कोरोना का खौफ : प्रवासी परिवारों के पानी लेने तक पर रोक

Updated at : 19 Jun 2020 2:01 AM (IST)
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कोरोना का खौफ : प्रवासी परिवारों के पानी लेने तक पर रोक

पालकोट प्रखंड के खूंटीटोली गांव की नवाटोली के लोगों ने कोरोना के भय से बिहार से लौटे पांच परिवारों का बहिष्कार कर दिया है. गांववालों ने फरमान जारी किया है कि गांव का कोई भी व्यक्ति इन पांचों परिवारों से बात नहीं करेगा

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दुर्जय पासवान, महीपाल, गुमला : पालकोट प्रखंड के खूंटीटोली गांव की नवाटोली के लोगों ने कोरोना के भय से बिहार से लौटे पांच परिवारों का बहिष्कार कर दिया है. गांववालों ने फरमान जारी किया है कि गांव का कोई भी व्यक्ति इन पांचों परिवारों से बात नहीं करेगा. गांव के एकमात्र कुएं से इन्हें पानी भी भरने नहीं दिया जा रहा है. वहीं, ग्रामीणों के आने-जानेवाले रास्ते पर भी चलने से इन्हें मना कर दिया गया है. ग्रामीणों के इस फरमान के बाद पांचों परिवार के 15 सदस्य नवप्राथमिक विद्यालय खूंटीटोली में शरण लिये हुए हैं. इनमें सात बच्चे भी हैं. 10 दिनों से चल रहे इस पूरे प्रकरण की पुष्टि नाथपुर पंचायत की मुखिया रीता देवी भी कर रही हैं.

जानकारी के अनुसार, इस गांव में रहनेवाले पांच परिवार पटना में ईंट भट्ठा में मजदूरी करते हैं. लॉकडाउन में ये सभी लोग 10 दिन पहले पालकोट पहुंचे. जिला प्रशासन ने इन सभी लोगों को होम कोरेंटिन में रहने के लिए कहा है, लेकिन जब ये लोग गांव पहुंचे, तो ग्रामीणों ने इन्हें गांव में घुसने से रोक दिया. साथ ही कई तरह की पाबंदियां भी लगा दीं.

पालकोट प्रखंड के खूंटीटोली नवाटोली गांव का मामला

  • पटना से लौटे हैं पांच परिवारों के 15 सदस्य, इनमें सात बच्चे भी हैं

  • बहिष्कार के बाद जर्जर स्कूल में शरण लिये हुए हैं प्रवासी मजदूर

  • बरसात में सांप-बिच्छू का डर, मच्छरों ने जीना मुश्किल कर रखा है

  • जंगल से ला रहे डोभा का दूषित पानी, डायरिया होने का भी खतरा

प्रशासन ने मदद नहीं की, तो भूखे मर जायेंगे : जिस स्कूल में प्रवासी मजदूरों के परिवार ने शरण ले रखी है, वह बेहद जर्जर अवस्था में है. चूंकि बारिश का मौसम है, इसलिए इन्हें यहां रहने में दिक्कत हो रही है. सांप, बिच्छू घुसने का डर है. मच्छर काटते हैं, सो अलग. गांव के कुएं से पानी नहीं ले सकते, इसलिए दो किमी चल कर ये लोग जंगल में बने एक छोटे से डोभा से पानी लाते हैं, जिसमें बारिश का पानी जमा होता है.

इसी से भोजन बनाते हैं. इन प्रवासी मजदूरों में शामिल वंदना खड़िया, सुलेश्वर सिंह, लेदरा उरांवने बताया : हमलोग यहां कष्ट में जी रहे हैं. हमारे पास अनाज भी खत्म हो रहा है. अगर प्रशासन ने मदद नहीं की, तो हम कोरोना से बाद में मरेंगे, पहले भूख से मर जायेंगे.

posted by : pritish sahay

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