600 से ज्यादा फॉर्म बंटे, 38 जमा

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जिनके पास एक जनवरी 1985 तक के दस्तावेज नहीं हैं, वे निराश लौट रहे जमशेदपुर : बिरसानगर गुड़िया मैदान सामुदायिक भवन में लगे लीज बंदोबस्ती कैंप में तीसरे दिन गुरुवार को छह सौ से ज्यादा फॉर्म बांटे गये. तीसरे दिन 38 लोगों ने दस्तावेज के साथ आवेदन जमा किये. अधिकांश लोगों ने सर्वे में अवैध […]

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जिनके पास एक जनवरी 1985 तक के दस्तावेज नहीं हैं, वे निराश लौट रहे

जमशेदपुर : बिरसानगर गुड़िया मैदान सामुदायिक भवन में लगे लीज बंदोबस्ती कैंप में तीसरे दिन गुरुवार को छह सौ से ज्यादा फॉर्म बांटे गये. तीसरे दिन 38 लोगों ने दस्तावेज के साथ आवेदन जमा किये. अधिकांश लोगों ने सर्वे में अवैध दखल के खतियान की प्रति सौंपी, जिसे स्थल जांच के लिए राजस्व कर्मचारी को दे दिया गया.
मंगलवार से कैंप शुरू होने के बाद से अब तक 5100 लोग फॉर्म ले चुके हैं तथा कुल 58 लोगों ने आवेदन जमा किया है. पहले दिन साढ़े तीन हजार लोगों ने फॉर्म लिया था तथा चार लोगों ने आवेदन जमा किया था, दूसरे दिन एक हजार लोगों ने फॉर्म लिया था अौर 16 लोगों ने आवेदन जमा किया था. सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी जयकांत कुमार सिंह के नेतृत्व में प्रतिनियुक्त टीम द्वारा सुबह 10 से शाम पांच बजे तक फॉर्म वितरण किया गया तथा आवेदन जमा लिया गया.
अन्य दस स्थानों पर कैंप की तिथि बाद में तय होगी
लीज बंदोबस्ती के लिए जिला प्रशासन द्वारा बिरसानगर के अतिरिक्त मानगो, सोनारी, कदमा, साकची समेत शहर के विभिन्न स्थानों पर दस कैंप की योजना है, जिसकी तिथि बिरसानगर का कैंप समाप्त होने के बाद तय होगी.
फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान बिरसानगर कैंप पर है. बिरसानगर कैंप से कमी की जो बातें सामने आयेगी उसमे सुधार करते हुए 9 अप्रैल के बाद अन्य स्थानों के कैंप की तिथि तय की जायेगी.
जमीन मालिक 1985 के पूर्व का, खरीदार बाद का
लीज बंदोबस्ती कैंप में वैसे लोगों को निराशा हाथ लग रही है, जिन्होंने 1985 के बाद जमीन खरीदी है. सरकार ने कट अॉफ डेट एक जनवरी 1985 तय किया गया है, लेकिन बिरसानगर समेत आसपास की बस्तियों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जिन्होंने 1985 के बाद जमीन खरीदी है. जिस व्यक्ति से जमीन खरीदी है, वह पूर्व के सर्वे में अवैध दखलकार के रूप में दर्ज है. लेकिन खरीदार के पास 1985 के पूर्व का कोई प्रमाण नहीं है. गुरुवार को कैंप में एक-दो ऐसे मामले आये, जिसमें पूर्व में जो जमीन मालिक था उसका अवैध दखलकार के रूप में नाम दर्ज है. लेकिन 85 के बाद जमीन की खरीद-बिक्री होने के कारण उन्हें सरकार के इस निर्णय का लाभ नहीं मिल पायेगा. गुरुवार को कैंप में ऐसा भी एक मामला आया, जिसमें 1985 के पूर्व रहने वाले व्यक्ति का नाम खतियान में अवैध दखलकार के रूप में दर्ज है, लेकिन उसके बाद दो बार वह जमीन बिक चुकी है अौर कैंप में आये अंतिम खरीदार व्यक्ति ने 2015 में जमीन खरीदी थी, जिसके कारण उसे निराश होकर लौटना पड़ा.
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