रेटिना में झिल्ली व लेंस लगाने की विधि बतायी

Published at :09 Dec 2017 8:42 AM (IST)
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रेटिना में झिल्ली व लेंस लगाने की विधि बतायी

झारखंड ओप्थाल्मोलॉजिकल सोसाइटी का तीन दिवसीय वार्षिक कांफ्रेंस शुक्रवार को श्री विनायक होटल के सभागार में शुरू हुआ. पहले सत्र में डॉ मंजुल पंत मेमोरियल अवार्ड के लिए वीडियो दिखाया गया. इसमें डॉ सुबोध सिंह (रांची) ने रेटिना में झिल्ली से अंधापन के ऑपरेशन को दिखाया. डॉ नवीन झा (पटना) ने मोतियाबिंद को बिना सूई […]

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झारखंड ओप्थाल्मोलॉजिकल सोसाइटी का तीन दिवसीय वार्षिक कांफ्रेंस शुक्रवार को श्री विनायक होटल के सभागार में शुरू हुआ. पहले सत्र में डॉ मंजुल पंत मेमोरियल अवार्ड के लिए वीडियो दिखाया गया. इसमें डॉ सुबोध सिंह (रांची) ने रेटिना में झिल्ली से अंधापन के ऑपरेशन को दिखाया. डॉ नवीन झा (पटना) ने मोतियाबिंद को बिना सूई का प्रयोग कर के ऑपरेशन को दिखाया. डॉ विभूति भूषण जमशेदपुर ने आंख में चोट लगने के बाद किस तरह रोशनी को बचाया जा सकता है, इसके बारे में बताया. डॉ नितिन धीरा (जमशेदपुर) ने मोतियाबिंद जिसमें पुतली नहीं फैलती है.
उसका इलाज आइरिश हुक का प्रयोग कर लेंस लगाने की विधि को दिखाया. दूसरे सत्र में क्विज का आयोजन हुआ. संचालन डॉ सिराज अली व डॉ जाहिद ने किया. इसमें डॉ स्वाति, डॉ ध्रुव, डॉ अनुज, डॉ विशाखा, डॉ सिंधु, डॉ संतोष, डॉ नेहा और डॉ निमिषा शामिल हुए. कांफ्रेंस में हजारीबाग के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ पी मैत्रा, डॉ ललित जैन, डॉ एसबी सिंह, डॉ सुजय सामंता, डॉ दिब्बा सिद्दीकी, डॉ उमेश, डॉ आसित, डॉ मोहनलाल, डॉ मुकेश, डॉ तीर्थजीत मैत्रा, डॉ रुचि दास, कोडरमा के डॉ रंजीत वर्णवाल, डॉ उमेश भदानी, रामगढ़ के प्रो डॉ राजीव गुप्ता, रांची के डॉ वंदना प्रसाद, डॉ बीपी कश्यप, डॉ भारती कश्यप, डॉ राजीव कुमार, डॉ हलीमउद्दीन, जमशेदपुर के डॉ विभूति, डॉ नितिन, डॉ एसके सिंह उपस्थित थे.
एनएबीएच से मरीजों को इन्फेक्शन दर जीरो बनाना है : डॉ बीपी कश्यप
कांफ्रेंस में डॉ बीपी कश्यप ने आंखों के अस्पताल के लिए एनएबीएच नेशनल एक्रिडियेशन बोर्ड फॉर हॉस्पीटल की जानकारी दी. भारत सरकार की सर्वोच्च संस्था क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया ने स्वास्थ्य सेवाओं के लिए गठित एनएबीएच की मान्यता दी है. एनएबीएच की मान्यता पर खड़ा उतरने के लिए 10 चैप्टर्स, 102 स्टैंडर्स व 636 बिंदुओं पर हमेशा हॉस्पिटल को नजर रखना होता है.
एनएबीएच की मान्यता प्राप्त अस्पतालों में ऑपरेशन थियेटर की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाता है, ताकि मरीजों को इन्फेक्शन की जो दर है, वह बिल्कुल जीरो हों. अस्पताल को बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट, फायर सेफ्टी व आपदा प्रबंधन के लिए भी अस्पताल में विशेष सुरक्षा का इंतजाम करना पड़ता है. इंश्योरेंस व थर्ड पार्टी कंपनियां भी एनएबीएच की मान्यता अस्पतालों को प्राथमिकता देती है. उन्होंने बताया कि झारखंड में कश्यप मेमोरियल आइ हॉस्पिटल को 2009 से एनएबीएच की मान्यता प्राप्त है. हर तीन साल पर एनएबीएच की मान्यता लगातार मिल रही है. झारखंड में स्थित कश्यप मेमोरियल आइ हॉस्पिटल रांची पूरे उत्तरी पूर्वी और पश्चिमी भारत का पहला एनएबीएच की मान्यता प्राप्त आंखों का अस्पताल है.
झारखंड ओप्थाल्मोलॉजिकल सोसाइटी की ओर से नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ विजय कुमार वर्मा को लाइफ टाइम एचिवमेंट अवार्ड देने की घोषणा की गयी. कांफ्रेंस में नौ दिसंबर को डॉ वर्मा को सम्मानित किया जायेगा. उत्कृष्ट कार्य: एमएस के दौरान डॉ विजय कुमार वर्मा 100 से अधिक मोतियाबिंद का ऑपरेशन कर काफी चर्चित हुए थे. 1977 में आस्ट्रेलिया के डॉ एंड्रशन पुतली क्रॉनिएल ट्रांसप्लांट करने के लिए भारत आये थे. डॉ वर्णवाल से प्रभावित होकर उन्हें ऑपरेशन के सारे इंस्टूमेंट उपहार में दिया था. देश-विदेश के जर्नल में उनके पेपर प्रकाशित होते रहे है. 1981 में प्रथम बार आंखों में लेंस लगाने में सफल हुए. मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद टांका लगा कर दूसरे दिन रोगियों को छुट्टी देने लगे.
इसके लिए उन्हें डॉ नागपाल गोल्ड मेडल अवार्ड दिया गया. 1991 में फेको विधि से मोतियाबिंद ऑपरेशन की शुरुआत की. डॉक्टरों की राय: अवार्ड की घोषणा के बाद कांफ्रेंस में शामिल सभी डॉक्टरों ने उन्हें बधाई दी. डॉ विजय कुमार वर्मा को रोगियों के साथ भावनात्मक लगाव रखने वाला चिकित्सक बताया. डॉ पी मैत्रा ने कहा कि 1981 में हजारीबाग से एक निर्धन मरीज को इलाज के लिए डॉ साहब के पास भेजा था. उस मरीज को अपने घर में रख कर इलाज किये थे.
इस घटना को आज तक भूल नहीं पाते है. गरीबों के लिए हमेशा उपलब्ध रहते है. डॉ विजय कुमार वर्मा का परिचय: डॉ विजय कुमार वर्मा एमबीबीएस आरएमसीएच रांची से 1965-1970, हाउस सर्जन शीप 1970-1975, एमएस 1975-1977 आरएमसीएच से किया. झारखंड ओप्थाल्मोलॉजिकल सोसाइटी के अध्यक्ष है. डॉ रीता वर्मा उनकी पत्नी व पुत्री डॉ राशि श्याम नेत्र रोग विशेषज्ञ है. संत कोलंबा हॉस्पीटल हजारीबाग से नौकरी की शुरुआत की.
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