Gumla: बंजर भूमि से हरियाली तक का सफर, सब्जी की खेती ने बदली किरण की जिंदगी

Updated at : 16 Mar 2026 8:38 PM (IST)
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Kiran Oraon

महिला किसान किरण उरांव

Gumla: गुमला की महिला किसान किरण उरांव ने अपने जज्बे और जुनून से अपनी बंजर जमीन को हरियाली में बदल दिया. अब उनके एक एकड़ खेत में आम की बागवानी है.

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जगरनाथ पासवान
Gumla: जो जमीन कभी बंजर और बेकार पड़ी हुई थी. वह जमीन अब हरी-भरी है. उस जमीन पर 100 से भी अधिक आम के पेड़ हैं. इसके साथ ही जमीन पर तरह-तरह की सब्जियां भी उगायी जा रही हैं. इस बदलाव की कहानी की सूत्रधार एक छोटे से गांव की एक कृषक महिला किरण कुजूर हैं. किरण सदर प्रखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत फोरी के भंडरिया गांव की रहने वाली हैं. वह गांव के मुकुंद उरांव की पत्नी हैं. इस कृषक महिला ने अपने गांव में वह कर दिखाया, जिसके बारे में कभी किसी ने सोचा भी नहीं था.

एक एकड़ जमीन पर आम की बागवानी

साल 2022-23 में किरण को मनरेगा अंतर्गत बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत एक एकड़ भूमि पर आम बागवानी की योजना मिली थी. योजना के तहत जब किरण की बंजर भूमि पर काम शुरू हुआ तो सिंचाई की कठिन चुनौती सामने आयी. इसके बावजूद किरण ने हार नहीं मानी और गांव के ही दूसरे किसान के तालाब से खुद पानी ढोकर इस कठिन चुनौती का सामना किया. किरण को उसकी लगन और मेहनत का फल मिला. फिलहाल सब्जियों की खेती से किरण हर साल हजारों रुपए की आमदनी कर रही हैं.

अगले साल उनके बागान का आम भी बाजार में उपलब्ध होगा. 100 से भी अधिक से पेड़ों से 60 से 70 हजार रुपये आमदनी की उम्मीद है. आम आने के बाद किरण की सालाना आय दोगुनी हो जायेगी.

नहीं थी सिंचाई सुविधा, पौधों को बचाने की चुनौती

मनरेगा बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत किरण के एक एकड़ भूमि पर आम के 112 पौधे लगाये गये. शुरुआत में किरण को उम्मीद नहीं थी कि ये पौधे बच पायेंगे, लेकिन जब उन्हें संबंधित विभाग और प्रदान संस्था से तकनीकी सहायता मिली तो उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने प्रयास शुरू किया. सिंचाई की सुविधा नहीं होने के कारण पौधों को बचाना एक बड़ी चुनौती थी. किरण पास के तालाबों से पानी लाकर पौधों को सींचती थीं और इस तरह उन्होंने पौधों को जीवित रखा.

अंतरवर्ती खेती से हो रही 50 से 60 हजार की आमदनी

किरण ने आम की बागवानी के साथ ही अंतरवर्ती खेती की शुरुआत की. बागवानी में तीन वर्षों तक मजदूरी करने के बाद किरण को करीब 10 हजार रुपये मजदूरी का पैसा मिला. उस पैसे का किरण ने सदुपयोग करते हुए आम के बाग में अंतरवर्ती साग एवं सब्जी की खेती शुरू की. पहले साल मिट्टी की उर्वरता और नमी की कमी के कारण सब्जियां ठीक से नहीं उग पायी. जिससे किरण को हताशा तो हुई, लेकिन हार नहीं मानी. दूसरे साल उन्होंने फिर कोशिश की और इस बार उन्हें सफलता मिली. उन्होंने तरबूज, करेला, मिर्च सहित लंबी फली जैसी सब्जियां उगायी. जिससे लगभग 50 से 60 हजार रुपये की आमदनी हो रही है.

आम बाजार में आने से आय होगी दोगुनी

किरण उरांव कहती है कि यदि मन में कुछ कर गुजरने की इच्छा और आवश्यक सहयोग और संसाधन मिले तो हर कोई अपना जीवन बेहतर बना सकता है. किरण ने बताया कि तीन साल पहले तक उसकी जमीन बंजर और बेकार पड़ी हुई थी. आज उसी जमीन से उनके जीवन में काफी बदलाव आया है. बंजर भूमि पर पहले आम की बागवानी की. इसके बाद उसी जमीन पर तरबूज व सब्जियों की भी खेती कर रही हैं. जिससे अच्छी-खासी आमदनी हो रही है. किरण को उम्मीद है कि आगामी साल उनके बागान के आम बाजार में आने के बाद उनकी आय दोगुनी हो जायेगी.

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AmleshNandan Sinha

लेखक के बारे में

By AmleshNandan Sinha

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

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