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इंसानियत की मिसाल: चाईबासा की वृद्ध महिला भटक रही थी गुमला के रायडीह जंगल में, पुलिस ने की मदद

Updated at : 15 Apr 2020 8:15 PM (IST)
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इंसानियत की मिसाल: चाईबासा की वृद्ध महिला भटक रही थी गुमला के रायडीह जंगल में, पुलिस ने की मदद

गुमला के जंगलों में भटक रही वृद्ध महिला को पुलिस ने की मदद

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दुर्जय पासवान

गुमला : चाइबासा जिले की डिलियामर्चा गांव निवासी 55 वर्षीय वृद्ध महिला पार्वती पिंगुवा एक माह से रायडीह प्रखंड के जंगलों में भटक रही थी. ग्रामीणों ने विक्षिप्त व कोरोना संक्रमित समझकर उसे स्कूल में बंद कर दिया था. चूंकि महिला स्थानीय भाषा न तो बोल पा रही थी और न ही समझ पा रही थी इस कारण लोग उसे विक्षिप्त समझ लिए.

जब इसकी जानकारी सुरसांग पुलिस के माध्यम से प्रशिक्षु एसआई एसआइ अरूण कुमार मुंडारी, एसआइ छोटू उरांव व अनिल लिंडा को मिली तो इन लोगों ने महिला से हो भाषा में बात की. तब पता चला कि वह चाईबासा की रहने वाली है इसके बाद उसका कोरोना जांच कराया गया. कोरोना जांच निगेटिव पाए जाने के बाद गुमला एसपी हृदीप पी जनार्दन के निर्देश पर गुमला पुलिस उक्त महिला को लेकर चाईबासा पहुंची और महिला को उसके परिजनों से मिलाया.

परिजनों ने गुमला पुलिस के इस कार्य की प्रशंसा की. साथ ही आभार प्रकट किया. जानकारी के अनुसार महिला भटकते हुए रायडीह पहुंच गयी थी. वह सुरसांग क्षेत्र के जंगल में भटक रही थी. जब ग्रामीणों की उस पर नजर पड़ी तो उसे स्कूल में रख दिया. कोरोना का डर था इसलिए ताला बंद कर उसकी निगरानी भी करने लगे. सुरसांग थाना के प्रशिक्षु एसआइ के सोशल मीडिया ग्रुप पर प्रशिक्षु एसआइ छोटू उरांव व अनिल लिंडा ने वृद्ध महिला का फोटो वायरल किए. गुमला अहतू थाना के प्रशिक्षु एसआइ अरूण कुमार मुंडारी ने सुरसांग थानेदार विक्रम राम से संपर्क कर उक्त महिला से हो भाषा में बात की तो महिला ने घर से भटकने की जानकारी दी.

जिसका सत्यापन कर 24 घंटे के अंदर मंगलवार को चाईबासा जिले के डिलियामर्चा गांव पहुंचाकर उसके भतीजा मनोज लुंगरी के परिजनों को जिम्मे सौंप दिया. भतीजा मनोज लुंगरी भी जिला पुलिस बल में जवान है. वह खरसावां में पोस्टेड है. वहीं महिला का बेटा मजदूरी करने बैंगलुरु गया था लेकिन लॉक डाउन के कारण वह वहां फंस गया है. यहां बताते चलें कि पार्वती पिंगुवा महिला डिलियामर्चा गांव में एक माह पूर्व महुआ व पत्ता चुनने के लिए निकली थी. जिसके बाद वह लापता हो गयी थी. इस संबंध में प्रशिक्षु एसआइ अरूण कुमार मुंडारी ने बताया कि मुझे हो भाषा की जानकारी थी.

इस निमित मैंने उससे हो भाषा में बात की. वह सादरी, नागपुरी व हिंदी भाषा नहीं जानती थी. जिसके बाद सुरसांग के ग्रामीणों द्वारा उसे पागल समझ कर स्कूल भवन में बंद कर दिया गया. इसकी सूचना सुरसांग मुखिया को दी गयी. मुखिया द्वारा इसकी सूचना सुरसांग थानेदार विक्रम राम को दी गयी. थानेदार ने उसे थाना लाया. गुमला एसपी हृदीप पी जनार्दन से मार्गदर्शन लेकर उसे उसके घर तक पहुंचाया. उक्त महिला को उसके घर पहुंचाने से पूर्व मैंने उक्त महिला को सदर अस्पताल ले जाकर कोरोना वायरस की जांच भी कराया था लेकिन महिला का जांच निगेटिव आया था.

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Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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