हजारीबाग, चतरा, कोडरमा और रामगढ़ में दर्जनों योजनाएं अधूरी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :04 Dec 2017 12:45 PM (IST)
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हजारीबाग: सरकार की ओर से शुरू की गयी चतरा, हजारीबाग, कोडरमा एवं रामगढ़ में दर्जनों महत्वाकांक्षी जलाशय योजनाओं का काम समय पर पूरा नहीं हो पाया है. 1978 से 1990 के बीच शुरू हुई कई योजनाएं अब भी अधूरी है. योजना के अनुसार रैयतों को अब तक मुआवजा राशि का भुगतान नहीं किया जा सका […]
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हजारीबाग: सरकार की ओर से शुरू की गयी चतरा, हजारीबाग, कोडरमा एवं रामगढ़ में दर्जनों महत्वाकांक्षी जलाशय योजनाओं का काम समय पर पूरा नहीं हो पाया है. 1978 से 1990 के बीच शुरू हुई कई योजनाएं अब भी अधूरी है. योजना के अनुसार रैयतों को अब तक मुआवजा राशि का भुगतान नहीं किया जा सका है. यदि इन योजनाओं को पूरा किया जाता, तो चारों जिले में बड़ी संख्या में किसानों को लाभ मिलता. जलाशय नहीं बनने के कारण किसानों के खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है.
इस साल 35 करोड़ का बजट
जल संसाधन विभाग, हजारीबाग को सरकार की ओर से सालाना करोड़ों रुपये का बजट राज्य सरकार की ओर से मिलता है. 2017-18 के मद में 35 करोड़ रुपये का बजट पारित हुआ. अब-तक 15 करोड़ का आवंटन हो चुका है, इसमें जल संसाधन विभाग की ओर से 9.50 करोड़ रुपये का खर्च हुआ है.
भैरवा जलाशय
रामगढ़ जिले के गोला अंचल में भैरवा जलाशय योजना को समय पर पूरा नहीं किया जा सका. योजना 1987 में शुरू की गयी. इस योजना से 46 गांव प्रभावित हुए हैं. 1261 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जा चुका है. रैयतों को समय पर विस्थापित नहीं किया गया है. आज भी दर्जनों रैयत मुआवजा व पुनर्वास के लिए कार्यालय का चक्कर काट रहे है.
कोनार नहर
हजारीबाग के विष्णुगढ अंचल में कोनार नहर परियोजना की शुरुआत 1978 में हुई. आज तक योजना को पूर्ण नहीं किया गया है. परियोजना के निर्माण में 30 गांव में 3148 एकड़ जमीन अधिग्रहण किया गया है. रैयतों को समय पर नहीं बसाया गया है.
पंचखेरो जलाशय
कोडरमा जिले मरकच्चो अंचल में पंचखेरो जलाशय योजना की शुरुआत 1984-85 में हुई. इससे 25 गांव प्रभावित हुए है. रैयतों से 660 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया. इसी अंचल में केशो जलाशय योजना की शुरुआत 1985-86 में की गयी. 758 एकड़ जमीन ली गयी है. इससे 12 गांव प्रभावित हुए हैं. दोनों योजनाओं को अब-तक पूरा नहीं किया जा सका है.
बक्सा जलाशय
चतरा के इटखोरी अंचल में बक्सा जलाशय योजना का काम भी अधूरा है. इसके आलावा चतरा, हजारीबाग, कोडरमा एवं रामगढ़ जिले में जल संसाधन विभाग से चालू की गयी कई छोटी-बड़ी नहर व चैकडैम का निर्माण कार्य अधूरा है.
तिलैया नहर
कोडरमा के तिलैया नहर योजना की शुरुआत 2017 में हुई है. इसे लिफ्ट योजना का नाम दिया गया है. इस योजना से 25 गांव के लोग प्रभावित होंगे. रैयतों से 128 एकड़ से अधिक जमीन लेने की योजना पर काम किया जा रहा है. सरकार ने तिलैया नहर योजना के लिये आठ करोड़ रुपया जल संसाधन विभाग को आवंटित कर दिया है.
एक पदाधिकारी के जिम्मे तीन-तीन विभाग
चार जुलाई 2014 से गुण नियंत्रक प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता बने राकेश कुमार एक साथ तीन विभाग संभाल रहे हैं. उन्हें गुण नियंत्रक के आलावा भू-गर्भ जल सर्वेक्षण में कार्यपालक अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता के कार्यालय में तकनीकी सलाहकार का प्रभारी बनाया गया है.
योजनाओं को पूरा करने का काम चल रहा है : सीइ
मुख्य अभियंता रामचंद्र रजक ने कहा कि सभी योजनाओं को पूरा करने का काम चल रहा है. कई योजनाएं पूर्ण होने के अंतिम चरण में है. रैयतों को लाभ पहुंचाया गया है. सरकार के आदेश पर विभाग की ओर से नयी योजनाओं को चालू किया गया है. अधिकारियों एवं कर्मचारियों की कमी है. यह सरकार को बताया गया है. हर माह सभी योजनाओं की समीक्षा हो रही है.
एक वर्ष से अधीक्षण अभियंता नहीं
मुख्य अभियंता कार्यालय जल संसाधन विभाग हजारीबाग में एक वर्ष से अधीक्षण अभियंता नहीं हैं. 28 नवंबर 2016 को अधीक्षण अभियंता नवीन नारायण के स्थानांतरण के बाद से पद रिक्त है. अधीक्षण अभियंता के नहीं रहने से विकास कार्यों का सर्वेक्षण समय पर नहीं हो पा रहा है. संबंधित विभागों में सूचना का अादान-प्रदान नहीं हो रहा है. सर्वेक्षण का काम भी नहीं हो रहा है.
कर्मचारियों की कमी
मुख्य अभियंता कार्यालय जल संसाधन विभाग हजारीबाग के अधीन नौ डिविजन कार्यरत है. इसमें बगोदर, डुमरी, बनासो, कोनार नहर प्रमंडल, तेनुघाट बांध प्रमंडल, जल पथ प्रमंडल हजारीबाग, जल पथ प्रमंडल बरही, जल पथ प्रमंडल संख्या दो हजारीबाग, गुण नियंत्रण एवं भू-गर्भ विभाग शामिल हैं. कई विभाग में कार्यपालक अभियंता नहीं हैं. कर्मचारियों की कमी है.
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