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शिक्षा सामाजिक चेतना और मानवीय मूल्यों की आधारशिला

Updated at : 10 Jan 2026 11:10 PM (IST)
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शिक्षा सामाजिक चेतना और मानवीय मूल्यों की आधारशिला

व्याख्यानमाला में मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा

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हजारीबाग. विभावि परिसर स्थित स्वामी विवेकानंद सभागार में शनिवार को दिशोम गुरु पीठ की शुरुआत हुई. मौके पर प्रथम दिशोम गुरु शिबू सोरेन व्याख्यानमाला की शुरुआत हुई. विषय था-शिक्षा के वर्तमान मुद्दे एवं परिप्रेक्ष्य. अध्यक्षता राज्य के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने की. मुख्य वक्ता इग्नू के पूर्व कुलपति प्रो रविंद्र कुमार थे. मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री अर्जन का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना, आलोचनात्मक सोच एवं मानवीय मूल्यों के निर्माण की आधारशिला है. उन्होंने कहा कि अध्ययन और अधिगम एक-दूसरे के पूरक हैं, जहां अध्ययन सिद्धांत प्रस्तुत करता है. उन्होंने कहा कि औपचारिक रूप से सीमित शिक्षा प्राप्त होने के बावजूद शिबू सोरेन को उनके व्यक्तित्व, संघर्ष और विचारधारा ने झारखंड राज्य का निर्माता बनाया. आने वाले समय में दिशोम गुरु का जीवन विश्वविद्यालयों में शोध और अध्ययन का एक महत्वपूर्ण विषय बनेगा. मंत्री ने कहा कि डिजिटल माध्यमों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से त्वरित जानकारी उपलब्ध होना उपयोगी है. इससे गहन अध्ययन और सत्यापन की प्रक्रिया कमजोर नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि छात्रों को यह पूछने की आदत विकसित करनी चाहिए कि पढ़ाये जा रहे सिद्धांतों का स्रोत और प्रमाण क्या है. मंत्री ने कहा कि वैदिक काल से ज्ञान का प्रवाह सतत और समृद्ध रहा है. भारतीय शिक्षा व्यवस्था का लक्ष्य केवल सूचना देना नहीं, बल्कि विवेक और प्रज्ञा का विकास करना रहा है. स्वागत भाषण छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष डॉ विकास कुमार ने दिया. डॉ पुष्कर कुमार पुष्प ने कार्यक्रम का संचालन किया. अर्थशास्त्र विभाग के प्राध्यापक डॉ उमेंद्र कुमार सिंह की पुस्तक का लोकार्पण शिक्षा मंत्री, कुलपति एवं अन्य मंचासीन विशिष्ट जनों ने किया.

ज्ञान का प्रसार हो शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य : प्रो रविंद्र कुमार

इग्नू के पूर्व कुलपति प्रो रविंद्र कुमार ने कहा कि ज्ञान का प्रसार करना शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य है. ज्ञान क्या है. यह स्पष्ट होनी चाहिए. उन्होंने उत्तर भारत की वैदिक परंपरा और दक्षिण भारत के अगस्त मुनि की परंपरा का विस्तार से उल्लेख किया. उन्होंने बताया कि अगस्त मुनि की परंपरा में अनुभव और रचनात्मकता की प्रधानता होती है. इस ज्ञान का उद्देश्य है समाज का कल्याण. उन्होंने कहा कि ज्ञान कभी भी ठोस रूप में नहीं हो सकता. ज्ञान की प्रकृति डायनेमिक रही है. उन्होंने बताया कि शिक्षक को यह ध्यान में रखना चाहिए कि उनके विद्यार्थी सक्षम बनें. बेहतर समाज गढ़ें. जिस रूप में शिक्षक ने उन्हें पाया था, उससे बेहतर स्वरूप में उन्हें विदा करें.

गुरुजी के विचारों को हजारों वर्षों तक जीवित रखेगा विभावि : कुलपति

विभावि कुलपति प्रो चंद्र भूषण शर्मा ने बताया कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन का व्यक्तित्व बड़ा था. उन्होंने संघर्ष किया और बहुत से लोगों के जीवन में बदलाव लाया. वह एक विचारधारा बने. कुलपति ने बताया कि चार अगस्त 2025 को गुरुजी चले गये. विश्वविद्यालय ने मन बनाया कि हम उनको हजारों वर्षों तक जीवित रखेंगे. इसके लिए उनके विचारों को जीवित रखना होगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SUNIL PRASAD

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SUNIL PRASAD is a contributor at Prabhat Khabar.

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