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डायरिया बनी महामारी अब तक 10 ने दम तोड़ा

जमशेदपुर: बागबेड़ा में डायरिया से गुरुवार की देर रात दो और लोगों की मौत हो गयी, जबकि शहर के सदर, एमजीएम, सहित अन्य अस्पतालों में करीब 100 डायरिया के मरीज इलाजरत हैं. बीते छह दिनों से डायरिया के कारण क्षेत्र में मौतें हो रही हैं, लेकिन इसके रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से […]

जमशेदपुर: बागबेड़ा में डायरिया से गुरुवार की देर रात दो और लोगों की मौत हो गयी, जबकि शहर के सदर, एमजीएम, सहित अन्य अस्पतालों में करीब 100 डायरिया के मरीज इलाजरत हैं.

बीते छह दिनों से डायरिया के कारण क्षेत्र में मौतें हो रही हैं, लेकिन इसके रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से उठाये गये कदम नाकाफी साबित हो रहे हैं. डायरिया से अबतक 10 लोगों की मौत हो चुकी है. जटाझोपड़ी निवासी गणोश महतो का नौ वर्षीय पुत्र बंटी महतो दो दिनों से बीमार था. घर पर ही उसका इलाज चल रहा था. गुरुवार को उसकी मौत हो गयी. वहीं रानीडीह निवासी रामदाई बनारा (50) की मौत गुरुवार रात हो गयी. उसके घरवालों ने बताया कि गुरुवार दोपहर उसके पेट में दर्द के साथ उल्टी व दस्त शुरू हुआ.

ब्लीचिंग का छिड़काव

बागबेड़ा में शुक्रवार को बस्ती के लोगों ने समाजसेवी बहादुर किस्कू के नेतृत्व में सफाई अभियान चलाया. सभी जगहों पर ब्लीचिंग पाउडर कर छिड़काव किया गया.

28 नये मरीज मिले

बागबेड़ा में शुक्रवार को चार जगहों पर मेडिकल कैंप लगाया गया. इन कैंपों में 150 से ज्यादा लोगों की जांच की गयी. इनमें से 28 लोगों में डायरिया के लक्षण पाये गये. जुगसलाई केंद्र प्रभारी डॉ पी के साहू ने बताया कि सभी जगहों पर दवा व ओआरएस पैकेट उपलब्ध करा दिया गया है.

पेयजल और स्वच्छता विभाग ने लिया पानी का सैंपल

डायरिया प्रभावित क्षेत्रों में शुक्रवार को पेयजल और स्वच्छता विभाग के तीन सदस्यीय टीम ने कुआं, चापाकल व नदी के पानी का अलग-अलग 10 जगहों से सैंपल लिया. पर्यावरण विशेषज्ञ सुनंदा गांगुली ने बताया कि पानी को रांची स्थित जांच केंद्र में भेजा जायेगा. दो से तीन दिनों में जांच रिपोर्ट आ जायेगी. टीम में सुनंदा गांगुली, प्रदीप चंद्र बोबोंगा और रश्मि सिन्हा शामिल थी.

खुले में शौच करना खतरनाक: सुनंदा गांगुली ने बताया कि पूछताछ में जानकारी मिली है कि जटाझोपड़ी में 10 हजार लोग रहते हैं. यहां मात्र चार से पांच शौचालय है. ज्यादातर लोग खुले में शौच करते हैं और पास के तालाब में हाथ धोते हैं. इस कारण डायरिया फैलने का चांस ज्यादा रहता है.

पीयूष मुखी की मौत जापानी बुखार से तो नहीं : सुनंदा गांगुली ने कहा कि पीयूष मुखी के परिजनों ने बताया कि पीयूष को दस्त, उल्टी के साथ बुखार व बदन में दर्द भी था. इससे पता चलता है कि उसे डायरिया के साथ जापानी बुखार से इंकार नहीं किया जा सकता है. यह जांच का विषय है.

Prabhat Khabar Digital Desk
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