बड़कागांव : पानी के अभाव में हजारों एकड़ में लगे धान की फसल हो रही पीली
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 05 Oct 2018 5:20 PM
– किसानों ने कहा, धान सूखते देख फट रहा है कलेजा, काना नक्षत्र ने दिया धोखा संजय सागर@बड़कागांव झारखंड का धान का कटोरा कहा जाने वाला बड़कागांव प्रखंड में पानी के अभाव में धान की फसल सूख रही है. धान की फसलें पीले होने से किसान वर्ग काफी चिंतित है. किसानों का कहना है कि […]
– किसानों ने कहा, धान सूखते देख फट रहा है कलेजा, काना नक्षत्र ने दिया धोखा
संजय सागर@बड़कागांव
झारखंड का धान का कटोरा कहा जाने वाला बड़कागांव प्रखंड में पानी के अभाव में धान की फसल सूख रही है. धान की फसलें पीले होने से किसान वर्ग काफी चिंतित है. किसानों का कहना है कि वर्षा ऋतु के काना नक्षत्र से बारिश हुआ करता था. जिससे धान की फसलें लहलहा उठते थे. लेकिन इस बार काना नक्षत्र ने भी धोखा दिया. हथिया नक्षत्र पर विश्वास नजरें टिकी हैं, लेकिन हथिया नक्षत्र भी धोखा दे रहा है.
जितिया के बाद हथिया नक्षत्र में सात दिनों तक बारिश हुआ करती थी. लेकिन हथिया नक्षत्र में भी बारिश नहीं हो रही है. हर दिन किसानों की आंखें आसमान की ओर ताकती रहती हैं. पर उम्मीदों पर पानी फिरता जा रहा है. सूख रहे फसल को देखकर किसानों के चेहरे पर निराशा साफ देखी जा सकती है. वर्षा के अभाव के बीच जहां संपन्न किसान पंप सेट के माध्यम से अपनी खेतों की सिंचाई कर ले रहे हैं. वहीं अधिकांश मध्यम व निम्नवर्गीय किसान डीजल के बढ़ते दामों के बीच इस साधन का उपयोग कर पाने में अक्षम हैं.
ऐसे में अपनी फसलों को सूखते देख आंसू बहाने के अलावा उनके पास कोई चारा नहीं है. किसान इस बात को लेकर भी दुखी हैं कि सरकार किसानों के हित को लेकर बड़ी-बड़ी बातें तो कर रही है. लेकिन धान का कटोरा कहे जाने वाले इस क्षेत्र में सरकार की सिंचाई योजना अबतक धरातल पर दिखाई नहीं दे रही है. जन प्रतिनिधियों से कई बार गुहार लगाने के बाद भी अब तक बस आश्वासन ही मिला है.
कृषक कालेश्वर राम, ज्ञानी महतो, सुखदेव राम, बाबू पारा के नंद किशोर दास का कहना है कि सिंचाई की सुविधा नहीं रहने के कारण मध्यम व निम्नवर्गीय किसानों की खेती बारिश पर ही आधारित है. ऐसे में हम छोटे किसान अपनी जमा पूंजी के साथ-साथ महाजनों से सूद पर पैसे लेकर इस आस में फसल लगाते हैं कि अच्छी उपज से हमारे दिन अच्छे होंगे, लेकिन स्थिति ऐसी बनी है कि सूख रहे फसल को देखकर कलेजा फटा जा रहा है.
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