हजारीबाग चंपाडीह स्कूल के बच्चे बैग में जूते रखकर नंगे पैर जाने को मजबूर, BDO-CO के वादे के सालभर बाद भी नहीं बनी सड़क

उत्क्रमित उच्च विद्यालय चंपाडीह जाने वाले रास्ते की तस्वीर
हजारीबाग के उत्क्रमित उच्च विद्यालय चंपाडीह में 10 वर्षों से सड़क की समस्या बनी हुई है. सरकारी बैठकों और वादों के बावजूद आज तक कोई समाधान नहीं निकला है.
पदमा से संजय कुमार यादव की रिपोर्ट
Hazaribagh Road Issue, हजारीबाग: सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई को बयां करती यह रिपोर्ट हजारीबाग के उत्क्रमित उच्च विद्यालय चंपाडीह की है, जहां पिछले 10 वर्षों से स्कूली बच्चे और शिक्षक रास्ते की समस्या से जूझ रहे हैं. हद तो तब हो गई जब बीडीओ, सीओ, मुखिया और तमाम स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में लिए गए फैसलों पर सालभर बीत जाने के बाद भी एक इंच काम नहीं हुआ. इस वर्ष भी मानसून आते ही विद्यालय का रास्ता दलदल में तब्दील हो चुका है और बच्चे व शिक्षक खेतों के कीचड़ में पैदल चलने को मजबूर हैं.
बैठक में किये गए वादे हवा में उड़े
उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष 15 अक्टूबर को बीडीओ निधि रजवार की पहल पर विद्यालय परिसर में एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई गई थी. इस बैठक में सीओ, जिला परिषद सदस्य, प्रमुख, उप प्रमुख, रोमी मुखिया, बिहारी मुखिया और विधायक प्रतिनिधि समेत कई जनप्रतिनिधि उपस्थित थे. बैठक के दौरान सीओ ने वैकल्पिक मार्ग के लिए जमीन का सीमांकन किया, जिसमें रोमी मुखिया और कुछ ग्रामीणों की निजी जमीन आ रही थी. ग्रामीणों और रोमी मुखिया ने सार्वजनिक हित में अपनी जमीन देने की सहर्ष घोषणा भी की थी. रोमी मुखिया ने सभी के सामने वादा किया था कि एक सप्ताह के भीतर जेसीबी से जमीन का समतलीकरण कराया जाएगा और नदी के कटाव से बचाने के लिए पंचायत फंड से गार्डवॉल का निर्माण होगा. लेकिन अफसोस, एक साल बीतने के बाद भी इनमें से एक भी प्रस्ताव धरातल पर नहीं उतर सका.
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जूते बैग में रख खाली पैर स्कूल जाते हैं बच्चे
समस्या से तंग आकर विद्यालय के शिक्षकों ने उपायुक्त (डीसी) हेमंत सती से मुलाकात कर अपनी व्यथा सुनाई और अविलंब सड़क निर्माण की मांग की. प्रभारी शिक्षिका सुमिता कुमारी ने डीसी को बताया कि रास्ते के अभाव में शिक्षकों को अपनी चार पहिया गाड़ियां आधा किलोमीटर दूर ही खड़ी करनी पड़ती हैं. बरसात के दिनों में स्थिति और भी डरावनी हो जाती है. बच्चे जब साइकिल से आते-जाते हैं, तो फिसलकर गिर जाते हैं और चोटिल हो जाते हैं. नौबत यहां तक आ गई है कि बच्चों को अपने जूते-चप्पल बैग में रखकर कीचड़ भरे रास्तों में नंगे पैर चलना पड़ता है. कई शिक्षक भी बाइक से गिरकर घायल हो चुके हैं. ऊपर से स्थानीय ग्रामीणों द्वारा कभी-कभी खेतों वाला अस्थाई रास्ता भी बंद कर दिया जाता है, जिससे परेशानी और बढ़ जाती है. शिक्षकों की पूरी बात सुनने के बाद डीसी हेमंत सती ने त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया है.
क्या कहते हैं संबंधित पदाधिकारी
"बच्चों की समस्या अत्यंत गंभीर है. बैठक के तुरंत बाद ही सड़क निर्माण का प्रस्ताव तत्कालीन डीसी और डीडीसी के पास भेज दिया गया था. डीडीसी से बातचीत में पता चला है कि डीएमएफटी (DMFT) मद से इस प्रस्ताव को स्वीकृति मिल गई है. एक महीने के भीतर टेंडर प्रक्रिया पूरी कर निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा."
बीडीओ, निधि रजवार
मुखिया प्रतिनिधि झाड़ा पल्ला
इस बारे में जब मुखिया प्रतिनिधि सुनील मेहता से बैठक में किए गए समतलीकरण और गार्डवॉल के वादे पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि एक तरफ से कुछ पीसीसी सड़क बनी है. इसके बाद ज्यादा सवाल पूछने पर वे "अभी पंचायत में हैं, बाद में बात करते हैं" कहकर पल्ला झाड़ते नजर आए.
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लेखक के बारे में
By समीर उरांव
इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.
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