स्कूल नहीं तो पढ़ाई नहीं: विस्थापित गांवों के विद्यार्थियों-अभिभावकों का प्रखंड मुख्यालय पर धरना

धरना देते हुए विद्यार्थी एवं अभिभावक
एनटीपीसी पकरी बरवाडीह परियोजना के कारण ध्वस्त हुए आठ स्कूलों के पुनर्निर्माण की मांग को लेकर विस्थापित गांवों के विद्यार्थियों और अभिभावकों ने मंगलवार को बड़कागांव प्रखंड मुख्यालय में एक दिवसीय धरना दिया. बच्चों की पढ़ाई पर गहरा असर पड़ा है, जिससे कई ने पढ़ाई छोड़ दी है.
संजय सागर, बड़कागांव
एनटीपीसी पकरी बरवाडीह कोयला खनन परियोजना से प्रभावित आठ विस्थापित गांवों के विद्यार्थियों और अभिभावकों ने मंगलवार को पांच सूत्री मांगों को लेकर बड़कागांव प्रखंड मुख्यालय में एक दिवसीय धरना दिया. प्रदर्शन का नेतृत्व मुखिया मोहम्मद इलियास अंसारी, आजादी बचाओ आंदोलन के नेता डॉ. मिथिलेश कुमार दांगी और राजेश यादव ने किया. धरना के बाद उपायुक्त हजारीबाग के नाम प्रखंड विकास पदाधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया.
एनटीपीसी परियोजना से ध्वस्त हुए आठ स्कूलों के पुनर्निर्माण की मांग
ज्ञापन में बताया गया कि खनन परियोजना के कारण क्षेत्र के आठ विद्यालय और आठ आंगनबाड़ी केंद्रों को चार-पांच वर्ष पहले ध्वस्त कर दिया गया, लेकिन अब तक नए भवनों का निर्माण नहीं कराया गया. इससे बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हुई है.
प्रभावित विद्यालयों में उत्क्रमित मध्य विद्यालय मंझली डाड़ी, मध्य विद्यालय सोनबरसा, प्राथमिक विद्यालय चुरचू, प्राथमिक विद्यालय चिरुडीह, उर्दू मध्य विद्यालय नगड़ी, प्राथमिक विद्यालय डलांगडीह, मध्य विद्यालय सिंदवारी तथा प्राथमिक व मध्य विद्यालय उरूब शामिल हैं.
दूरी के कारण कई बच्चों ने छोड़ी पढ़ाई
अभिभावकों का कहना है कि जिन विद्यालयों में बच्चों का समायोजन किया गया है, वे विस्थापित परिवारों की नई बस्तियों से काफी दूर हैं. छोटे बच्चों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे कई विद्यार्थियों ने पढ़ाई छोड़ दी है.
पांच सूत्री मांग
- धरना के दौरान प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के समक्ष पांच प्रमुख मांगें रखीं.
- डाड़ी कलां के चिचाल टोला में पहली कक्षा से इंटर तक की शिक्षा व्यवस्था शुरू की जाए.
- सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को विस्थापित परिवारों के वर्तमान निवास स्थल पर स्थानांतरित किया जाए.
- पकरी बरवाडीह पुनर्वास कॉलोनी में प्राथमिक और उच्च विद्यालय की स्थापना की जाए.
- नए विद्यालय बनने तक विस्थापित बच्चों को एनटीपीसी विद्यालय में निशुल्क शिक्षा और आने-जाने के लिए बस सुविधा उपलब्ध कराई जाए.
- विस्थापित गांवों के लोगों का एक स्थान पर समुचित पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए.
धरना में ये लोग थे शामिल
धरना में जिला परिषद सदस्य प्रतिनिधि मोहम्मद इब्राहिम, दिलेश्वर महतो, बुधन महतो, संतोष कुमार, राजेश महतो, दशमी देवी, सावित्री देवी, लखन कुमार, जीतू महतो, गीता देवी, विमला देवी, मंजू देवी, सरस्वती देवी, टेकलाल महतो, जीतन महतो सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण, अभिभावक और विद्यार्थी मौजूद थे.
ये भी पढ़ें...
श्रावणी मेले में सुरक्षित कांवर यात्रा के लिए नगर निगम ने शुरू किया सांड पकड़ने का अभियान
श्रावणी मेला 2026: 80 से 90 रुपये में मिलेगा भरपेट भोजन, प्रशासन ने तय की खाद्य सामग्री की दरें
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By अमलेश नंदन सिन्हा
अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










