कबाड़ में तब्दील हो रहीं करोड़ों की सिटी बसें
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जमशेदपुर : शहरी परिवहन व्यवस्था को रफ्तार देने के लिए जेएनएनयूआरएम (जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण योजना) के तहत मिली सिटी बसें कुप्रबंधन की भेंट चढ़ गयी है. परिचालन, मरम्मत, रखरखाव के बीच तालमेल नहीं बन पाने के कारण अधिकांश बसें खड़े-खड़े कबाड़ बनने के कगार पर पहुंच चुकी हैं. वर्तमान में पांच-छह बसों […]
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जमशेदपुर : शहरी परिवहन व्यवस्था को रफ्तार देने के लिए जेएनएनयूआरएम (जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण योजना) के तहत मिली सिटी बसें कुप्रबंधन की भेंट चढ़ गयी है. परिचालन, मरम्मत, रखरखाव के बीच तालमेल नहीं बन पाने के कारण अधिकांश बसें खड़े-खड़े कबाड़ बनने के कगार पर पहुंच चुकी हैं. वर्तमान में पांच-छह बसों का परिचालन हो रहा है. योजना के तहत शहर को 50 सिटी बसें मिली थी जिनका संचालन पहले झारखंड टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन(जेटीडीसी) द्वारा किया गया. सफल नहीं होने पर बसों को जमशेदपुर अक्षेस को सौंप दिया गया. अभी बसें अक्षेस के अधीन है.
दिलचस्प है कि परिवहन आयुक्त ने 24 फरवरी 2010 को एक आदेश जारी कर जमशेदपुर में जेएनएनयूआरएम के तहत सिटी बस संचालन के लिए तय मार्ग पर टेंपो व अन्य यात्री वाहनों के लिए परमिट निर्गत करने पर रोक लगा दी थी. तब से जमशेदपुर शहरी क्षेत्र में टेंपो का परमिट नहीं दिया जा रहा है. हालांकि जिस aसिटी बस के लिए इसे बंद किया उसकी सुविधा भी लोगों को नहीं मिल पा रही. शहरी क्षेत्र के लिए परमिट नहीं मिलने के बाद ग्रामीण क्षेत्र के परमिट पर शहरी क्षेत्र में टेंपो का संचालन किया जा रहा है.
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