कर ही उनलोगों ने कैरव गांधी का अपहरण किया था.

कई गाड़ियां बदलकर दिया अपहरण को अंजाम

कदमा-सोनारी लिंक रोड में स्कॉर्पियो से कैरव गांधी का अपहरण करने के बाद वे लोग उसे चांडिल ले गये. जहां दूसरी कार में कैरव गांधी को शिफ्ट कर दिया गया. दूसरी कार को मनप्रीत चला रहा था. अपहरण के दौरान राजकरण, संतोष कुमार और गुरदीत शेर सिंह भी घटनास्थल पर था. कैरव गांधी का अपहरण कर चांडिल पहुंचाने के बाद गुरदीत शेर सिंह वहां से कोलकाता चला गया. जबकि अन्य साथी कैरव को रांची के रास्ते डोभी ले गये. जहां कैरव को दूसरी कार में शिफ्ट कर दिया गया. दूसरे वाहन से कैरव को गयाजी के बिसर गांव में रखा गया था. एसएसपी पीयूष पांडेय ने बताया कि साकची में वे लोग आपस में मिलकर योजना बनाते थे. लेकिन एक-दूसरे की पहचान नहीं बताते थे. ताकि पकड़े जाने पर दूसरे व्यक्ति को बचाया जा सके.

गिरफ्तार अमरिंदर सिंह, गुरदीत शेर सिंह और संतोष कुमार के खिलाफ पूर्व में भी केस दर्ज है. इस मामले में पूर्व में पुलिस द्वारा मो. इमरान, गुड्डू सिंह, उपेंद्र सिंह, अर्जुन सिंह, रमीज राजा और मोहन प्रसाद को पुलिस ने गिरफ्तार किया था.

कैरव के अलावा शहर के कई कारोबारी थे निशाने पर

पुलिस के अनुसार कैरव अपहरणकांड में मुख्य साजिशकर्ता तेजिंदर पाल सिंह और अमरिंदर सिंह उर्फ करतार ने मिलकर शहर के कई कारोबारी की रेकी की थी. इसी क्रम में उन्हें कैरव गांधी की जानकारी मिली. कैरव गांधी अक्सर यूनाइटेड क्लब जाया करता था. वह काफी खर्चीला था. जिसके कारण उनलोगों ने कैरव गांधी के अपहरण की योजना बनायी. इसके लिये कैरव गांधी पर गिरोह द्वारा लगातार नजर रखी जाती थी. उसके घर से निकलने, क्लब जाने, कंपनी जाने समेत अन्य गतिविधि पर भी गिरोह द्वारा नजर रखी जाती थी. पुलिस सूत्रों के अनुसार इसी क्रम में तेजिंदर पाल सिंह की सर्किट हाउस एरिया में उद्यमी संदीप मल्होत्रा की फॉर्चूनर कार पर नजर पड़ी. जिसका नंबर उनलोगों ने देख लिया था. संदीप मल्होत्रा की अलग-अलग गाड़ियों का भी नंबर 1231 ही था. इसी कारण उनलोगों ने अपहरण के लिये जिस फॉर्चूनर का इस्तेमाल किया, उसमें संदीप मल्होत्रा की कार के नंबर का इस्तेमाल किया, ताकि पकड़े नहीं जा सकें. गिरोह के सदस्य सीएच एरिया, बिष्टुपुर समेत कदमा सोनारी क्षेत्र में रहने वाले कारोबारी व उद्यमी की रेकी कर रहे थे.

अपहरण करने के बाद तेजिंदर और साद आलम भागा दुबई

पुलिस सूत्रों के अनुसार तेजिंदर पाल सिंह काफी शातिर है. वह अपने गिरोह के सदस्यों से भी पूरी सच्चाई नहीं बताता था. उसने मो. इमरान समेत अन्य साथियों को इंडोनेशिया जाने की बात बतायी थी. लेकिन वह साद आलम के साथ दुबई गया. चार दिनों तक दुबई में रहने के बाद नालंदा निवासी साद आलम और तेजिंदर पाल सिंह वापस लौट गये. जिसके बाद तेजिंदर पाल सिंह लुधियाना चला गया, जबकि साद आलम नालंदा लौट गया.

