सिसई के दो वेंडरों के पास सरकार का 84,16,147 रुपये बकाया

Updated at : 22 Mar 2025 8:47 PM (IST)
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सिसई के दो वेंडरों के पास सरकार का 84,16,147 रुपये बकाया

मनरेगा. वित्तीय वर्ष 2022-23 व 2023-24 का रॉयल्टी, डीएमएफटी व जीएसटी की राशि है बकाया

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मनरेगा. वित्तीय वर्ष 2022-23 व 2023-24 का रॉयल्टी, डीएमएफटी व जीएसटी की राशि है बकाया गुमला. सिसई प्रखंड कार्यालय में मनरेगा अंतर्गत निबंधित दो वेंडरों (आपूर्तिकर्ता) के पास सरकार का वित्तीय वर्ष 2022-23 व 2023-24 का रॉयल्टी, डीएमएफटी व जीएसटी की राशि 84 लाख 16 हजार 147.55 रुपये बकाया है. इसमें वित्तीय वर्ष 2022-23 में वेंडर मेसर्स मोहम्मद दिलशाद आलम के पास 19 लाख, 36 हजार, 787.29 रुपये रॉयल्टी, दो लाख, 16 हजार, 204.15 रुपये डीएमएफटी और 25 लाख, 89 हजार, 124.08 रुपये जीएसटी और वेंडर मेसर्स मोहम्मद उमर फारूकी अंसारी के पास 64871 रुपये रॉयल्टी, 6434.10 रुपये डीएमएफटी व एक लाख, 10 हजार, 461.82 रुपये जीएसटी बकाया है. इस प्रकार वित्तीय वर्ष 2023-24 का वेंडर मेसर्स मोहम्मद दिलशाद आलम के पास छह लाख, 77 हजार, 626.01 रुपये रॉयल्टी, 98831.64 रुपये डीएमएफटी व 27 लाख 15 हजार 807.37 रुपये जीएसटी बकाया है. ज्ञात हो कि दोनों वेंडरों मनरेगा के विभिन्न योजनाओं में बालू, चिप्स, बोल्डर, ईंट व मोरम की आपूर्ति की गयी है. इसके बदले में वेंडरों को वित्तीय वर्ष 2022-23 में कुल दो करोड़, 99 लाख, 554.24 रुपये व वित्तीय वर्ष 2023-24 में दो करोड़, 27 लाख, 95 हजार, 455.29 रुपये भुगतान किया गया है. राशि भुगतान होने के बावजूद वेंडरों द्वारा रॉयल्टी, डीएमएफटी व जीएसटी राशि जमा नहीं की जा रही है. इधर, वेंडरों से उक्त बकाया राशि की वसूली के लिए उपविकास आयुक्त सह अतिरिक्त जिला कार्यक्रम समन्वयक (मनरेगा कोषांग) गुमला द्वारा सिसई बीडीओ को पत्र लिखा गया है. पत्र के माध्यम से बीडीओ को एक सप्ताह के अंदर दोनों वेंडरों से बकाया रॉयल्टी, डीएमएफटी व जीएसटी राशि की जमा कराने का निर्देश दिया गया है. बकाया राशि जमा नहीं करने वाले वेंडरों को काली सूची में डालते हुए उसके विरुद्ध सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कराने की बात कही गयी है. पत्र में उल्लेखित है कि प्रखंड स्तर पर चयनित मनरेगा वेंडरों को विभिन्न योजनाओं में आपकी (बीडीओ) देख-रेख से राशि का भुगतान किया जाता है. उक्त भुगतान की गयी राशि का जांच निदेशक लेखा प्रशासन एवं स्वनियोजन डीआरडीएस गुमला की अध्यक्षता में जिला स्तरीय जांच दल द्वारा कराया गया है, जिसमें पाया गया है कि वेंडरों को किये गये भुगतान में नियमानुसार रॉयल्टी, डीएमएफटी व जीएसटी राशि की कटौती की राशि आपके द्वारा जमा नहीं करायी जाती है. इस कारण सरकार को राजस्व की हानि हो रही है.

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