सरहुल विशेष : सूर्य और धरती के विवाह का उत्सव है प्रकृति पर्व सरहुल

Updated at : 21 Mar 2026 7:04 AM (IST)
विज्ञापन
सरहुल के अवसर पर आदिवासी कन्याएं

सरहुल के अवसर पर आदिवासी कन्याएं

Gumla: गुमला में सरहुल पर्व को प्रकृति, आस्था और संस्कृति का प्रतीक बताते हुए आदिवासी समाज ने इसे सूर्य और धरती के विवाह उत्सव के रूप में वर्णित किया. केंद्रीय सरहुल संचालन समिति के सचिव दीपनारायण उरांव ने कहा कि यह पर्व एकता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है, जिसे आदिवासी समाज सदियों से निभाता आ रहा है. पूरी रिपोर्ट नीचे पढ़ें...

विज्ञापन

दुर्जय पासवान
Gumla: सरहुल प्रकृति पर्व है. इस पर्व से लोगों की आस्था और विश्वास जुड़ा हुआ है. सरहुल को सूर्य और धरती के विवाह उत्सव के रूप में मनाया जाता है. साथ सरना स्थल में पूजा कर वर्षा व खेतीबारी का अनुमान लगाया जाता है. आदिवासी समाज के लोगों ने सरहुल पर्व की विशेषता, संस्कृति, मान्यता के बारे में बताया. सरहुल आदिवासी समाज का सबसे बड़ा पर्व है. जिसे नये वर्ष के रूप में मनाया जाता है. केंद्रीय सरहुल संचालन समिति के सचिव दीपनारायण उरांव ने कहा है कि सरहुल पर्व को खद्दी कहा जाता है. सरहुल पर्व मनाने से पूर्व संध्या कार्यक्रम किया जाता है. जिससे आदिवासी समाज के लोग अपने पारंपरिक वेशभूषा में एक साथ एक स्थान में जुटते हैं. यह पर्व हम एकता के सूत्र में बांधता है. पर्यावरण संरक्षण पर हम ध्यान दें. आदिवासी समाज पूरे विश्व को सरहुल के माध्यम से प्रकृति से जुड़ाव का संदेश देता है.

उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज हमेशा पर्यावरण के संरक्षण में लगा रहता है. आज पूरा विश्व प्रकृति के संरक्षण की बात कह रहा है. जिसे आदिवासी समाज पूर्वजों के समय से करते आ रहे हैं. जिस प्रकार हम प्रकृति से खिलवाड़ कर इसके खिलाफ काम किये हैं. इसका असर है. आज हम कई बीमारियों में फंस रहे हैं. इसलिए जरूरी है. हम सभी प्रकृति के संरक्षण पर ध्यान दें. ऐसे आज पूरा विश्व प्रकृति की सुरक्षा पर काम कर रहा है.

जुलूस में डीजे, नशापान एवं अबीर के उपयोग पर रोक

केंद्रीय सरहुल संचालन समिति गुमला द्वारा 21 मार्च को सरहुल महोत्सव एवं सांस्कृतिक जुलूस शहर में निकाला जायेगा. जानकारी देते हुए समिति के सचिव दीपनारायण उरांव ने कहा कि महोत्सव व जुलूस को लेकर तैयारी पूरी हो गयी है. दुंदुरिया उरांव सरना क्लब में दिन के 11 बजे पूजा, एक बजे प्रसाद वितरण किया जायेगा. दुंदुरिया सरना, उरांव सरना क्लब दुंदुरिया, गुमला सरना पालकोट रोड, वन विभाग कॉलोनी, चेटर गुमला, सरहुल नगर करमटोली, मुरली बगीचा, शास्त्री नगर, शांति नगर, आदर्श नगर ढोढरीटोली, पुग्गू दाउद नगर में पूजा होगी. वहीं दिन के दो बजे से सांस्कृतिक जुलूस निकाला जायेगा. जुलूस उरांव क्लब दुंदुरिया से प्रस्थान करेगी, जो थाना चौक, चैनपुर चौक, मेन रोड, टावर चौक, पालकोट रोड, झंडा पूजा स्थल, पाट पूजा स्थल, स्टेट बैंक के पास से बाये गली होते हुए सिसई रोड, टावर चौक, थाना रोड होते हुए उरांव क्लब दुंदुरिया के पास समाप्त होगी.

चैनपुर रोड से आने वाली जुलूस चैनपुर चौक, सिसई रोड से आने वाली जुलूस टावर चौक से थाना रोड होते हुए थाना चौक, पालकोट रोड से आने वाली जुलूस पाट स्थल स्टेट बैंक से सिसई रोड जाने वाली गली से टावर चौक, थाना रोड, थाना चौक के पास मुख्य जुलूस में सम्मिलित होगी. पालकोट रोड स्थित समिति के स्टॉल में जुलूस में भाग लेने वाले खोड़हा को समिति की ओर से एक-एक झंडा दिया जायेगा. उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खोड़हा दल को पुरस्कार दिया जायेगा. सांस्कृतिक जुलूस में नशापान एवं अबीर का उपयोग वर्जित रहेगा.

प्रकृति की सुरक्षा के लिए हम काम करें : कृष्णा

गुमला के खेल संयोजक सह आदिवासी युवा नेता कृष्णा उरांव ने कहा है कि इस वर्ष सरहुल पर्व पर 21 मार्च को गुमला में भव्य जुलूस निकालने की तैयारी है. शहर के विभिन्न छात्रावासों द्वारा जुलूस को लेकर तैयारी की गयी है. पारंपरिक वेश-भूषा में जुलूस निकालने की तैयारी चल रही है. उन्होंने कहा है कि सरहुल पर्व को हम सभी मिलजुलकर मनाये. साथ ही जिस प्रकार हम प्रकृति से खिलवाड़ कर इसके खिलाफ काम किये हैं. इसका असर है. आज हम कई बीमारियों में फंस रहे हैं. इसलिए जरूरी है. हम सभी प्रकृति के संरक्षण पर ध्यान दें.

सरहुल प्रकृति से जुड़ा हुआ पर्व है : मिशिर कुजूर

आदिवासी युवा नेता मिशिर कुजूर ने कहा है कि सरहुल प्रकृति पूजक आदिवासियों का एक महत्वपूर्ण पर्व है. पूजा में विशेषकर साल वृक्ष एवं सरई फूल का महत्व रहता है. सरहुल पूजा का मुख्य उद्देश्य है कि पहान एवं पुजार द्वारा धरती माता का पूजन करते हैं. जिसमें पहान एवं पहनाईन का विवाह कराया जाता है. जिन्हें धरती व सूर्य के रूप में जाना जाता है. सरहुल प्रकृति से जुड़ा हुआ पर्व है. प्रकृति की रक्षा करने वाले लोग इस पर्व को बड़े ही धूमधाम से मनाते हैं. यह पर्व हमें प्रकृति की रक्षा करने का संकल्प दिलाता है.

ये भी पढ़ें…

खद्दी, बा परब या बहा: नाम अनेक पर आस्था एक, झारखंड में सरहुल की धूम, जानें 3 दिनों का पूरा विधान

Ranchi: सरहुल आयोजन स्थलों पर नहीं होगी पानी की किल्लत, मेयर रोशनी खलखो का अधिकारियों को निर्देश

विज्ञापन
AmleshNandan Sinha

लेखक के बारे में

By AmleshNandan Sinha

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola