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दाे लाख के चक्कर में पांच कराेड़ का बन गया कर्जदार

Updated at : 16 Jan 2019 5:35 AM (IST)
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दाे लाख के चक्कर में पांच कराेड़ का बन गया कर्जदार

जमशेदपुर : सिंहभूम वाणिज्य कर विभाग में पांच कराेड़ के इ वे बिल घाेटाला के मुख्य सूत्रधार का पता चल गया है. अधिकारी मामले में सावधानी से जांच काे आगे बढ़ा रहे हैं. जांच पूरी होते ही मामले में प्राथमिकी दर्ज करायी जायेगी. मुसाबनी निवासी एक किसान के नाम से जीएसटी में निबंधन कराकर पांच […]

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जमशेदपुर : सिंहभूम वाणिज्य कर विभाग में पांच कराेड़ के इ वे बिल घाेटाला के मुख्य सूत्रधार का पता चल गया है. अधिकारी मामले में सावधानी से जांच काे आगे बढ़ा रहे हैं. जांच पूरी होते ही मामले में प्राथमिकी दर्ज करायी जायेगी.
मुसाबनी निवासी एक किसान के नाम से जीएसटी में निबंधन कराकर पांच कराेड़ रुपये का इ वे बिल फर्जीवाड़ा किया गया है. नवंबर माह में संबंधित व्यक्ति द्वारा किसान के दस्तावेजाें का इस्तेमाल कर स्टील ट्रेडर्स कंपनी के नाम से जीएसटी में निबंधन कराया.
इस दाैरान पांच कराेड़ के इ वे बिल काे स्टील परिवहन के काराेबार में इस्तेमाल किया गया. अधिक मात्रा में इ वे बिल जेनरेट करने आैर रिटर्न नहीं फाइल करने के बाद विभाग ने सर्वे कराया, ताे यह बात सामने आयी. जांच के क्रम में किसान ने अपना बयान दर्ज कराया है.
मंगलवार काे मकर संक्रांति के कारण किसान के नहीं आने से अधिक पूछताछ नहीं हो सकी. अधिकारियाें ने बताया कि जिस किसान के नाम से जीएसटी में निबंधन कराया गया है, उसने पंचायत स्तरीय चुनाव भी लड़ा था. उस दाैरान पहली बार उसने संबंधित दस्तावेज जमा कराये थे.
इसके बाद गांव में एक व्यक्ति द्वारा कुछ लाेगाें से यह कहते हुए दस्तावेज लिये थे कि उनके खाते में दाे-दाे लाख रुपये सरकार की आेर से दिलाये जायेंगे. इस क्रम में कई लाेगाें ने उस व्यक्ति काे अपने दस्तावेज साैंपे.
विभागीय अधिकारियाें काे जांच के क्रम में इस बात की जानकारी हासिल हुई है कि जिस अवधि में निबंधन कराया गया है, उसी दाैरान उक्त दस्तावेज दाे-दाे लाख दिलाने के नाम पर लिये गये हैं. इससे यह प्रतीत हाेता है कि उक्त व्यक्ति ही इस मामले का मुख्य सूत्रधार है. उसने आैर किसी नाम से जीएसटी में निबंधन कराया है या नहीं, इसकी भी पड़ताल की जा रही है.
जीएसटी निबंधन के लिए अॉनलाइन आवेदन देने का अधिकार है. दस्तावेज जमा कराने पर जांच विभाग करता है. तीन दिन में दस्तावेज की जांच के बाद जीएसटी नंबर दे दिया जाता है. जीएसटी नंबर के लिए अप्लाइ करने वाले के प्रतिष्ठान का भाैतिक सत्यापन करने का अधिकार नहीं है.
मामले का खुलासा तब हुआ, जब बड़ी रकम के इ वे बिल निकासी के बाद रिटर्न दाखिल नहीं किया गया. जांच में यह बात पता चला है कि जीएसटी नंबर लेने वाले ने इसका इस्तेमाल नहीं किया, लेकिन वह कमीशन में शामिल है अथवा नहीं यह जांच का विषय है. विभाग रिकवरी के उद्देश्य से कार्रवाई कर रहा है. जल्द ही प्राथमिकी दर्ज करायी जायेगी. इसके बाद पुलिस मामले का अनुसंधान करेगी.
प्रभुनाथ हेंब्रम, उपायुक्त, सिंहभूम वाणिज्य कर सर्किल
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