राहुल गांधी पर चुटकी : खादी पहन संसद में तुमने आंख मारी

Updated at : 14 Aug 2018 9:19 AM (IST)
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राहुल गांधी पर चुटकी : खादी पहन संसद में तुमने आंख मारी

-साहित्यिक संस्था सुरभि का अखिल भारतीय काव्य सम्मेलन, देशभक्ति में डूबे श्रोता जमशेदपुर : रवींद्र भवन साकची सोमवार को देशभक्ति के रस में डुबा रहा. सभागार में वीर रस की कविताएं हो रही थी. युवाओं के हाथ में तिरंगा था और जुबां पर भारत माता की जय. मौका था साहित्यिक संस्था सुरभि की ओर से […]

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-साहित्यिक संस्था सुरभि का अखिल भारतीय काव्य सम्मेलन, देशभक्ति में डूबे श्रोता

जमशेदपुर : रवींद्र भवन साकची सोमवार को देशभक्ति के रस में डुबा रहा. सभागार में वीर रस की कविताएं हो रही थी. युवाओं के हाथ में तिरंगा था और जुबां पर भारत माता की जय. मौका था साहित्यिक संस्था सुरभि की ओर से आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का. गजेंद्र प्रियांशु ने प्रेम के साथ-साथ देशभक्ति की बात भी की. उन्होंने राहुल गांधी की चुटकी ली, खादी पहनकर संसद में तुमने आंख मारी/ वहां पुरखे तुम्हारे तर गये होंगे. उन्होंने मोदी को भी नहीं छोड़ा, सपने तो आते हैं/ कभी-न-कभी खाते में 15 लाख आयेंगे.

मैं उन्हीं खेतों में मेहंदी बो रहा हूं

उन्होंने राजनीति की खूब खिल्ली उड़ायी. कुछ पंक्तियां देखिए, सजन कर्नाटक में जाकर/ विधायक हो गये होंगे. इतने दिनों बाद लौट के न आये/ आदमी न हुए काला धन हो गये. सब्र की एक सीमा होती है प्रिय/ हर किसी का दिल आडवाणी नहीं होता. उन्होंने दिल छूने वाली पंक्तियां भी सामने रखीं, देश में कोई नया देश हो जायेगा/ यूं ही उलझे रहोगे परदेश में/ देश अपना ही परदेश हो जायेगा. नागफनियों की गलियों में/ फूल का व्यापार मेरा/ लोग जहां रहते हैं मुंह छुपाकर/ मैं उन्हीं गलियों में दर्पण बेचता हूं. तुम जहां बारूद की फसलें उगाते/ मैं उन्हीं खेतों में मेहंदी बो रहा हूं. मैं जिन धागों से शादी का जोड़ा बुन रहा हूं/ तू उन्हीं धागों से क्यों बुनता कफन है.

क्या लिखते रहते हो यूं ही

वरिष्ठ कवि रमेश शर्मा ने कई सुंदर कविता सामने रखी. जिससे श्रोताओं का खूब मनोरंजन हुआ. उनकी पंक्ति थी, चांद की बातें करते हो/ धरती पर अपना घर ही नहीं/ रोज बनाते ताजमहल, संगमरमर क्या/ कंकड़ ही नहीं/ सूखी नदियां नाव लिये तुम/ बहते हो यू हीं/ क्या लिखते रहते हो यू हीं.

सारी धरा तुम्हारे ही गीत गा रही है
कविता तिवारी ने मां शारदे की वंदना की, सारी धरा तुम्हारे ही गीत गा रही है/ ऐसा लगा तू मधुरिम वीणा बजा रही है आ जाओ मंच पर भी/ आसन यहीं लगा दो/ कवियों में ब्रह्म का विवेक भर शारदे. राष्ट्र को जो मानते हैं/ सिर्फ धर्मशाला/ ऐसे पापियों के शीश धर से उड़ा दे मां. इसके बाद वीररस की कविताओं से श्रोताओं में जोश भर दिया. बदलकर आंसुओं की धार को मैं मुस्कुराती हूं/ वतन से प्यार है जिनको/ उनको कविता सुनाती हूं/ शहीदों की करो पूजा तो/ हिंदोस्तां बदलेगा.

उस दिन देश का झंडा ऊंचा होगा : कवि हेमंत पांडेय ने चुटकुले के जरिये राजनीति पर कटाक्ष किया. बीजेपी : अच्छे दिन आ गये/ कांग्रेस : 15 लाख अकाउंट में आ जाये तो/ बुलेट ट्रेन से नैनीताल चलें. उनकी पंक्ति थी, नेता अपने देश को कहे डायन तो/ वहां का झंडा ऊंचा कैसे ऊंचा रहेगा/ जिस दिन हर व्यक्ति/ स्वेच्छा से/ वंदेमातरम् कहेगा/ उस दिन देश का झंडा ऊंचा होगा. कवि सम्मेलन का संचालन गोविंद राठी ने किया. उन्होंने चुटकुला सामने रखा, कवि और पागल में क्या अंतर है? पागल ठीक हो जाता है. याशना दोदराजका ने भी देशभक्ति से प्रेरित कविता सामने रखी. इससे पहले मुख्य अतिथि खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय, कोल्हान आयुक्त विजय कुमार सिंह ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की. कार्यक्रम संस्था के अध्यक्ष गोविंद दोदराजका की देखरेख में हुआ. मंच का संचालन सुरेश सोंथालिया ने किया. मौके पर शहरभर के साहित्यप्रेमी मौजूद रहे.

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