सदर अस्पताल में पुर्जा मिलने व इलाज में देरी होने से डेढ़ वर्षीय बच्ची की मौत

Updated at : 22 Jul 2025 10:11 PM (IST)
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सदर अस्पताल में पुर्जा मिलने व इलाज में देरी होने से डेढ़ वर्षीय बच्ची की मौत

पुर्जा कटाने में लगा डेढ़ घंटा लगा, पुर्जा कटाने के बाद जब डॉक्टर ने जांच की, तो बच्ची की हो गयी थी मौत

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गुमला. सदर अस्पताल के ओपीडी में कतार में खड़े होकर पुर्जा कटाने में देर होने व पुर्जा मिलने के बाद इलाज में भी देर होने से बच्ची की मौत हो गयी. मंगलवार को सदर अस्पताल गुमला में मरीजों के इलाज के लिए लंबी कतार थी. इस बीच चैनपुर प्रखंड के बामदा होरकोटोली निवासी कमलेश उरांव अपने गांव से गाड़ी रिजर्व कर 10.30 बजे सदर अस्पताल डेढ़ वर्षीय बेटी खुशी कुमारी को लेकर इलाज कराने पहुंचा था. वह अपनी बेटी को लेकर सीधा इमरजेंसी वार्ड गया, जहां नर्सों द्वारा ओपीडी पुर्जा लेकर चिकित्सक को दिखाने की सलाह दी. लेकिन कमलेश बच्ची की स्थिति को देखते हुए सीधा शिशु रोग विशेषज्ञ के पास चला गया, जहां वह दिखाने के लिए आग्रह किया. लेकिन सदर अस्पताल में प्रतिनियुक्त होमगार्ड जवान ने उसे अंदर जाने से रोक दिया. पूछा कि ओपीडी पुर्जा कहां है. आप पुर्जा लेकर आइये, तभी आपको अंदर जाने देंगे. तभी कमलेश पुर्जा लेने के लिए ओपीडी काउंटर गया, जहां उसे पुर्जा लेने के लिए डेढ़ घंटे का समय लग गया. इस दौरान उसकी बच्ची की मौत हो गयी. पुर्जा लेने के बाद उसने अपनी बेटी को चिकित्सक से दिखाया, तो चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया. इधर, बच्ची की मौत के बाद परिजनों को रो-रो कर बुरा हाल था.

अस्पताल के सिस्टम ने मेरी बेटी की जान ले ली : मां

परिजन अस्पताल प्रबंधन पर इलाज व पुर्जा मिलने में देर होने पर मौत होने का आरोप लगाया. मृत बच्ची के मां सरिता कुमारी ने कहा कि अगर समय रहते मेरी बेटी का इलाज हो जाता, तो शायद वह अभी जीवित रहती. लेकिन हम लोग तो दूर से आये थे. यहां की व्यवस्था से अवगत नहीं थे. अस्पताल के किसी भी कर्मी ने हमारी मदद नहीं की. मेरी बेटी का इलाज में देरी होने के कारण उसकी मौत हो गयी. मेरी बेटी की मौत का जिम्मेदार सदर अस्पताल गुमला है. अस्पताल के सिस्टम ने मेरी बेटी की जान ले ली.

बच्ची की अस्पताल लाने से पहले मौत हो गयी थी : सीएस

सिविल सर्जन डॉ शंभूनाथ चौधरी ने कहा कि बच्ची की मौत सदर अस्पताल गुमला लाने के क्रम में डेढ़ घंटे पूर्व हो चुकी थी. मंगलवार को शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रुद्र कुमार की ड्यूटी थी. उन्होंने बच्ची की जांच की, तो पाया कि मौत होने का काफी समय बीत गया है. बच्ची में राइजर मोटिस हो चुका था. चूंकि मौत का समय लगभग डेढ़ घंटे से अधिक बीत जाने के बाद उसके हाथ व पैर कड़ा हो गया था. पुर्जा वितरण में देर व लापरवाही का आरोप बेबुनियाद है. फिर भी मामला संज्ञान में आया है. मैं इसके लिए जांच कमेटी गठित कर जांच कराऊंगा. जांच में दोषी पाये जाने वालों पर कार्रवाई की जायेगी.

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