काड़तरी नदी पर पुल नहीं बनने से ग्रामीणों को हो रही है परेशानी
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 16 Mar 2019 9:24 PM
संजय सागर, बड़कागांव हजारीबाग संसदीय क्षेत्र के बड़कागांव प्रखंड स्थित काड़तरी नदी पर चार साल पहले पुल का दो पाया धंस कर बह गया था. इसकी सूचना पाकर तत्कालीन कृषि मंत्री योगेंद्र साव ने इसकी सुध ली थी. उन्होंने राज्य सरकार से पुनः पुल बनवाने की अनुशंसा की थी. इस पुल के बहने के बाद […]
संजय सागर, बड़कागांव
हजारीबाग संसदीय क्षेत्र के बड़कागांव प्रखंड स्थित काड़तरी नदी पर चार साल पहले पुल का दो पाया धंस कर बह गया था. इसकी सूचना पाकर तत्कालीन कृषि मंत्री योगेंद्र साव ने इसकी सुध ली थी. उन्होंने राज्य सरकार से पुनः पुल बनवाने की अनुशंसा की थी. इस पुल के बहने के बाद क्षेत्र के सांसद सह केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत सिन्हा भी इसका निरीक्षण करने पहुंचे थे. उस दौरान ग्रामीणों ने मंत्री से शीघ्र पुल बनवाने की मांग की थी.
काड़तरी के ग्रामीणों ने संयुक्त हस्ताक्षर युक्त आवेदन सांसद को सौंपा था. लेकिन अब तक पुल नहीं बन पाया. प्रखंड की यह सबसे बड़ी नदी है. यहां पुल नहीं बनने से यातायात पूरी तरह ठप है. यह पुल काड़तरी, मिर्जापुर, सोनपुरा, आगो, पलांडू, बरसोपानी, बुढ़वा महादेव, डूमारो गुफा, हेन्डेगीर आदि गांवों को जोड़ता है. अगर यहां पुल बन जाता है, तो पतरातू प्रखंड व रांची तक पहुंचने में ग्रामीणों को आसानी होगी.
ग्रामीणों के अनुसार कांडतरी नदी में विशेष प्रमंडल द्वारा 16 जनवरी 2006 में निवर्तमान विधायक लोकनाथ महतो द्वारा शिलान्यास किया गया था. इस पुल का निर्माण लगभग 1 करोड़ रुपये में राज कंस्ट्रक्शन ने कराया था. इस पुल का निर्माण कार्य 2007 में पूर्ण हुआ था. 4 साल पहले इस पुल का दो पाया धंस गया था.
2016 में इस पुल का तीसरा पाया भी टूटकर बह गया था. तब एनटीपीसी के सहयोग से लोहे के एंगल से लगभग 4 फीट चौड़ी पुलिया बनायी गयी. जिसका एक माह पूर्व ही पहली बरसात में ही एप्रोच टूट गया तथा पुल का अधिकांश भाग बह गया. तब से यातायात बंद हो गया है.
हर बरसात में बांस का पुल बनाया जाता है और बह जाता है
जब-जब बरसात आता है, तब-तब काड़तरी, मिर्जापुर, खैरातरी सिरमा छावनियां जैसे दर्जनों गांव के लोगों के लिए बरसात अभिशाप बन जाता है. पुल नहीं बनने के कारण उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. हर बरसात में बच्चों को स्कूल जाने व आने एवं किसानों को बाजार तक आने-जाने के लिए बांस के बलियों से पुलिया बनाया जाता है.
स्कूली बच्चे जर्जर बांस के पुल से नदी पार करते हैं तो देखने वालों का दिल डर से दहल जाता है. हर बरसात में बांस का पुल बनाया जाता है. अधिक वर्षा होने पर नदी में जल स्तर बढ़ जाने के कारण लकड़ी और बांस का बना हुआ पुल भी बह जाता है. इसका स्थायी समाधान अब तक नहीं हो पाया है.
क्या कहते हैं सांसद प्रतिनिधि
सांसद प्रतिनिधि बालेसर कुमार ने बताया कि पुल निर्माण के लिए प्रक्रिया में है. लगभग 20 करोड़ की लागत से पुल का निर्माण कराया जायेगा.
क्या कहना है विधायक का
विधायक निर्मला देवी ने इस संबंध ने बताया कि पुल बनना बहुत ही अनिवार्य है. क्योंकि, विकास का आधार सड़क और पुल ही होता है. इस संबंध में मैं झारखंड विधानसभा में आवाज उठा चुकी हूं. तत्पश्चात मुझे बताया गया कि पुल शीघ्र बना दिया जायेगा.
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