दशकों से फाइलों में पड़ी हैं कई योजनाएं
Author Prabhat khabar digital desk
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हजारीबाग : हजारीबाग में नगर निगम बोर्ड गठन बाद 18 माह में मात्र पांच बैठक होना निगम की गंभीरता की कहानी बयां करती है. अब तक हुई पांच बैठकों में करीब 100 एजेंडों को शामिल किया गया, लेकिन एजेंडे निगम क्षेत्र के बजाय वार्डों तक ही सीमित रहे. अब तक जितनी भी बैठकें हुई, सभी […]
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हजारीबाग : हजारीबाग में नगर निगम बोर्ड गठन बाद 18 माह में मात्र पांच बैठक होना निगम की गंभीरता की कहानी बयां करती है. अब तक हुई पांच बैठकों में करीब 100 एजेंडों को शामिल किया गया, लेकिन एजेंडे निगम क्षेत्र के बजाय वार्डों तक ही सीमित रहे. अब तक जितनी भी बैठकें हुई, सभी में सिर्फ वार्ड की समस्याएं ही हावी रही. बोर्ड की किसी भी बैठक में निगम के संपूर्ण क्षेत्र को विकसित करनेवाले महत्वाकांक्षी एजेंडे पर चर्चा नहीं हुई. नतीजतन जनता के मन में निगम के प्रति जो विश्वास था, वह टूटने लगा है.
बैठकों का निर्णय अब तक लंबित : निगम अधिनियम के अनुसार निगम बोर्ड की बैठक प्रत्येक माह होनी है, लेकिन 18 माह में सिर्फ पांच बैठक ही हुई. इनमें दो बैठक विवादों की बलि चढ़ गयी. बोर्ड का गठन 28 अप्रैल 2018 को हुआ था. बोर्ड की पहली बैठक 23 मई, दूसरी 26 जून, तीसरी 29 अगस्त 1918 को हुई. चौथी बैठक 18 फरवरी एवं पांचवीं बैठक 17 अगस्त 2019 को हुई. वर्ष 2019 में हुई दोनों बैठकों का निर्णय लंबित है.
नगर निगम बोर्ड की बैठक में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं पर कोई चर्चा नहीं हुई. इस कारण आज भी दर्जनों महात्वकांक्षी योजनाएं निगम की फाइलों में दबी हुई है. इन योजनाओं पर काम करने से शहरवासियों को सुविधा मिलती और विकास को नयी दिशा मिलती. महत्वकांक्षी योजनाओं में अंतर्राज्यीय बस अड्डा का निर्माण 2005 से लंबित है. इसी तरह शहर में मुख्य नाला का निर्माण, मास्टर प्लान, कचरा प्रबंधन, ड्रेनेज सिस्टम, सिटी बस सेवा, सड़क चौड़ीकरण, निगम कार्यालय का आधुनिकीकरण, मार्केट कांप्लेक्स, डेली मार्केट को बहुमंजिली बनाना, मीठा तालाब में मार्केट कॉप्लेक्स जैसी योजनाएं हैं, जिस पर बोर्ड की बैठक में अब तक कोई चर्चा नहीं हुई.
वार्षिक आय आठ करोड़ रुपया : नगर निगम की वार्षिक आय करीब आठ करोड़ रुपया है. होल्डिंग टैक्स से 4.75 करोड़, जलकर समेत अन्य कर से करीब एक करोड़, मार्केट रेंट, बाजार व पार्क नीलामी, टेंडर आदि से करीब दो करोड़ रुपये का राजस्व निगम को मिलता है.
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