गुमला: आजादी के दशकों बाद भी बुनियादी सुविधाओं को तरस रहा गंधारी गांव

Published by : Sweta Vaidya Updated At : 28 May 2026 10:56 AM

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Gumla News: गुमला जिले के पालकोट प्रखंड स्थित गंधारी गांव आजादी के दशकों बाद भी विकास की मुख्यधारा से दूर है. बीमारों को खटिया पर लादकर अस्पताल पहुंचाना पड़ता है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें. 

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Gumla News: झारखंड के गुमला जिला अंतर्गत पालकोट प्रखंड की कुलूकेरा पंचायत के गंधारी गांव आजादी के 77 वर्ष गुजर जाने के बावजूद आज भी विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर है. कभी अति उग्रवाद प्रभावित रहे इस गांव में रौतिया जाति के करीब तीस परिवारों के लोग रहते हैं, जो आज के आधुनिक युग में भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं. 

गांव में सड़क नहीं, पेयजल की भी समस्या 

गांव की सबसे बड़ी समस्या आवागमन के लिए सड़क का नहीं होना है. जिसके कारण ग्रामीणों को रोजमर्रा के कार्यों और आपातकालीन स्थिति में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. इसके अलावा गांव में पेयजल की भी घोर किल्लत है. यहां पीने के पानी के लिए एक भी नलकूप या कुआं नहीं है, जिसके कारण ग्रामीण आज भी डोभा और झरना का असुरक्षित पानी पीने को मजबूर हैं. इस गांव में आज तक बिजली की एक किरण भी नहीं पहुंच सकी है. ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने अपनी इन मूलभूत समस्याओं को लेकर जिला के उपायुक्त से लेकर अपने क्षेत्र के विधायक तक को कई बार लिखित आवेदन और नोटिस दिया. लेकिन शासन-प्रशासन के स्तर से आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई. अंततः प्रशासनिक उदासीनता से तंग आकर गांव के लोगों ने आपस में घर-घर से चंदा इकट्ठा किया और सामूहिक रूप से श्रमदान कर आवागमन के लिये खुद ही एक सुविधाजनक पथ का निर्माण शुरू कर दिया है.

गांव के लोगों ने कही ये बात 

गांव की बदहाली पर नाराजगी जताते हुए पुष्पा देवी ने कहा कि गांव में सिर्फ पांचवीं तक स्कूल है. आगे की पढ़ायी के लिये बच्चों को पांच किमी दूर जाना पड़ता है. जिसके लिये रास्ता तक नहीं है. हमलोग खुद कच्ची सड़क बनाये हैं. विधायक व जिला प्रशासन गांव की समस्याओं को दूर करे.

पेयजल संकट और प्रशासनिक उदासीनता पर विनीता देवी ने कहा कि मैं खुद गांव की समस्याओं को लेकर डीसी गुमला के पास गयी थी. लेकिन आजतक सड़क, बिजली और पानी का कोई निराकरण नहीं हो सका है. गुमला डीसी से अनुरोध है. एक बार गांव का दौरा कर लें.

गांव की कुंती देवी ने भी गां की दर्द बयां करते हुए कहा कि इन समस्याओं के अभाव में हम और हमारे बच्चे जीने को विवश हैं. हमारा सुध कोई नहीं ले रहा है. उन्होंने पानी, बिजली व सड़क की समस्या से निजात दिलाने की मांग की है. ताकि गांव के लोग खुशहाल रह सके.

गांव के युवक देवेंद्र सिंह ने बताया कि बड़े बड़े नेता सिर्फ वादा करके चले गए. जब कोई बीमार पड़ता है तो खटिया पर लादकर उसे अस्पताल ले जाना पड़ता है. नेता सिर्फ वादा करते हैं. काम नहीं करते हैं. पानी पीने के लिये हम आज भी डोभा और झरना का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं.

गांव के मोहन सिंह ने कहा कि पूर्व जिला परिषद सदस्य को बुलाकर गांव की मूलभूत आवश्यकताओं से अवगत कराया जाएगा. साथ ही आवेदन सौंपकर इन समस्याओं के निदान की गुहार लगाई जाएगी. अगर समस्या दूर नहीं हुई तो आने वाले समय में वोट बहिष्कार किया जाएगा.

ग्रामीण कलुवा सिंह ने कहा कि मैंने शिक्षा मंत्री से मिलकर स्कूल तो खुलवा दिया. लेकिन पानी सड़क के लिये डीसी को दो बार ज्ञापन देने पर भी सड़क, बिजली, पानी जैसी समस्याओं का निदान नहीं हो सका है. अगर हमारी समस्यायें दूर नहीं हुई तो गांव में किसी भी अधिकारी को घुसने नहीं दिया जाएगा.

पूर्व जिला परिषद सदस्य प्रदीप सोरेंग ने कहा है कि मैं इस गांव के विकास और पानी की समस्या के लिए राज्य के पेयजल मंत्री तक से लड़ चुका हूं. मेरी मांग है कि डीसी और बीडीओ खुद एक बार गंधारी गांव का दौरा करें और इस पिछड़े गांव की दशा व दिशा बदलने के लिये तुरंत ठोस पहल करें.

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लेखक के बारे में

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श्वेता वैद्य प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में एक साल से अधिक का अनुभव है. पिछले करीब दो महीनों से वे झारखंड बीट पर सक्रिय रूप से काम कर रही हैं. इस दौरान वे राज्य से जुड़ी ताजा खबरों, लोगों से जुड़े मुद्दे और जरूरी जानकारियों पर आधारित स्टोरीज तैयार कर रही हैं. इससे पहले उन्होंने लाइफस्टाइल बीट के लिए भी कंटेंट लिखा. इस बीट में उन्होंने रेसिपी, फैशन, ब्यूटी टिप्स, होम डेकोर, किचन टिप्स, गार्डनिंग टिप्स और लेटेस्ट मेहंदी डिजाइन्स जैसे रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर रोचक और उपयोगी आर्टिकल लिखे. श्वेता की हर बार कोशिश यही रहती है कि बात आसान, साफ और सीधे तरीके से लोगों तक पहुंचे, जिससे कि हर कोई उसे बिना दिक्कत के समझ सके. कंटेंट राइटर के तौर पर उनका फोकस होता है कि कंटेंट सिंपल, रिलेटेबल और यूजर-फ्रेंडली हो.

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