रांची विश्वविद्यालय के आईएलएस में सुविधाओं पर संकट, हाईकोर्ट ने अधिकारियों को किया तलब

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झारखंड हाईकोर्ट का मुख्य द्वार.

Jharkhand High Court: रांची विश्वविद्यालय के आईएलएस में बुनियादी सुविधाओं और फैकल्टी की कमी पर झारखंड हाईकोर्ट सख्त हो गया है. कोर्ट ने मुख्य सचिव समेत कई अधिकारियों को तलब किया है. पहले ही 2026-27 सत्र में नामांकन पर रोक लग चुकी है. अब सुधार को लेकर प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

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रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट

Jharkhand High Court: रांची विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज (आईएलएस) में बुनियादी सुविधाओं और अकादमिक फैकल्टी की कमी का मामला अब गंभीर रूप ले चुका है. इस मुद्दे पर दायर याचिका की सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाब मांगते हुए कई शीर्ष अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है.

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कोर्ट का सख्त रुख

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने रांची विश्वविद्यालय का पक्ष सुना, लेकिन स्थिति से संतुष्ट नहीं हुआ. कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव, वित्त विभाग के सचिव, विश्वविद्यालय के कुलपति, डीन और आईएलएस के निदेशक को अगली सुनवाई में उपस्थित होने का आदेश दिया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले को हल्के में नहीं लिया जाएगा.

10 अप्रैल को अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 10 अप्रैल की तारीख तय की है. माना जा रहा है कि इस दिन कोर्ट संबंधित अधिकारियों से जवाब-तलब करेगा और संस्थान में व्याप्त समस्याओं के समाधान को लेकर ठोस निर्देश दे सकता है. इससे विश्वविद्यालय प्रशासन पर दबाव और बढ़ गया है.

याचिका में उठाए गए गंभीर मुद्दे

प्रार्थी अंबेश कुमार चौबे और अन्य की ओर से दायर याचिका में आईएलएस में फैकल्टी की भारी कमी, पर्याप्त क्लासरूम, लाइब्रेरी और अन्य बुनियादी सुविधाओं के अभाव का मुद्दा उठाया गया है. याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि इस स्थिति में छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलना मुश्किल हो गया है.

बीसीआई मानकों की अनदेखी

इससे पहले की सुनवाई में भी कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के निर्धारित मानकों की अनदेखी पर नाराजगी जताई थी. कोर्ट ने पाया कि संस्थान में कई जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, जो किसी भी विधि संस्थान के लिए अनिवार्य होती हैं. इस पर कोर्ट ने कड़ा कदम उठाते हुए नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 में नामांकन पर रोक लगा दी थी.

छात्रों के भविष्य पर संकट

आईएलएस में सुविधाओं की कमी का सीधा असर छात्रों के भविष्य पर पड़ रहा है. उचित फैकल्टी और संसाधनों के अभाव में छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. इससे उनकी पेशेवर तैयारी और करियर पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. छात्र और अभिभावक दोनों इस स्थिति को लेकर चिंतित हैं.

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अब सुधार की उम्मीद

हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि अब इस मामले में तेजी से सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे. यदि संबंधित विभाग और विश्वविद्यालय प्रशासन समय रहते आवश्यक कदम उठाते हैं, तो संस्थान की स्थिति में सुधार संभव है और छात्रों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सकता है.

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