प्राइवेट पैथोलॉजी मेडॉल के फर्जीवाड़े के विरोध में धरना

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जमशेदपुर : यूथ डिबेट सोसायटी व कांग्रेस के सदस्यों ने सोमवार से सदर अस्पताल परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया. यह धरना सदर अस्पताल में पीपीपी मोड पर चल रहे मेडॉल पैथोलॉजी लैब में ज्यादा पैसा लेने व सरकारी पैथोलॉजी का मरीजों को लाभ नहीं मिलने के विरोध में है. धरना दे रहे सदस्यों ने […]

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जमशेदपुर : यूथ डिबेट सोसायटी व कांग्रेस के सदस्यों ने सोमवार से सदर अस्पताल परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया. यह धरना सदर अस्पताल में पीपीपी मोड पर चल रहे मेडॉल पैथोलॉजी लैब में ज्यादा पैसा लेने व सरकारी पैथोलॉजी का मरीजों को लाभ नहीं मिलने के विरोध में है. धरना दे रहे सदस्यों ने इस संबंध में सिविल सर्जन को एक ज्ञापन सौंपा. जिसमें अस्पताल में व्याप्त भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने समेत अन्य कमियों को दूर करने की मांग की गयी.
ये कमियां गिनायीं : जन औषधि केंद्र व अस्पताल के दवा काउंटर पर दवा की कमी, रक्त के लिए जमशेदपुर ब्लड बैंक भेजा जाना, ममता वाहन, मातृ शिशु सुरक्षा, सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम रूम की कमी.
धरने में शामिल हुए
यूथ डिबेट सोसायटी के सुशील खां, संतोष कुमार जायसवाल, रंजीत कुमार झा, भरत जोरा, आशा देवी, उषा यादव, शमशेर, एसआरके कमलेश, शशिभूषण, बादशाह खान, राणा सिंह, सीताराम चौधरी सहित अन्य.
स्वास्थ्य सेवा में सुधार के लिए होगा आंदोलन. एमजीएम सहित जिले में स्वास्थ्य सेवा की स्थिति में सुधार लाने के उद्देश्य से शहर के गैर राजनीतिक संगठन विशेष अभियान चलायेंगे. सोमवार को साकची में जेएचआरसी प्रमुख मनोज मिश्रा की अध्यक्षता में आयोजित सर्वदलीय बैठक में इसकी घोषणा की गयी. अभियान संयुक्त सामाजिक मंच के बैनर तले
संचालित होगा.
इसको लेकर 27 अप्रैल को जुबिली पार्क में शहर के गैर राजनीतिक सामाजिक संस्थाओं, समाजसेवियों व प्रबुद्ध नागरिकों की एक बैठक होगी. मनोज मिश्रा ने कहा कि 2019 के चुनाव के पूर्व सभी राजनीतिक दलों से बेहतर स्वास्थ्य को चुनावी मुद्दा बनाने के लिए अभियान चलाया जायेगा. सरकारी अस्पतालों का सर्वे भी किया जायेगा. बैठक में एसएल दास, गुरमुख सिंह, सलावत महतो, जसवंत सिंह, विश्वजीत सिंह आदि उपस्थित थे.
मेडॉल पर कार्रवाई की अनुशंसा करेंगे : अधीक्षक
जमशेदपुर. एमजीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ बी भूषण ने कहा कि मेडॉल द्वारा की गयी गड़बड़ी की शिकायत स्वास्थ्य विभाग से की जायेगी. इसके साथ ही सरकार से मेडॉल के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा भी करेंगे. अधीक्षक ने बताया कि हर माह मेडॉल द्वारा जो जरूरी नहीं वह जांच कराकर बिल दे दिया जाता है. जांच के बाद अत्याधिक बिल को अस्पताल प्रबंधन काट देता है. यह क्रम लगातार चल रहा है जो गलत है. कई बार ऐसा देखने में आया है कि जो जांच अस्पताल में नि:शुल्क उपलब्ध है उसकी जांच भी करके बिल जमा कर दिया गया है.
डॉक्टरों को भी दिया गया निर्देश
अधीक्षक ने बताया कि अस्पताल के जूनियर व सीनियर डॉक्टरों को निर्देश दिया गया है कि वह अनावश्यक जांच नहीं कराये. जो जरूरी है वह जांच लिखे ताकि मरीजों को इसका लाभ मिल सके. साढ़े चार करोड़ का बिल बकाया. मेडॉल के जोनल मैनेजर अभिजीत कुमार बताया कि एमजीएम पर साढ़े चार करोड़ का बिल बकाया है. अधीक्षक व उपाधीक्षक को सिस्टम चेक करने का अधिकार है.
मेडॉल में जांच के लिए जो भी मरीज आते हैं, उनकी डॉक्टर पर्ची को एजेंसी के सॉफ्टवेयर पर अपलोड किया जाता है. एमजीएम अधीक्षक के पास सॉफ्टवेयर का यूजर कोड व पासवर्ड है. उन्हें अधिकार है कि वह जब चाहे किसी भी पर्ची की जांच कर सकते हैं. पूरी पारदर्शिता के साथ जांच की जा रही है. ऐसे में केवल बिल भुगतान के दौरान उसे फर्जी बताना गलत है.
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