जल जंगल जमीन बचाने को लेकर आदिवासी समाज ने बैठक की, कहा

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ताजपुर में मंगलवार को आदिवासी समाज ने जल, जंगल और जमीन बचाने के लिए बैठक की.

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आदिवासी समाज का अस्तित्व जंगलों से जुड़ा है

चौपारण. ताजपुर में मंगलवार को आदिवासी समाज ने जल, जंगल और जमीन बचाने के लिए बैठक की. बैठक में वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज का अस्तित्व जंगलों से जुड़ा है और आज जंगल तथा जमीन खतरे में हैं. यदि इन्हें बचाने का प्रयास नहीं किया गया, तो आने वाले समय में लोग शुद्ध हवा और पेयजल से वंचित हो जायेंगे. दुलार मुंडा ने स्पष्ट किया कि जंगल उजाड़ने वालों के खिलाफ आदिवासी समाज सड़क से लेकर सदन तक आवाज उठायेगा.

अर्जुन मुंडा ने कहा कि चिपको आंदोलन जैसे अभियानों की तर्ज पर समाज पेड़ों को बचाने में अहम भूमिका निभायेगा. आदिवासी प्रकृति को पूजते हैं और टिकाऊ प्रथाओं का पालन करते हैं. वे पवित्र उपवनों के माध्यम से जैव विविधता की रक्षा करते हैं. आदिवासी महिलाएं निजी और सामुदायिक वनों की सुरक्षा में सक्रिय रहती हैं. भूमि परिवर्तन से उनकी संस्कृति और आजीविका को खतरा होता है.

भारत में विभिन्न आदिवासी आंदोलनों ने अपनी जमीन और वनों को बाहरी खतरों से बचाने के लिए संघर्ष किया है. आदिवासी समुदाय सदियों से वनों के संरक्षक के रूप में काम करता आया है. मनोहर मुंडा ने कहा कि जल-जंगल बचाना आदिवासियों का पहला कर्तव्य है. बैठक में बैजू गहलोत, राडासी मुंडा, हृदय मुंडा, बिरसा मुंडा, सोमा मुंडा, सुकरम मुंडा, सिंगराय मुंडा, छोटन मुंडा, शनिका मुंडा और नोंदो मुंडा सहित कई लोग शामिल हुए.

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विकाश नाथ

लेखक के बारे में

By विकाश नाथ

26 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हूं. रिपोर्टिंग के साथ डेस्क का काम करने भी अनुभव प्राप्त है. खेल डेस्क में भी काम करने का अनुभव है. रुरल के संस्करणों को देखता हूं.

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