ओके::मांदर की थाप पर थिरके बच्चे-बड़े व बुजुर्ग

Published at :07 Apr 2016 8:41 PM (IST)
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ओके::मांदर की थाप पर थिरके बच्चे-बड़े व बुजुर्ग

ओके::मांदर की थाप पर थिरके बच्चे-बड़े व बुजुर्गचरही में धूमधाम से मना सरहुल पर्वफोटो :7 चरही 60,सरहुल अखाड़ा में सरहुल नृत्य प्रस्तुत करते कलाकार 7चरही61,मंचासीन मुख्य अतिथि चुरचू जिप सदस्य ,मुखिया व अन्यपारंपरिक सरहुल गीतों पर थिरके आदिवासी चरही. चुरचू पंचायत के ग्राम बाली के बागजोबरा जाहेर में सरहुल पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. […]

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ओके::मांदर की थाप पर थिरके बच्चे-बड़े व बुजुर्गचरही में धूमधाम से मना सरहुल पर्वफोटो :7 चरही 60,सरहुल अखाड़ा में सरहुल नृत्य प्रस्तुत करते कलाकार 7चरही61,मंचासीन मुख्य अतिथि चुरचू जिप सदस्य ,मुखिया व अन्यपारंपरिक सरहुल गीतों पर थिरके आदिवासी चरही. चुरचू पंचायत के ग्राम बाली के बागजोबरा जाहेर में सरहुल पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. सर्वप्रथम गांव के पाहन लालजी किस्कू व होपन सोरेन ने सरना स्थल पर सरहुल फूल की पारंपरिक तरीके से पूजा-अर्चना की. वहीं श्रद्धालुओं को सरहुल का फूल व प्रसादी दिया गया. मौके पर नृत्य का भी आयोजन किया गया. मुख्य अतिथि चुरचू जिप सदस्य अग्नेशिया सांडी पूर्ति, विशिष्ट अतिथि सिस्टर जेम्मा मेंडिंस,आरजेडी के शाहिद सिद्दिकी, चुरचू मुखिया रूपलाल राम, उप-मुखिया सहदेव किस्कू ने स्व़ सिस्टर जेरमेन श्याम मुर्मू की तस्वीर पर माल्यार्पण किया. इधर, चुरचू के बागजोबरा में सरहुल पर कई रंगारंग कार्यक्रम हुए. इसमें दर्जनों सरहुल नृत्य टीमों ने हिस्सा लिया. इसमें बागजोबरा, कानाबांद, बालीडीह, गोंदवार आदि की टीमें शामिल हुईं. नृत्य में प्रथम बागजोबरा, द्वितीय कानाबांद व तृतीय बालीडीह टीम हुई. तीनों टीम को अतिथियों ने सम्मानित किया. अग्नेशिया सांडी पूर्ति ने कहा कि सरहुल पर्व आदिवासियों की धार्मिक एवं सांस्कृति पहचान दिलाती हैं. आरजेडी के नेता साहिद सिद्दिकी ने कहा कि प्रकृति के बीच आदिवासी ईश्वरीय गुणों को तलाशते हैं और उनके साथ जीते हैं. मौके पर जाहेर के अध्यक्ष सुषमा मुर्मू, सचिव लालजी किस्कू, कोषाध्यक्ष लाजरूस सोरेन, चुरचू मुखिया रूपलाल राम, उप-मुखिया सहदेव किस्कू, पंसस गीता देवी , चुन्नूलाल हंसदा, झामुमो नेता एतो बास्के, सोमरा हंसदा, राकेश सोरेन, सोहन हंसदा, फीनीलाल किस्कू, सुखदेव हेम्ब्रोम, पूर्व आगो मुखिया धनेश्वर सिंह, गुरुदयाल मांझी, प्रमोद प्रसाद, विनय हंसदा, प्रदीप यादव, जयप्रकाश यादव, मन्नू टुडू, रामकिशोर मुर्मू,गोविंद महतो, चनारो उपमुखिया जीतन सोरेन आदि उपस्थित थे .कौन थे सिस्टर जेरमेन व श्याम मुर्मू : सिस्टर जेरमेन ने आदिवासियों के हक एवं अधिकार दिलाने में अहम भूमिका निभायी थी. न्याय के लिए वह हमेशा लड़ती रहीं. उनका देहांत पांच अप्रैल 2008 को हुई. बागजोबरा में सरहुल पर्व 17 अप्रैल 1994 से मनाते आ रहे हैं. छह अप्रैल को सिस्टर जेरमेन को याद किया जाता है. इसी तरह स्व़ श्याम मुर्मू भी समाजसेवी थे, जो समाज के उत्थान के लिए हमेशा काम करते रहे.

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