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परिवार पर बरसे मां की कृपा

परिवार पर बरसे मां की कृपामां दुर्गे की विदायी देने के लिए बड़ी संख्या में लोग परिवार के साथ पहुंचे थे. उनकी आस्था देखते ही बनती थी. उन्होंने मां को भावपूर्ण विदायी तो दी ही, साथ ही मेले का भी आनंद लिया. इस दौरान लाइफ @ जमशेदपुर की टीम ने उनसे बातचीत कर विसर्जन जुलूस […]

परिवार पर बरसे मां की कृपामां दुर्गे की विदायी देने के लिए बड़ी संख्या में लोग परिवार के साथ पहुंचे थे. उनकी आस्था देखते ही बनती थी. उन्होंने मां को भावपूर्ण विदायी तो दी ही, साथ ही मेले का भी आनंद लिया. इस दौरान लाइफ @ जमशेदपुर की टीम ने उनसे बातचीत कर विसर्जन जुलूस व मेले का अनुभव जाना. पेश हैं मुख्य अंश: —————-साल में एक बार दिखती हैं इतनी मूर्तियां गोस्वामी परिवार, बारीडीहबारीडीह निवासी सुरेंद्रव नाथ गोस्वामी पत्नी सुनीता, बेटी सुनीता व दो नातिन तृप्ति दास व प्रीति दास के साथ विसर्जन जुलूस देखने आये थे. पूरे परिवार ने सड़क किनारे बैठकर झांकियों का लुत्फ लिया. टीम से बात करने पर सुरेंद्रव नाथ गोस्वामी का कहना है कि जो संस्कार उन्हें मिले हैं, उसे बेटियों व नातिनों को देना चाहते हैं. उद्देश्य है कि भावी पीढ़ी भी उनकी सभ्यता से जुड़ी रहे. सुनीता देवी बताती हैं कि 35 वर्षों से हर साल उन्हें इसी पल का इंतजार रहता है. वे विसर्जन जुलूस जरूर देखते निकलती हैं. तृप्ति व प्रीति भी पूजा को लेकर काफी उत्साहित हैं. उन्हें इतनी मूर्तियां देख काफी अच्छा लगा. उन्हाेंने कहा कि परिवार के संग दुर्गा पूजा मनाने का अपना अलग एहसास होता है. ———————–मोह लेती हैं विसर्जन जुलूस की झांकियां प्रसाद परिवार, जुगसलाईजुगसलाई निवासी राजकुमार प्रसाद पत्नी रेणुका प्रसाद व बच्चों अमित और गुड़िया के संग विसर्जन की झांकी देखने साकची आये थे. राजकुमार बताते हैं कि वह इसी शहर में पले बढ़े. दुर्गा पूजा में पूजा पंडाल घूमने व विसर्जन के दौरान मां दुर्गा के दर्शन करने के लिए वह हमेशा निकलते हैं. साकची की झांकी मुझे बहुत पंसद है. रेणुका ने बताया कि शादी के बाद से हम हर साल पूजा के दौरान साकची में विसर्जन की झांकी को देखा. ————————व्यस्त जीवन में रोमांच भरती है मां की पूजा मांझी परिवार, मानगोसड़कों पर चहल पहल, भक्ति गीतों पर झूमते-गाते युवा व भक्तिमय माहौल का अलग एहसास है. इस रौनक का अलग ही मजा है. यह कहना है मानगो निवासी जयंत मांझी का. जयंत अपनी पत्नी लीना मांझी व छोटी बेटी स्वास्तिका मांझी को लिये सड़क किनारे खड़े होकर पूजा का आनंद ले रहे थे. लीना का कहना था कि पूजा की विसर्जन झांकी को देखना काफी रोमांचक होता है. हमारी संस्कृति में यह त्योहार ही है कि व्यस्त जीवन-शैली से हम कुछ समय निकाल अपने परिवार के संग खुशियां मना सकते हैं. खाने-पीने के साथ लाइफ का लुत्फ उठा सकते हैं. हमें पूजा का काफी बेसब्री से इंतजार रहता है. —————————मां की आस्था दिखाती है सच्चाई का रास्ता दास परिवार, सोनारी सोनारी निवासी झोंटू दास अपने पूरे परिवार के संग मां दुर्गा के दर्शन को निकले थे. उनके साथ उनकी पत्नी उमा दास, बेटी दीपा व सास गुन्नू देवी शामिल थीं. वह बताते हैं कि सुबह हम सिंदूर खेला में शामिल हुए. अभी परिवार संग विसर्जन से पहले मां के दर्शन करने आये हैं. इस माहौल का एहसास ही जुदा है. यह ऐसा त्योहार है, जिसमें मां दुर्गा के आने की खुशी हासिल होती है व मां दुर्गा की विदायी के दौरान आंखों से आंसू भी छलकते हैं. यही हमारी संस्कृति है.

Prabhat Khabar Digital Desk
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