बाबूगिरी’ से बढ़ रही जनता की परेशानी, कर्मचारियों को ग्रामीण क्षेत्र में भेजने की मांग

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गुमला में सरकारी कर्मचारियों की कार्यशैली से परेशान अधिवक्ताओं ने उपायुक्त से शिकायत की है. मांग की गई है कि लापरवाह कर्मचारियों को ग्रामीण क्षेत्रों में भेजें.

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गुमला. गुमला नगर परिषद, अंचल कार्यालय गुमला और अनुमंडल कार्यालय गुमला में कार्यरत कुछ कर्मचारियों के व्यवहार और कार्यशैली को लेकर अधिवक्ताओं एवं स्थानीय लोगों ने नाराजगी जतायी है. इस संबंध में उपायुक्त से संवाद कर कर्मचारियों की कार्यप्रणाली में सुधार कराने तथा जरूरत पड़ने पर उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थापित करने की मांग की गयी है. अधिवक्ताओं का आरोप है कि प्रमाण पत्र समेत विभिन्न सरकारी कार्यों के निष्पादन में निर्धारित समय-सीमा का पालन नहीं किया जाता है.

एक काम के लिए बार-बार बुलाने की शिकायत

शहर, ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों से आने वाले सरल स्वभाव के लोगों को एक ही काम के लिए कई बार कार्यालय बुलाया जाता है. कभी किसी दस्तावेज तो कभी दूसरे दस्तावेज की मांग कर लोगों को परेशान करने की शिकायत भी सामने आयी है. इससे आम लोगों में सरकारी कार्यालयों के प्रति असंतोष बढ़ रहा है.

अधिकार क्षेत्र से अधिक दखल देने का आरोप

अधिवक्ताओं ने कहा कि कई बार कर्मचारी अपने अधिकार क्षेत्र से अधिक बातें करते हैं. जिससे आम जनता को परेशानी होती है. उन्होंने मांग की कि ऐसे कर्मचारियों को चिन्हित कर ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थापित किया जाये. ताकि वे ग्रामीण जनता की समस्याओं और कठिनाइयों को करीब से समझ सकें. वहीं शहरी क्षेत्र के महत्वपूर्ण कार्यालयों में पर्याप्त अनुभव और नियमित सेवा पूरी कर चुके कर्मचारियों की पदस्थापना पर जोर दिया गया. अधिवक्ता अरूण कुमार ने कहा कि कर्मचारियों की कार्यकुशलता और व्यवहार में सुधार नहीं हुआ तो इसका सीधा प्रभाव संबंधित पदाधिकारियों की छवि पर भी पड़ सकता है.

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असंतोष बढ़ने से पहले सुधार की जरूरत

जनता और छात्रों के बीच बढ़ते असंतोष को समय रहते दूर करने की जरूरत है. मांग रखने वालों में अधिवक्ता अरुण कुमार, राजनारायण नाग, रितेश कुमार, बसंत उरांव, जगरनाथ उरांव, जेआर भगत, रंजीत बा, शैलेंद्र नेहरू, महादेव खरिया, सुबोध दुंगदुंग, अनिल खलखो, जगतपाल ओहदार, विष्णु, सुरेंद्र ओहदार, लखन सिंह समेत अन्य अधिवक्ता, कर्मचारी एवं किरानी शामिल हैं. नगर परिषद के कर्मचारियों की कार्यशैली पर भी विशेष ध्यान देने की मांग की गयी है.

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दुर्जय पासवान

लेखक के बारे में

By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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