जोजोबेड़ा में सड़क, बिजली, पानी व सिंचाई की पर्याप्त सुविधा नहीं

Updated at : 17 Feb 2025 5:49 PM (IST)
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जोजोबेड़ा में सड़क, बिजली, पानी व सिंचाई की पर्याप्त सुविधा नहीं

चुरचू प्रखंड के इंद्रा टोला जोजोबेड़ा में प्रभात खबर आपके द्वार कार्यक्रम

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: चुरचू प्रखंड के इंद्रा टोला जोजोबेड़ा में प्रभात खबर आपके द्वार कार्यक्रम प्रतिनिधि चरही. चुरचू प्रखंड की इंद्रा पंचायत के ग्राम इंद्रा टोला जोजोबेड़ा में प्रभात खबर आपके द्वार कार्यक्रम का आयोजन किया गया. जोजोबेड़ा गांव में लगभग 40 घरों में 150 लोग रहते हैं, जो संताल आदिवासी समुदाय से है. आज भी जोजोबेड़ा मूलभूत सुविधाओं से वंचित है. गांव में सड़क, बिजली, पानी व सिंचाई की सुविधा नहीं है कच्ची जर्जर सड़क से ही ग्रामीणों का आवागमन होता है. गांव के बगल में चिंतपूर्णी फैक्टरी होने के कारण गांव के लोग प्रदूषण से परेशान हैं. प्रदूषण के कारण कई तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ता है. मनोज मुर्मू ने कहा कि आजादी के बाद से आज तक जोजोबेड़ा गांव में पक्की सड़क नहीं बनी. पगडंडी के सहारे ग्रामीण आना-जाना करते हैं. रास्ता के अभाव में बरसात के दिनों में ग्रामीणों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. सुनील मुर्मू ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को लेकर चिंतपूर्णी फैक्ट्री गंभीर नहीं है. चिंतपूर्णी फैक्टरी द्वारा पौधा रोपण कार्य नही किया गया है. दिनेश मुर्मू ने कहा कि जोजोबेड़ा गांव के बगल में गौधौनीया गरम कुंड था. जिसमें नहाने से चर्म जैसी बीमारी दूर हो जाती थी. लेकिन चिंतपूर्णी फैक्टरी में डीप बोरिंग होने के कारण गौधौनीया गर्म कुंड पूर्ण रूप से सूख गया. चिंतपूर्णी फैक्टरी के संचालन को लेकर इंद्रा में जो कमेटी बनी है, उसमें जोजोबेड़ा के लोगों को शामिल नहीं किया गया है. सुरेंद्र मुर्मू ने कहा कि गांव के बगल में चिंतपूर्णी फैक्ट्री से जोजोबेड़ा गांव के ग्रामीण परेशान है. चिंतपूर्णी फैक्टरी के धुआं व प्रदूषण के कारण गांव में खेती पूर्ण रूप से ठप हो चुकी है चिंतपूर्णी फैक्टरी से सटे होने के कई तरह की बीमारियों से लोग ग्रसित हो चुके हैं. अजय मुर्मू ने कहा कि चिंतपूर्णी फैक्टरी के सीएसआर फंड से प्रभावित गांव जोजोबेड़ा के विकास व शिक्षा के लिए कोई कार्य नहीं किया जा रहा है. प्रभावित के नाम पर दूसरे गांव के लोग विकास के नाम पर पैसा ले रहे हैं. राजकुमार मुर्मू ने कहा कि जोजोबेड़ा में सिंचाई के साधन की कोई व्यवस्था नहीं है. पीने के पानी के लिए भी काफी मशक्कत करनी पड़ती है. गांव में एक चापानल है, जिससे पीने का पानी उपलब्ध हो पाता है. गांव के लोग खेती पर ही निर्भर हैं, गांव में सिंचाई के लिए समुचित व्यवस्था होनी चाहिए. कृष्णा मरांडी ने कहा कि जोजोबेड़ा गांव से होकर रेलवे लाइन गुजरी है. अब तक गांव के 12 बैल और 10 बकरियों की मौत ट्रेन से कट कर हो चुकी है. विजय मरांडी ने कहा कि जो वन विभाग की जमीन पर वर्षों से खेती कर अपना जीविकाेपार्जन कर रहे हैं, वैसे किसानों को वन पट्टा मुहैया कराया जाये. तालो मुर्मू ने कहा कि चिंतपूर्णी फैक्टरी या सीसीएल द्वारा गांव में ट्रांसफॉर्मर उपलब्ध कराने की जरूरत है. कार्यक्रम में कृष्णा मरांडी, विजय मरांडी, शनि मरांडी, शंकर मरांडी, संजय मरांडी, रवि मरांडी, बिनोद मरांडी, विकास मरांडी, राजू मुर्मू, छोटका मांझी, नरेश मुर्मू, बहामुनी देवी, शकुंतला देवी, मीना देवी, आरती हेंब्राेम, ललिता मरांडी, शांति देवी, कंचन देवी, सीमा किस्कु, आरती टुडु सहित अन्य ने अपनी समस्याओं को रखा.

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