बंद का दिखा आंशिक असर

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जमशेदपुर :भूमि अधिग्रहण कानून 2017 पर राष्ट्रपति की मुहर लगने के विरोध में झारखंड दिशोम पार्टी व आदिवासी सेंगेल अभियान द्वारा आहूत बंद का शहर व आसपास खास असर नहीं पड़ा. करनडीह चौक पर सोमवार को सोनाराम सोरेन व विमो मुर्मू के नेतृत्व में जबरन बंद कराने निकले झारखंड दिशोम पार्टी व आदिवासी सेंगेल अभियान […]

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जमशेदपुर :भूमि अधिग्रहण कानून 2017 पर राष्ट्रपति की मुहर लगने के विरोध में झारखंड दिशोम पार्टी व आदिवासी सेंगेल अभियान द्वारा आहूत बंद का शहर व आसपास खास असर नहीं पड़ा. करनडीह चौक पर सोमवार को सोनाराम सोरेन व विमो मुर्मू के नेतृत्व में जबरन बंद कराने निकले झारखंड दिशोम पार्टी व आदिवासी सेंगेल अभियान के नेताओं व कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोक दिया. उन्हें गिरफ्तार कर परसुडीह थाना लाया गया. देर शाम उन्हें रिहा कर दिया गया. सोमवार को दोपहर 11 बजे के करीब 40 समर्थक सड़क पर उतरे और टाटा-चाईबासा मुख्य सड़क को बाधित करने का प्रयास किया.
कुछ देर के लिए जाम की स्थिति बनी, लेकिन पुलिस की सक्रियता के कारण जाम नहीं लगा. डीएसपी विमल कुमार, परसुडीह थाना प्रभारी अनिमेष गुप्ता ने बंद समर्थकों को सड़क जाम करने से रोका तथा गिरफ्तार कर परसुडीह थाने ले गये. बंद समर्थक सोनाराम सोरेन व विमो मुर्मू ने कहा कि भूमि अधिग्रहण कानून 2017 पर राष्ट्रपति की मुहर लगने से आदिवासी-मूलवासी समाज का विकास नहीं, विनाश होगा. इसको लेकर पूरे राज्य में विरोध होगा.
परसुडीह : बंद बेअसर, 44 बंद समर्थक गिरफ्तार. जमशेदपुर. भूमि अधिग्रहण बिल के विरोध में आदिवासी सेंगेल अभियान व जेडीपी आहूत झारखंड बंद बेअसर रहा. पूर्वी सिंहभूम जिले में करनडीह को छोड़कर किसी अन्य स्थान पर बंद समर्थक नहीं दिखे. परसुडीह थाने में 44 बंद समर्थकों ने गिरफ्तारी दी. बंदी का असर शहर व गांव-देहात में नहीं देखा गया. आम दिनों की तरह ही एनएच-33 पर वाहनों का परिचालन हुआ. जमशेदपुर से ओडिशा, रांची, बोकारो व चाईबासा रूट की बसों का परिचालन भी सामान्य था. बंदी को लेकर प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों में पुलिस फोर्स की तैनाती की गयी थी. संभावित इलाकों में दिनभर पुलिस की गश्ती की वजह से कोई बंद समर्थक सड़क पर नहीं उतरा.
झारखंडियों के लिए जमीन ही जीवन : सालखन
जमशेदपुर. झारखंड दिशोम पार्टी व आदिवासी सेंगेल अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष सालखन मुर्मू ने कहा कि झारखंडी जनजीवन के लिए जमीन ही जीवन है. झारखंड भूमि अधिग्रहण कानून-2017 उस पर सीधा हमला है. सोमवार के झारखंड बंद का उद्देश्य जमीन के मुद्दे पर सरकार, विपक्ष व झारखंड जन को अलर्ट करना था. बंदी की सफलता-असफलता से ज्यादा बंद से झारखंडी जनमानस को जमीन के मुद्दे पर सोचने के मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना था, इसमें आदिवासी सेंगल अभियान व झारखंड दिशोम पार्टी कामयाब रही है.
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