बड़कागांव में दुनिया के सबसे महंगे आम की चोरी, आम का दाम सुनकर आपके मुंह से निकलेगा – ‘आंय?’

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बड़कागांव में पेड़ में लगा सबसे महंगा मियाजाकी आम और महंगे आम के पौधों के साथ किसान प्रवीण कुमार. फोटो: प्रभात खबर

Most Expensive Mango: हजारीबाग के बड़कागांव में दुनिया के सबसे महंगे जापानी मियाजाकी आम की चोरी से सनसनी फैल गई. किसान प्रवीण कुमार महतो के बाग से डेढ़ किलो आम गायब हुआ, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब चार लाख रुपये बताई जा रही है.

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बड़कागांव से संजय सागर की रिपोर्ट

Most Expensive Mango: हजारीबाग जिले के बड़कागांव में दुनिया के सबसे महंगे आम माने जाने वाले जापानी मियाजाकी आम की चोरी का मामला सामने आया है. किसान के बागान से करीब डेढ़ किलो मियाजाकी आम चोरी हो जाने के बाद पूरे इलाके में इसकी चर्चा हो रही है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस आम की कीमत लाखों रुपये तक बताई जाती है. आम की कीमत सुनकर स्थानीय लोग भी हैरान हैं. आप भी जब इस आम के दाम को सुनेंगे, तो आपके मुंह से निकलेगा, “आंय, आम इतना महंगा भी होता है?”

मदर प्लांट से चोरी हुए डेढ़ किलो आम

बड़कागांव निवासी कृषक प्रवीण कुमार महतो ने बताया कि उनके मदर प्लांट से करीब डेढ़ किलो मियाजाकी आम चोरी हो गया. हालांकि, खबर लिखे जाने तक इस संबंध में बड़कागांव थाने में अब तक कोई मामला दर्ज नहीं कराया गया है. स्थानीय स्तर पर घटना ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. चर्चा इस बात की भी हो रही है कि आखिर चोर को इस दुर्लभ और महंगे आम की पहचान कैसे हुई.

डेढ़ किलो आम की कीमत करीब 4 लाख रुपये

कृषक के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में मियाजाकी आम की कीमत बेहद अधिक है. उपलब्ध अंतरराष्ट्रीय बाजार दर के आधार पर चोरी हुए करीब डेढ़ किलो आम की कीमत लगभग 4 लाख रुपये आंकी जा रही है. हालांकि, बड़कागांव और आसपास के अधिकांश लोगों को इस आम की वास्तविक कीमत की जानकारी नहीं थी. जैसे-जैसे लोगों को इसकी कीमत का पता चल रहा है, वे आश्चर्य व्यक्त कर रहे हैं.

दो साल पहले कोलकाता से लाए थे पौधे

प्रवीण कुमार महतो ने बताया कि करीब दो वर्ष पहले उन्होंने कोलकाता से मियाजाकी आम के दो पौधे खरीदे थे. दोनों पौधों की कीमत करीब 2,400 रुपये थी. इसके बाद उन्होंने उन्हें अपने बाग में लगाया और पूरी देखभाल के साथ तैयार किया. उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष पहली बार इस आम का स्वाद चखने का अवसर मिला था. स्वाद और गुणवत्ता से वे काफी प्रभावित हुए. उनका कहना है कि उन्होंने किसी व्यावसायिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि बागवानी के प्रति अपने शौक और रुचि के कारण इस दुर्लभ किस्म का पौधा लगाया था.

झारखंड में मियाजाकी आम की बढ़ रही चर्चा

पिछले कुछ समय से झारखंड में मियाजाकी आम की खेती को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है. कई किसान इस किस्म के आम की खेती के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं. ऐसे समय में प्रवीण कुमार महतो का बाग राज्यभर में चर्चा का विषय बना हुआ है. स्थानीय लोगों का कहना है कि बड़कागांव में पहली बार इस तरह की घटना सामने आई है, जहां किसी ने इतने दुर्लभ और महंगे फल को निशाना बनाया है.

25 किस्म के आमों का तैयार किया है बाग

प्रवीण कुमार महतो केवल मियाजाकी आम ही नहीं, बल्कि आम की कई दुर्लभ और लोकप्रिय किस्मों की भी खेती कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि उनके तीन स्थानों पर बाग हैं, जिनमें बड़कागांव का तेलियातरी, हरदरा बागी तथा उनके आवास के पास स्थित बाग शामिल हैं. उन्होंने अपने मदर प्लांट में करीब 25 किस्म के आम लगाए हैं. इनमें प्रमुख रूप से मियाजाकी, हिमसागर, टॉमी एटकिंस, आम्रपाली, दशहरी, जर्दालू, नूरजहां, प्रतिभा, अरुणिमा, किंग चना, वरुण किंग, ब्लैक कस्तूरी और हरीबंगा जैसी किस्में शामिल हैं.

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चोर की जानकारी पर भी उठ रहे सवाल

घटना के बाद इलाके में इस बात की भी चर्चा है कि आम की इतनी अधिक कीमत की जानकारी शायद आम लोगों को नहीं थी, लेकिन चोर को इसकी पूरी जानकारी थी. लोगों का मानना है कि इसी वजह से उसने सीधे मियाजाकी आम को ही निशाना बनाया. ग्रामीणों का कहना है कि अब तक सोना, चांदी और नकदी की चोरी की घटनाएं सुनने को मिलती थीं, लेकिन अब लाखों रुपये कीमत वाले फलों की चोरी भी होने लगी है. यह घटना न केवल बड़कागांव बल्कि पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है. फिलहाल, किसान अपने बाग की सुरक्षा को लेकर अधिक सतर्क हो गए हैं, जबकि स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि चोरी की इस अनोखी घटना का जल्द खुलासा होगा.

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कुमार विश्वत सेन

लेखक के बारे में

By कुमार विश्वत सेन

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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