सुवर्णरेखा व खरकई में 5 साल में खुल गये 13 से अधिक नाले

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जमशेदपुर : सुवर्णरेखा व खरकई नदी का प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है. हालात यह है कि करीब ग्यारह नालों को नगर निकायों और पंचायतों ने खोल दिया है, जिससे शहर का पूरा कचड़ा और नाले का दूषित पानी सीधे नदी में जा रहा है. बिना ट्रीटमेंट के ही नाले का पानी सीधे नदी […]

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जमशेदपुर : सुवर्णरेखा व खरकई नदी का प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है. हालात यह है कि करीब ग्यारह नालों को नगर निकायों और पंचायतों ने खोल दिया है, जिससे शहर का पूरा कचड़ा और नाले का दूषित पानी सीधे नदी में जा रहा है. बिना ट्रीटमेंट के ही नाले का पानी सीधे नदी में छोड़ दिया जा रहा है. नदी में ऑक्सीजन की कमी होती गयी और मछलियां खत्म होती गयीं.यहीं नहीं, लोग नहाने के लिए नदियों में जाया करते थे, लेकिन आज जो लोग भी नहाते हैं, उनकी यह शिकायत होती है कि उनको चर्म रोग हो जा रहा है़
नहाने के बाद काटने लगता है अपना ही बदन
स्थानीय निवासी आनंद कुमार ने बताया कि वे लोग कई साल से नदी में नहा रहे हैं. अब नहाने के बाद अपना ही बदन काटने लगता है. बदन में खुजली होती रहती है. फिर से घर में नहाना पडता है़अब मछलियां नहीं मिलती : मछुआरा ननकू धीवर ने बताया कि वे लोग कई सालों से मछलियां मार रहे हैं. अब मछलियां नहीं मिलती है. हम लोग शवों को निकालकर ही अपना गुजर बसर करते हैं. नदी में सिर्फ कचड़ा है, उसके अलावा कुछ नहीं बचा है.
दुरुस्त होगी व्यवस्था
पानी का रिसाइकिल हो रहा है. ट्रीटमेंट भी किया जाता है. लेकिन हो सकता है कि कुछ नाले नदी में जा रहे होंगे, जिसके लिए आवश्यक इंतजाम करने की जरूरत है.
-राजेश राजन, प्रवक्ता, जुस्को
शहर में 100 साल में दो ही ट्रीटमेंट प्लांट
शहर में सौ साल में सिर्फ दो ही ट्रीटमेंट प्लांट बनाये गये हैं, जहां नदियों में पानी छोड़ने के पहले ट्रीटमेंट होता है. अब तक जुस्को के अलावा अब तक सरकार की ओर से किसी तरह का कोई ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगाया गया है.
उग आती है जलकुंभी
खरकई अौर सुवर्णरेखा में प्रदूषण लेवल बढ़ने से जलकुंभी उगती है. जलकुंभी से संक्रमित बीमारी फैलाने वाले मच्छर जन्म लेते हैं. जमशेदपुर में पिछले 5 सालों से तेजी से जलकुंभी फैली है. खासकर बारिश के मौसम से पूर्व यह नदियों में तेजी से फैलती है. हालात यह है कि नदी में जलकुंभी का साम्राज्य हो जा रहा है.
ट्रीटमेंट के बाद ही छोड़ें पानी
नालों के पानी का ट्रीटमेंट करने के बाद ही छोड़े जाने की व्यवस्था बनानी होगी. इसके लिए हम लोगों को प्रयास करना होगा. इसके लिए सरकार और प्रशासन भी कटिबद्ध है.
औद्योगिक कंपनियां जिम्मेदार
घरेलु अौर अौद्योगिक कंपनियों के कारण सुवर्णरेखा अौर खरकई नदी प्रदूषित हो रही है. इसे रोकने के लिए हमें अपने से शुरुआत करनी पड़ेगी. प्रदूषण रोकने के लिए कानून या सरकारी उपायों के बजाय समाज को जागरूक बनाकर इस दिशा में काम कर सकते हैं.
-केके शर्मा, पर्यावरणविद , जमशेदपुर
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