ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने शहीद दिवस रैली के लिए कोलकाता पुलिस से मांगी अनुमति

Edited by Mithilesh Jha
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पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी.

Mamata Banerjee TMC Rally: पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सरकार के पतन के बाद शहीद दिवस (21 जुलाई) को लेकर संशय के बीच पार्टी ने कोलकाता के पुलिस कमिश्नर को चिट्ठी लिखी है. डोला सेन ने कहा है कि योग दिवस की तरह शहीद दिवस के लिए भी कुछ घंटे सड़क को बंद किया जा सकता है.

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Mamata Banerjee TMC Rally: मध्य कोलकाता में 21 जुलाई को होने वाली तृणमूल कांग्रेस की शहीद दिवस रैली के लिए पुलिस की अनुमति न मिलने की अटकलों के बीच, पार्टी ने शनिवार को कोलकाता पुलिस को पत्र लिखकर विक्टोरिया हाउस के सामने जनसभा करने की मंजूरी मांगी. पुलिस ने इस अनुरोध पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

पुलिस आयुक्त से मांगी अनुमति : डोला सेन

तृणमूल सांसद डोला सेन ने कहा- हमने कोलकाता पुलिस आयुक्त को पत्र लिखकर पार्टी का शहीद दिवस कार्यक्रम उसी जगह पर आयोजित करने की अनुमति मांगी है, जहां हम पिछले कुछ दशकों से इसे आयोजित करते आ रहे हैं. हमारी नेता ममता बनर्जी उस सभा में हमारे कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगी, जैसा कि वह पिछले वर्षों में करती रही हैं.

शहीद दिवस रैली के लिए कुछ घंटे बंद कर सकते हैं यातायात

टीएमसी नेता ने कहा- यह हमारी पार्टी का सबसे प्रमुख कार्यक्रम है और अब यह हमारी सामाजिक-राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा बन गया है. डोला सेन ने कहा कि अगर सरकार अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का कार्यक्रम आयोजित करने के लिए मध्य कोलकाता की मशहूर सड़क ‘रेड रोड’ को 7 दिन तक बंद रख सकती है, तो यही नियम ‘शहीद दिवस’ की रैली के लिए भी लागू होना चाहिए, जब उसी इलाके की एक सड़क कुछ घंटे यातायात के लिए बंद रहेगी.

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Mamata Banerjee TMC Brigade Rally: 1993 से है शहीद दिवस का संबंध

21 जुलाई की ‘शहीद दिवस’ रैली का संबंध 1993 में हुई एक घटना से है, जब ममता बनर्जी के नेतृत्व में तत्कालीन बंगाल युवा कांग्रेस के समर्थकों ने राज्य सचिवालय ‘राइटर्स बिल्डिंग’ तक मार्च किया था. उनकी मांग थी कि वोट डालने के लिए मतदाता पहचान पत्र को ही पहचान का एकमात्र सबूत माना जाये.

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युवा कांग्रेस के 13 कार्यकर्ताओं की हुई थी मौत

पुलिस के साथ झड़प के बाद यह प्रदर्शन हिंसक हो गया. प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की, जिसमें युवा कांग्रेस के 13 समर्थक मारे गये और कई अन्य घायल हो गये. यह घटना बनर्जी के राजनीतिक करियर का एक अहम मोड़ और उस समय की वाम मोर्चा सरकार के खिलाफ प्रतिरोध का प्रतीक बन गयी.

1998 से शहीद दिवस मना रही है तृणमूल कांग्रेस

वर्ष 1998 में तृणमूल कांग्रेस की स्थापना के बाद, बनर्जी ने 21 जुलाई के दिन को शहीद दिवस के तौर पर स्थापित किया और 1993 की गोलीबारी में मारे गये लोगों की याद में कोलकाता में हर साल एक बड़ी रैली आयोजित करने की शुरुआत की.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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