मिट्टी और जानवरों की खाल से ऐसे तैयार किया जाता आदिवासियों का पारंपरिक वाद्य यंत्र मांदर, तरीका जान रह जाएंगे हैरान
Mandar (Pic Credit- Jharkhand Tourism)
Mandar Making Process : झारखंड का सबसे प्रमुख वाद्य यंत्र मांदर आज भी विभिन्न समुदायों के बीच काफी लोकप्रिय है. यहां लोग जब तक मांदर की थाप पर न थिरकें तब तक उनकी खुशियां अधूरी-सी लगती है. यही कारण है कि मांदर को झारखंड की सांस्कृतिक पहचान भी कहा जाता है. चलिए आज आपको बताते हैं कि आखिर ये मधुर आवाज निकालने वाली मांदर कैसे बनायी जाती है.
Mandar Making Process | बड़कागांव, संजय सागर : झारखंड का सबसे प्रमुख वाद्य यंत्र मांदर आज भी विभिन्न समुदायों के बीच काफी लोकप्रिय है. यहां लोग जब तक मांदर की थाप पर न थिरकें तब तक उनकी खुशियां अधूरी-सी लगती है. यही कारण है कि मांदर को झारखंड की सांस्कृतिक पहचान भी कहा जाता है. सरहुल, करमा, जितिया, सोहराय जैसे विभिन्न पर्व तो मांदर की थाप के बिना कल्पना भी नहीं किये जा सकते. शादी-विवाह में मांदर की थाप के बिना मानो कोई रस्म ही पूरी नहीं हो सकती. तो चलिए आज आपको बताते हैं कि आखिर ये मधुर आवाज निकालने वाली मांदर कैसे बनायी जाती है.
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कैसे बनता है मांदर ?
हजारीबाग जिले के बड़कागांव निवासी विजय भुइयां बताते हैं कि मांदर का निर्माण नगड़ा मिट्टी और जानवर के चमड़े के उपयोग से किया जाता है. पहले मिट्टी का खोल बनाकर उसे तेज आग में पकाया जाता है. जब मिट्टी का खोल आग में पूरी तरह पक जाता है, तब उसे किसी मवेशी के चमड़े से बनी पतली पट्टी या रस्सी को चारों को लपेटा जाता है. बाद में मिट्टी के खोल के दोनों किनारे लगभग 5 सेंटीमीटर की चौड़ाई पर चमड़े को लगाया जाता है. मांदर की बांयी ओर के मुंह की गोलाई लगभग 30 इंच और दांयी ओर की गोलाई लगभग 12 इंच तक की होती है. दोनों ओर मवेशी के मोटे चमड़े का प्रयोग किया जाता है और उसके मुंह को बंद कर दिया जाता है. इसके बाद दोनों ओर मिट्टी और एक खास तरह के लाल पत्थर को पीस कर चमड़े ऊपर उसका लेप चढ़ाया जाता है, जिसे खरन कहा जाता है. बांयी ओर मिट्टी की मोटी परत का लेप चढ़ाया जाता है, जबकि दांयी ओर पतली. इसी से मांदर के दोनों ओर मधुर आवाज निकलती है.
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तीन प्रकार के होते हैं मांदर
सिकंदर भुइयां ने बताया कि संरचना के आधार पर मांदर तीन प्रकार के होते हैं. एक छोटा मांदर बनता है, जो लगभग 2 फीट लंबा और गोलाकार होता है. इसे मुची मांदर कहा जाता है. दूसरा लगभग 3 फीट लंबा और गोलाकार होता है, जिसे ठोंगी मांदर कहा जाता है. तीसरा लगभग साढ़े 3 फीट लंबा और गोलाकार होता है, जिसे जसपुरिया मांदर कहा जाता है.
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