कॉपी प्रिंटिंग के छोटे व्यवसाय ने बदल दी हजारीबाग की कंचन की जिंदगी, समाज के लिए बनीं प्रेरणा

हजारीबाग के दरिया गांव की कंचन देवी. फोटो: प्रभात खबर
Hazaribagh Success Story: हजारीबाग की कंचन देवी ने जेएसएलपीएस से जुड़कर कॉपी प्रिंटिंग व्यवसाय शुरू किया और आज हर महीने 20 हजार तक कमा रही हैं. सखी मंडल की मदद से आत्मनिर्भर बनीं कंचन देवी अब अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं और अपने व्यवसाय को विस्तार देने की तैयारी में हैं. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.
हजारीबाग से आरिफ की रिपोर्ट
Hazaribagh Success Story: ‘कौन कहता है कि आसमां में सुराख नहीं होता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों.’ दुष्यंत कुमार की गजल साये में धूप का यह शेर आज भी समाज के उन लोगों के लिए मौजूं हो जाता है, जो गुरबत में भी सफलता का डंका बजा देते हैं. झारखंड के हजारीबाग जिले के इचाक प्रखंड स्थित दरिया गांव की कंचन देवी ने दुष्यंत कुमार की पंक्तियों के अनुरूप अपनी मेहनत के बूते ऐसी मिसाल कायम की हैं, जिसकी चर्चा पूरे जिले और सूबे में हो रही है. एक समय आर्थिक तंगी और पारिवारिक जिम्मेदारियों से जूझने वाली कंचन देवी ने अपनी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के बल पर न सिर्फ अपनी जिंदगी बदली, बल्कि समाज में भी एक नई पहचान बनाई है. आज वह कॉपी प्रिंटिंग के छोटे कारोबार से आर्थिक तौर पर आत्मनिर्भर बन गई हैं.
कर रहीं हैं कॉपी प्रिंटिंग का कारोबार
कंचन देवी बताती हैं कि वर्ष 2018 में गांव में सखी मंडल के गठन के दौरान उन्होंने झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) से जुड़ने का निर्णय लिया. यह निर्णय उनके जीवन का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ. शुरुआत में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार सीखते हुए आगे बढ़ती रहीं. उन्होंने बताया कि उन्होंने साल 2024 से कॉपी प्रिंटिंग के कारोबार की शुरुआत कीं.
बचत और नेतृत्व से मिली पहचान
सखी मंडल से जुड़ने के बाद कंचन देवी ने नियमित बचत शुरू की और समूह की बैठकों में सक्रिय भूमिका निभाई. उनकी नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें सखी मंडल, ग्राम संगठन (वीओ) और संकुल संगठन (सीएलएफ) में अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई. इससे उनका आत्मविश्वास और भी बढ़ा.
पीएमईजीपी योजना से शुरू हुआ व्यवसाय
कंचन देवी ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) योजना के तहत 2 लाख रुपये का ऋण प्राप्त कर कॉपी प्रिंटिंग का व्यवसाय शुरू किया. उन्होंने अपने गांव और आसपास के क्षेत्रों में इस व्यवसाय की नींव रखी. शुरुआती दौर में ग्राहकों तक पहुंच बनाना और बाजार में पहचान बनाना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने धैर्य के साथ काम जारी रखा.
धीरे-धीरे बढ़ा कारोबार
कंचन देवी ने अपने व्यवसाय का प्रचार सखी मंडल (एसएचजी), वीओ और सीएलएफ नेटवर्क के माध्यम से किया. इससे उन्हें लगातार ऑर्डर मिलने लगे और उनका काम धीरे-धीरे बढ़ने लगा. आज वे हर महीने 15,000 से 20,000 रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं. यह आय उनके परिवार के लिए आर्थिक मजबूती का आधार बन गई है.
परिवार और समाज में बढ़ा सम्मान
इस व्यवसाय ने कंचन देवी के परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है. साथ ही समाज में उनकी एक अलग पहचान बनी है. गांव के लोग अब उन्हें एक सफल महिला उद्यमी के रूप में देखते हैं. उनकी सफलता अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही है.
क्या कहती हैं कंचन देवी
कंचन देवी कहती हैं, “अगर महिलाओं को सही मार्गदर्शन और अवसर मिले, तो वे किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकती हैं. आज मैं आत्मनिर्भर हूं और इसका पूरा श्रेय जेएसएलपीएस को जाता है.” उनका यह संदेश ग्रामीण महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है.
भविष्य की बड़ी योजना
अब कंचन देवी अपने व्यवसाय को और विस्तार देने की योजना बना रही हैं. वे रामगढ़, चतरा और कोडरमा जैसे जिलों में अपने कॉपी प्रिंटिंग व्यवसाय को फैलाना चाहती हैं. इसके लिए वे कॉपी कवर प्रिंटिंग मशीन खरीदने की तैयारी कर रही हैं, ताकि उत्पादन बढ़ाया जा सके और ज्यादा रोजगार के अवसर भी पैदा हों.
कंचन देवी का प्रोफाइल
- नाम: कंचन देवी
- पति: सुनील कुमार मेहता
- ग्राम: दरिया
- प्रखंड: इचाक
- जिला: हजारीबाग
- सखी मंडल: राधा सखी मंडल
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हजारीबाग के लिए प्रेरणा बनीं कंचन देवी
कंचन देवी की कहानी यह साबित करती है कि सही दिशा, मेहनत और आत्मविश्वास के साथ कोई भी व्यक्ति अपनी किस्मत बदल सकता है. उन्होंने न सिर्फ खुद को सशक्त बनाया, बल्कि समाज में महिलाओं के सशक्तिकरण की एक नई मिसाल भी पेश की है.
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लेखक के बारे में
By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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