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Income Tax Raid: बाबा ग्रुप से जुड़े ठिकानों पर आयकर विभाग की छापेमारी, 1.25 करोड़ नकद और जेवर जब्त

Updated at : 31 Jan 2026 12:57 PM (IST)
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Income Tax Raid

रांची स्थित बाबा राइस मिल.

Income Tax Raid: झारखंड और बिहार में बाबा ग्रुप से जुड़े ठिकानों पर आयकर विभाग की बड़ी कार्रवाई जारी है. छापेमारी में 1.25 करोड़ रुपये नकद और महंगे जेवरात जब्त किए गए हैं. बाबा एग्रो फूड समेत 45 ठिकानों पर जांच चल रही है. नीचे पूरी खबर पढ़ें.

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Income Tax Raid: झारखंड और बिहार में आयकर विभाग की अनुसंधान शाखा (रांची) की बड़ी कार्रवाई दूसरे दिन भी जारी रही. यह छापेमारी बाबा ग्रुप से जुड़े व्यापारिक और आवासीय ठिकानों पर की जा रही है. आयकर विभाग की प्रारंभिक जांच में 1.25 करोड़ रुपये से अधिक नकद और महंगे जेवरात बरामद होने की पुष्टि हुई है. अधिकारियों को आशंका है कि यह रकम अघोषित आय से जुड़ी हो सकती है.

बाबा एग्रो फूड के एमडी से जुड़े परिसरों से नकद बरामद

आयकर अधिकारियों की प्राथमिक रिपोर्ट के अनुसार, बाबा एग्रो फूड के एमडी योगेश साहू से जुड़े परिसरों से करीब 1.25 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए हैं. बरामद नकदी को लेकर आयकर विभाग को इसके वैध स्रोत पर संदेह है. फिलहाल अधिकारियों द्वारा संबंधित लोगों से पूछताछ की जा रही है और नकदी के लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है.

कई ठिकानों से महंगे जेवरात जब्त

छापेमारी के दौरान बाबा ग्रुप से जुड़े लोगों के कई ठिकानों से महंगे सोने-चांदी के जेवरात भी जब्त किए गए हैं. इन जेवरातों का मूल्यांकन विशेषज्ञों से कराया जा रहा है. आयकर विभाग का कहना है कि जेवरात की कीमत और खरीद के स्रोत की पुष्टि होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी. जांच एजेंसी यह भी देख रही है कि जेवरात आयकर रिटर्न में घोषित हैं या नहीं.

अचल संपत्ति और बैंक लेन-देन की भी जांच

आयकर विभाग की टीम केवल नकदी और जेवरात तक सीमित नहीं है. अधिकारियों द्वारा बाबा ग्रुप की अचल संपत्तियों, बैंक खातों, लेन-देन और व्यापारिक दस्तावेजों का भी गहन मूल्यांकन किया जा रहा है. विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि संपत्तियों की खरीद के लिए इस्तेमाल किया गया धन कहां से आया और क्या वह आयकर नियमों के अनुरूप घोषित किया गया था.

झारखंड और बिहार में 45 ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई

आयकर विभाग की अनुसंधान शाखा ने 29 जनवरी को झारखंड और बिहार में एक साथ छापेमारी शुरू की थी. इस कार्रवाई के तहत बाबा एग्रो फूड, बाबा फूड प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड और चावल व्यापार से जुड़े आढ़त व्यापारियों के कुल 45 ठिकानों को जांच के दायरे में लिया गया. शुक्रवार को रांची के नगड़ी, कांके रोड, रातू रोड, हरमू रोड और बरियातू स्थित परिसरों की तलाशी ली गई.

बिहार में शराब की बोतलें मिलने से बढ़ी मुश्किल

सूत्रों के अनुसार, बिहार के गयाजी स्थित चावल के आढ़त व्यापारियों के ठिकानों से शराब की कई बोतलें भी बरामद की गई हैं. बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बावजूद परिसरों से शराब मिलने के बाद आयकर विभाग ने संबंधित एजेंसियों को इसकी सूचना दी है. इस मामले में अन्य विभागों की कार्रवाई भी संभव मानी जा रही है.

नकदी गिनने के लिए बैंकों के अधिकारी बुलाए गए

शुक्रवार को बरामद नकदी की गिनती के लिए बैंकों के अधिकारियों को मौके पर बुलाया गया. देर शाम तक नकदी और दस्तावेजों की जांच जारी रही. खबर लिखे जाने तक छापेमारी की कार्रवाई समाप्त नहीं हुई थी. आयकर विभाग के अधिकारी कच्चे व्यापार, लेन-देन और रिकॉर्ड से जुड़े कागजात खंगालने में जुटे हुए हैं.

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जांच पूरी होने के बाद होगी आगे की कार्रवाई

आयकर विभाग का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी. अगर नकदी, जेवरात और संपत्तियां अघोषित पाई जाती हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ आयकर अधिनियम के तहत सख्त कदम उठाए जाएंगे. फिलहाल झारखंड और बिहार दोनों राज्यों में छापेमारी जारी रहने की संभावना जताई जा रही है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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