क्या आप भी बच्चे की हर जिद पर कहते हैं 'हां'? जानिए कब जरूरी है 'ना' कहना

Published by : Saurabh Poddar Updated At : 20 Apr 2026 6:19 PM

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Parenting Tips: बच्चों की हर बात मान लेना आसान है, लेकिन सही परवरिश के लिए सही समय पर 'ना' कहना भी उतना ही जरूरी होता है. यह आर्टिकल आपको बताएगा कि किन हालातों में बच्चों को रोकना जरूरी है और कैसे समझदारी से उन्हें सही रास्ता दिखाया जा सकता है.

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Parenting Tips: अगर आप अपने बच्चों की सही परवरिश करना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको सिर्फ उन्हें प्यार देना काफी नहीं होता है बल्कि उन्हें डिसिप्लिन सिखाना भी उतना ही जरूरी हो जाता है. कई बार तो ऐसा भी होता है कि बच्चों को खुश रखने के लिए माता-पिता उसकी हर बात पर हैं कह देते हैं, बिना यह सोचे कि बार-बार ऐसा करने का नतीजा आगे चलकर क्या हो सकता है. बता दें अगर आप हर बार सिर्फ ‘हां’ ही कहते रहेंगे, तो यह बिलकुल भी सही नहीं होगा आपक बच्चे के लिए. कुछ ऐसे हालात भी होते हैं जिनमें आपको अपने बच्चे को ‘ना’ भी कहना सीखना चाहिए. आपके बच्चे की भलाई के लिए यह काफी जरूरी हो जाता है. जब आप बच्चे से ‘ना’ कहते हैं, तो उसे यह सीख मिलती है कि उसकी हर इच्छा पूरी नहीं हो सकती और उसे पेशेंस रखना भी सीखना चाहिए.

कब जरूरी है बच्चे से ना कहना?

अगर आपका बच्चा इस तरह की चीजों के लिए जिद करता है जो उसकी सेहत या फिर आदतों के लिए ठीक नहीं, तो आपको उसे ‘ना’ कह देना चाहिए. अक्सर बच्चे जंक फूड्स, देर टाक रात को जागकर फ़ोन चलाने की या फिर वीडियो गेम्स खेलने की जिद करते हैं. एक पैरेंट होने के नाते इन हालातों में आपको उसे ‘ना’ काफी जरूरी हो जाता है. इसके अलावा अगर आपका बच्चा दूसरों से गलत तरीके से बात करता है, झूठ बोलने लगता है या फिर जिद्दी व्यवहार करने लगता है, तो आपको उसे उसी समय रोकना चाहिए ताकि उसे सही और गलत के बीच का अंतर् समझ में आने लग जाए.

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सही समय की पहचान कैसे करें?

‘ना’ कहने का सबसे सही समय वही होता है, जब आपका बच्चा गलत दिशा में बढ़ने लगे या फिर किसी गलत आदत को अपनाने लगे. जब आप शुरूआती दौर में ही उसपर रोक लगा देते हैं, तो यह आपके और बच्चे दोनों के लिए आसान होता है. एक बार अगर किसी चीज की आदत बच्चे को लग जाए, तो उसे बदल पाना काफी ज्यादा मुश्किल हो जाता है.

ना कहने का सही तरीका क्या है?

आप बच्चे को किस तरह से ‘ना’ कहते हैं उसका तरीका भी काफी ज्यादा मायने रखता है. अगर आप बच्चे को गुस्से में आकर या फिर डांटकर मना करेंगे, तो वह डर जाएगा और समय में आगे चलकर और भी जिद्दी बन जाएगा. अपने बच्चे को हमेशा शांत और प्यार से चीजों को समझाने की कोशिश करें. उदहारण के लिए अगर आपका बच्चा स्मार्टफोन का इस्तेमाल करना चाहता ह, तो आपको उसे डांटने की जगह सीधा मना करना चाहिए और उसे समझाना चाहिए कि अगर वह स्मार्टफोन में घुसा रहेगा, तो उसकी आंखों पर और पढ़ाई पर काफी बुरा असर पड़ सकता है. आपके लिए बेहतर होगा कि आप बच्चे को किसी और अच्छी एक्टिविटी के लिए मोटिवेट करें.

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Saurabh Poddar

लेखक के बारे में

By Saurabh Poddar

मैं सौरभ पोद्दार हूं और पिछले 4 वर्षों से अधिक समय से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. मैंने जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है, जिसने मुझे खबरों को गहराई से समझने और उन्हें प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की समझ दी है. वर्तमान में मैं प्रभात खबर के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर राइटर के रूप में कार्यरत हूं. मुझे उन विषयों पर लिखना सबसे अधिक पसंद है, जो सीधे हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े होते हैं. मेरे लेखों में आपको हेल्थ, फिटनेस, स्किन और हेयर केयर के साथ-साथ पेरेंटिंग और बच्चों के व्यवहार से जुड़ी उपयोगी जानकारियां पढ़ने को मिलेंगी. इसके अलावा, मैं बदलते मौसम के अनुसार आसान और हेल्दी रेसिपीज, घरेलू टिप्स, रिश्तों को बेहतर बनाने के तरीके, ट्रैवल से जुड़े सुझाव और वास्तु शास्त्र जैसे रोचक विषयों पर भी नियमित रूप से लिखता हूं. फिटनेस और अच्छी सेहत मेरे व्यक्तिगत जीवन का भी महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. मैं सिर्फ इन विषयों पर लिखता ही नहीं, बल्कि अपनी दैनिक दिनचर्या में भी स्वस्थ जीवनशैली और फिटनेस से जुड़े नियमों का पालन करता हूं. मेरा मानना है कि जब आप किसी चीज को स्वयं अनुभव करते हैं, तभी आप दूसरों तक उसकी सही और व्यावहारिक जानकारी पहुंचा सकते हैं. मेरी हमेशा यही कोशिश रहती है कि मैं सरल, सहज और आम बोलचाल की हिंदी में लिखूं, ताकि हर पाठक मेरी बात को आसानी से समझ सके और अपनी जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए उसका फायदा उठा सके.

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