जिले के शहरी क्षेत्र में बढ़ा साइबर अपराध, दर्जनों खातों से लाखों की निकासी

Published at :06 Nov 2017 1:22 PM (IST)
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जिले के शहरी क्षेत्र में बढ़ा साइबर अपराध, दर्जनों खातों से लाखों की निकासी

हजारीबाग: हजारीबाग शहरी क्षेत्र स्थित बैंक व एटीएम से साइबर अपराधियों ने छह दर्जन से अधिक बैंक ग्राहकों के खाते से लाखों रुपये की फर्जी निकासी कर ली है. इस संबंध में ग्राहकों ने संबंधित थानों में आइटी एक्ट के तहत मामले दर्ज कराये है. जनवरी 2017 से 15 अक्तूबर 2017 तक के आंकड़े के […]

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हजारीबाग: हजारीबाग शहरी क्षेत्र स्थित बैंक व एटीएम से साइबर अपराधियों ने छह दर्जन से अधिक बैंक ग्राहकों के खाते से लाखों रुपये की फर्जी निकासी कर ली है. इस संबंध में ग्राहकों ने संबंधित थानों में आइटी एक्ट के तहत मामले दर्ज कराये है. जनवरी 2017 से 15 अक्तूबर 2017 तक के आंकड़े के अनुसार सदर थाना में 38 ग्राहकों के खातों से फर्जी निकासी, आॅनलाइन मार्केटिंग, नेट बैंकिंग के माध्यम से रुपये की निकासी की गयी है. इधर, सदर कोर्रा टीओपी क्षेत्र मे स्थित बैंक व एटीएम से 14 ग्राहकों के खाते से फर्जी निकासी की गयी है.

सदर बड़ा बाजार टीओपी क्षेत्र से छह ग्राहकों के खाते व एटीएम से निकासी हुई है. जबकि सदर लौहसिंघना टीओपी क्षेत्र में स्थित बैंक व एटीएम से दो ग्राहकों के खाते से निकासी हुई. फर्जी निकासी के अलावा आइटी एक्ट के तहत युवतियों व छात्राओं के व्हाटसएप व फेसबुक से फोटो चुरा अश्लील साइट में डालना. व्हाटसएप व फेस बुक के माध्यम से अश्लील बाते, धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने वाले समाचार को पोस्ट करने के मामले को दर्ज किया जाता है. सभी मामले संबंधित थाना मे दर्ज है.

ऐसे मामले के कई आरोपियों को हजारीबाग पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा है. सदर थाना कांड संख्या 267-17 और 392-17 के एक-एक आरोपियों को पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेजा है. सदर थाना थाना कांड संख्या 682-17 के एक आरोपी की गिरफ्तारी हुई है. जबकि सदर थाना कांड संख्या 418-17 को साक्ष्य के आभाव मे मामले की निष्पादन हुआ है. शेष मामले में अनुसंधान जारी है.

साइबर अपराधी कैसे करते है रुपये की फर्जी निकासी : बैंक ग्राहक व एटीएम धारकों को साइबर अपराधी बैंक अधिकारी बन कर एटीएम के पासवर्ड नंबर व एटीएम नंबर की मांग करते है. अधिकतर ग्राहकों को यह कहा जाता है कि आपका एटीएम की वैधता समाप्त हो गयी है. आपकी एटीएम बंद हो गयी है. इसे चालू करना है. इसके लिए एटीएम नंबर व इसका पासवर्ड नंबर शीघ्र बताये. ग्राहक बिना समझे बुझे अपना एटीम का नंबर बता देते है. इसके बाद एटीएम से फर्जी तरीके से रुपये की निकासी कर ली जाती है. साइबर अपराधी फर्जी निकासी के लिए दूसरे तरीके का भी इस्तेमाल करते है. एटीएम से बिना खाते नंबर और बिना एटीएम नंबर से रुपये की आॅनलाइन मार्केटिंग कर लेते है. साइबर अपराधी इस तरह कैसे दूसरे खाते से आनलाइन मार्केटिंग करते है, इसकी जांच साइबर के एक्सपर्ट कर रहे है.
आइटी एक्ट के अनुसंधान: आइटी एक्ट के तहत दर्ज मामले के अनुसंधान कर्ता इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी होते है. अनुसंधान अधिकारी सबसे पहले जिस नंबर से ग्राहक के मोबाइल पर फोन आता है, उस नंबर को ट्रेस करते है. कई मोबाइल नंबर ट्रेस होता है, किंतु वह फेक नंबर रहता है. फर्जी आधार कार्ड, फर्जी वोटर आइडी से सिम लेते है. ऐसे फरजी दस्तावेज पर बैंक में अकांउट खुलवा कर ग्राहकों के खाते से रुपये उड़ा लेते है.
एसपी ने कहा: एसपी अनूप बिरथरे ने कहा कि साइबर अपराध पर अंकुश लगाने के लिए नयी तकनीक अपनाया जा रहा है. ऐसे मामले के कई आरोपियों की गिरफ्तारी पुलिस ने की है. बैंक ग्राहकों की नासमझी के कारण भी उनके खाते से साइबर अपराधी रुपये की फर्जी निकासी कर ले रहे है. एसपी ने कहा कि साइबर अपराध से जुड़े मामले को निष्पादन करने को सभी अनुसंधानकर्ताओं को निर्देशित किया गया है. उन्होंने कहा कि बैंक अधिकारियों को ग्राहकों को जागरूक करना चाहिए. इसके लिए बैंक को बैनर, पोस्टर व सेमिनार कर जागरूक करने की जरूरत है.
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