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गुमला में अधिक बारिश किसानों के लिए बनी मुसीबत, अभी भी आधी खेती होनी बाकी

Updated at : 25 Jul 2025 6:15 AM (IST)
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Gumla Weather News Agriculture

गुमला जिले में एक खेत से बहता पानी. फोटो : प्रभात खबर

Gumla Weather News: गुमला जिले में हुई अत्यधिक बारिश ने किसानों के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है. अभी भी धान की पूरी खेती नहीं हो पायी है. मक्का, अरहर और मूंगफली की खेती अंतिम चरण में है. धान की अभी भी आधी खेती होनी बाकी है. धान की खेती 1.88 लाख हेक्टेयर भूमि के मुकाबले 1,01,425 हेक्टेयर भूमि पर खेती हुई है.

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Gumla Weather News| गुमला, जगरनाथ पासवान : गुमला जिले में अधिक बारिश किसानों के लिए मुसीबत बन गयी है. अभी भी आधी खेती होनी बाकी है. हालांकि, गुमला जिला में रोज की बारिश के बीच खरीफ फसलों की खेतीबारी का काम जोरों पर है. जिले में मक्का, अरहर व मूंगफली जैसे फसलों की खेती काम अंतिम चरम पर है. मक्का के निर्धारित लक्ष्य 8100 हेक्टेयर भूमि के विरूद्ध 7053 हेक्टेयर, अरहर 16000 हेक्टेयर के विरूद्ध 11894 हेक्टेयर व मूंगफली 5000 हेक्टेयर के विरूद्ध 4456 हेक्टेयर भूमि पर खेती हो चुकी है. लेकिन, जिले की प्रमुख फसल धान की अभी भी आधी खेती होनी बाकी है.

1.01 लाख हेक्टेयर भूमि पर हो चुकी है खेती

हालांकि, गुमला जिले में हर साल धान आच्छादन का लक्ष्य 1.88 लाख हेक्टेयर भूमि है. लगभग 1.75 लाख हेक्टेयर से 1.90 लाख हेक्टेयर से भी अधिक भूमि पर धान की खेती होती रही है. इधर, इस साल 1.88 लाख हेक्टेयर की जगह 22 जुलाई तक 54 प्रतिशत यानी 1,01,425 हेक्टेयर भूमि पर खेती हो चुकी है. इसमें छींटा विधि से 35,812 हेक्टेयर और रोपा विधि से 65,613 हेक्टेयर भूमि पर खेती हो चुकी है.

  • मक्का, अरहर व मूंगफली की खेती अंतिम चरण में, धान की अभी भी आधी खेती होनी बाकी
  • गुमला जिला में रोज की बारिश के बीच खरीफ फसलों की खेतीबारी का काम जोरों पर है
  • धान की 1.88 लाख हेक्टेयर के विरूद्ध 101425 हेक्टेयर भूमि पर खेती हो चुकी है

6,115 हेक्टेयर में हुई मड़ुआ की खेती

खरीफ के अन्य फसलों में मड़ुआ आच्छादन के निर्धारित लक्ष्य 10 हजार हेक्टेयर की जगह 6,115 हेक्टेयर, दलहन में उरद 8000 हेक्टेयर की जगह 3,284 हेक्टेयर, मूंग 1,500 हेक्टेयर की जगह 223 हेक्टेयर, अन्य दलहन 2,200 हेक्टेयर के विरुद्ध 372 हेक्टेयर भूमि पर खेती हो चुकी है. इसके अतिरिक्त अभी ज्वार, बाजरा, कुल्थी, तिल, सोयाबीन, सूर्यमुखी, सरगुजा और अरंडी जैसे फसलों की खेती होनी बाकी है.

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800 मिमी से भी अधिक हो चुकी है बारिश

इस साल 22 जुलाई 2025 तक जिले भर में कुल 801.9 मिमी बारिश हो चुकी है. जनवरी माह में बारिश नहीं हुई. इसके बाद फरवरी माह में 12.3 मिमी के विरूद्ध 5.8 किमी, मार्च माह में 18.2 मिमी के विरूद्ध 34.8 मिमी, अप्रैल माह में 11.6 मिमी के विरूद्ध 40.1 मिमी, मई माह में 28.3 मिमी के विरूद्ध 92.6 मिमी, जून माह में 205.3 मिमी के विरूद्ध 351.8 मिमी व जुलाई माह में 299.7 मिमी के विरूद्ध 276.8 मिमी बारिश हो चुकी है.

गुमला में सामान्य से अधिक बारिश

जिले में अपेक्षा से भी अधिक हो रही बारिश अब किसानों के लिए चिंता का कारण बन रहा है. पर्याप्त बारिश के बीच किसान खेतों की तैयारी के बाद फसल भी लगा देते थे. लेकिन इस साल अपेक्षा से अधिक बारिश के कारण अभी भी किसानों की आधी आबादी खेतों में फसल नहीं लगा सके हैं. अधिक बारिश के कारण खेतों में लबालब पानी भरा है. किसान उस पानी को निकालने के बाद फसल लगाने की तैयारी करते-करते फिर से बारिश हो जा रही है और खेतों में पानी भर जा रहा है. अधिक बारिश के कारण किसानों को खेतों में तैयार धान बिचड़ा को भी बचाने की चिंता सता रही है.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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