मुद्राराक्षस प्रतिरोधी संस्कृति के बड़े लेखक
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :22 Jun 2016 6:41 AM (IST)
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यदुनाथ बालिका मवि में संगोष्ठी हजारीबाग : साहित्यिक संस्था परिवेश की ओर से मुद्राराक्षस को याद करते हुए यदुनाथ बालिका मवि में संगोष्ठी हुई. अध्यक्षता वरिष्ठ कवि डॉ शंभु बादल ने की, जबकि संचालन डॉ बलदेव पांडेय ने किया. कार्यक्रम का आरंभ मुद्राराक्षस की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया. डॉ शंभु बादल ने […]
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यदुनाथ बालिका मवि में संगोष्ठी
हजारीबाग : साहित्यिक संस्था परिवेश की ओर से मुद्राराक्षस को याद करते हुए यदुनाथ बालिका मवि में संगोष्ठी हुई. अध्यक्षता वरिष्ठ कवि डॉ शंभु बादल ने की, जबकि संचालन डॉ बलदेव पांडेय ने किया. कार्यक्रम का आरंभ मुद्राराक्षस की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया. डॉ शंभु बादल ने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा कि मुद्राराक्षस प्रतिरोधी संस्कृति के बड़े लेखक हैं.
वह छात्र जीवन से ही विद्रोही रहे हैं. प्रतिरोध की यह प्रवृत्ति उनके अंतिम काल तक रही. सुप्रसिद्ध आलोचक डॉ भारत यायावर ने कहा कि मुद्राराक्षस से उनका घनिष्ठ संबंध था. उनका व्यक्तित्व तेजस्वी था. वह बेबाक बोलते थे. उनकी रचनाओं में वैचारिक उत्तेजना पैदा करने की शक्ति है. कथाकार रतना वर्मा ने कहा कि मुद्राराक्षस के मेरी प्रत्यक्ष मुलाकात कभी नहीं हुई है. कहानी प्रकाशन के दौरान उनसे पत्राचार से बातचीत होती थी. वह दलित समाज के प्रति बेहद संवेदनशील थे.
कमांडेंट मुन्ना सिंह ने कहा कि मुद्राराक्षस कम पठित साहित्यकारों में से एक हैं. इसका कारण वह समय के ढर्रे पर न चल कर अपना स्वतंत्र व्यक्तित्व रखते थे. उनमें बात कहने की धृष्टता थी. आत्मबल एवं साहस था. उनके नाटक एनएसडी ने काफी मंचन किया. कवि गणेश चंद्र राही ने कहा कि मुद्राराक्षस ने दलित चिंतन को आगे बढ़ाया और परिपुष्ट किया.
आलोचना क्षेत्र में उनका स्वतंत्र व्यक्तित्व रहा है. बलदेव पांडेय ने मुद्राराक्षस पर आलेख पाठ किया और कहा कि वह साहित्य के साथ ही एक राजनीतिक चिंतक भी थे. उनका तेंदुआ नाटक काफी चर्चित हुआ था. हरेंद्र ने कहा कि मुद्राराक्षस पर शोध कार्य नहीं हुआ है, जो होना चाहिए. विकास कुमार ने मुद्राराक्षस को बहुआयामी व्यक्तित्व के घनी बताया. करण कशिश, दयानंद शर्मा, ओमप्रकाश दास ने भी मुद्राराक्षस के साहित्य एवं व्यक्तित्व पर महत्वपूर्ण विचार रखे.
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