लुधियाना से वर्दी लेकर फॉर्चूनर से चांडिल पहुंचा था अमरिंदर और मनप्रीत

पुलिस को पूछताछ में गिरफ्तार अमरिंदर और मनप्रीत ने बताया कि वे लोग तेजिंदर पाल सिंह की फॉर्चूनर कार लेकर लुधियाना से सड़क मार्ग से चांडिल पहुंचे थे. लुधियाना में ही उनलोगों ने पुलिस की वर्दी बनवायी थी. जिसके बाद चांडिल में उनलोगों ने वर्दी पहनी. वहीं स्कॉर्पियो में सवार मो. इमरान, रमीज राजा को भी वर्दी पहनने को दिया था.

अमरिंदर बना डीआइजी, साथी बने सिपाही

लुधियाना से गिरफ्तार अमरिंदर सिंह उर्फ करतार सिंह शातिर बदमाश है. 13 जनवरी को लुधियाना से फॉर्चूनर से चांडिल पहुंचने के बाद अमरिंदर सिंह ने खुद डीआइजी की वर्दी पहनी, जबकि उसके साथी मो. इमरान, रमीज राजा और गुड्डू सिंह ने सिपाही की वर्दी पहनी थी. सोनारी-कदमा रोड में कैरव गांधी की कार को ओवरटेक कर रोकने के बाद जब अपराधियों ने कैरव को घेरा, तो उन्होंने अमरिंदर सिंह को इशारा करते हुये कहा कि डीआइजी साहब हैं. जल्दी थाना चलो. महज एक मिनट के अंदर कैरव गांधी को उनकी कार से उतार कर स्कॉर्पियो में सवार कर दिया. इसके बाद कैरव को लेकर वे लोग डोभी गये. वहां उपेंद्र सिंह, रुपेश पासवान व उसके साथियों को कैरव को सुपुर्द कर अमरिंदर और मनप्रीत फॉर्चूनर से ही लुधियाना लौट गये.

साइबर एक्सपर्ट है अमरिंदर और गुड्डू

पुलिस के अनुसार लुधियाना से गिरफ्तार अमरिंदर सिंह, शेखपुरा निवासी राजकरण यादव और गयाजी निवासी गुड्डू सिंह साइबर एक्सपर्ट है. उनलोगों द्वारा साइबर ठगी भी की जाती है. इसके अलावा लोगों को साइबर ठगी की जानकारी भी देते हैं. उनलोगों ने वीपीएन एप के जरिये इंडोनेशिया के फर्जी नंबर के सहारे कैरव के पिता देवांग गांधी और चाचा को फोन किया था.

तेजिंदर और अमरिंदर स्कूल व कॉलेज के लड़कों को बनाता था अपना शिकार

पुलिस के अनुसार तेजिंदर पाल सिंह शातिर बदमाश है. उसके खिलाफ पूर्व में भी अपहरण के कई केस दर्ज हैं. वह स्कूल व कॉलेज जाने वाले बड़े घर के बच्चों को अपना टारगेट करता था. इसके अलावा वह क्लब व अन्य जगहों पर घूमकर वैसे लड़कों का पता लगाता था. जिसके घरवाले पैसेवाले होते थे. उसके बाद वह अपहरण कर फिरौती की मांग करता था. कैरव के मामले में भी ऐसा ही हुआ.

साद आलम के जुड़वां भाई को पुलिस ने पकड़ा, पूछताछ के बाद छोड़ा

कैरव अपहरण के मामले में पुलिस ने तेजिंदर पाल सिंह के साथी साद आलम की तलाश में नालंदा स्थित उसके घर पर छापेमारी की. पुलिस को देख साद आलम फरार हो गया. जबकि उसका जुड़वां भाई घर पर था. पुलिस ने उसके भाई को पकड़ा. दोनों भाईयों का चेहरा भी मिलता जुलता है. बाद में पूछताछ के बाद पुलिस ने उसे छोड़ दिया था.

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AmleshNandan Sinha

लेखक के बारे में

By AmleshNandan Sinha

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

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