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बिरसा मुंडा जयंती पर PM मोदी बोले- जनजातीय परंपरा व शाैर्य गाथा को मिलेगी पहचान,CM हेमंत ने बताया ऐतिहासिक दिन

Updated at : 15 Nov 2021 4:57 PM (IST)
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बिरसा मुंडा जयंती पर PM मोदी बोले- जनजातीय परंपरा व शाैर्य गाथा को मिलेगी पहचान,CM हेमंत ने बताया ऐतिहासिक दिन

भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के मौके पर पीएम मोदी ने रांची स्थित भगवान बिरसा मुंडा स्मृति उद्यान सह स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय का ऑनलाइन उद्घाटन किया. इस मौके पर पीएम मोदी ने जनजातीय परंपरा व शाैर्य गाथा को अब और भव्य पहचान देने की बात कही. वहीं, सीएम हेमंत सोरेन ने आज का दिन ऐतिहासिक बताया.

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Birsa Munda Jayanti 2021 (रांची) : 15 नवंबर यानी धरती आबा बिरसा मुंडा की जयंती. इस मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी ने रांची के पुराने जेल परिसर स्थित बिरसा मुंडा स्मृति उद्यान सह संग्रहालय का ऑनलाइन उद्घाटन किया. साथ ही झारखंड स्थापना दिवस को लेकर राज्यवासियों को शुभकामनाएं भी दीं. उन्होंने कहा कि अपनी विशिष्ट संस्कृति के साथ ऐतिहासिक पहचान रखने वाली भगवान बिरसा मुंडा की यह धरती विकास यात्रा में आगे बढ़े, यही कामना है.

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कार्यक्रम को ऑनलाइन संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आजादी के इस अमृतकाल में देश ने तय किया है कि भारत की जनजातीय परंपराओं और इसकी शौर्य गाथाओं को अब और भी भव्य पहचान मिलेगा. साथ ही कहा कि सरकार ने ऐतिहासिक फैसला लिया है कि आज से हर वर्ष देश 15 नवंबर यानी भगवान बिरसा मुंडा के जन्म दिवस को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनायेगा.

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कार्यक्रम को ऑनलाइन संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आजादी के इस अमृतकाल में देश ने तय किया है कि भारत की जनजातीय परंपराओं और इसकी शौर्य गाथाओं को अब और भी भव्य पहचान मिलेगा. साथ ही कहा कि सरकार ने ऐतिहासिक फैसला लिया है कि आज से हर वर्ष देश 15 नवंबर यानी भगवान बिरसा मुंडा के जन्म दिवस को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनायेगा.

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पीएम मोदी ने देश के जनजातीय समाज व देश के हर नागरिक को भगवान बिरसा मुंडा स्मारक उद्यान सह स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय के लिए बधाई दी. उन्होंने कहा कि ये संग्रहालय, स्वाधीनता संग्राम में जनजातीय नायक-नायिकाओं के योगदान का, विविधताओं से भरी हमारी जनजातीय संस्कृति को जानने का साधन बनेगा.

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उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम का उद्देश्य भारत की सत्ता, भारत के लिए निर्णय लेने की अधिकार- शक्ति भारतीयों के हाथों में स्थानांतरित करना है. इसके अलावा धरती आबा की लड़ाई भी उस सोच के खिलाफ थी जो भारत के जनजातीय समाज की पहचान मिटाना चाहती थी. साथ ही कहा कि भगवान बिरसा ने समाज, संस्कृति और देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है. इसलिए वो आज भी हमारी आस्था में, हमारी भावना में हमारे भगवान के रूप में उपस्थित हैं.

प्रधानमंत्री ने कहा कि धरती आबा बहुत लंबे समय तक इस धरती पर नहीं रहे, लेकिन उन्होंने जीवन के इस छोटे से कालखंड में देश के लिए एक पूरा इतिहास लिखा और भारत की आनेवाली पीढ़ियों को दिशा दी। उक्त बातें प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज रांची स्थित भगवान बिरसा मुंडा स्मृति उद्यान सह स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय का ऑनलाइन उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने

आज का दिन ऐतिहासिक : CM

इस अवसर पर सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि आज का दिन निश्चित रूप से ऐतिहासिक है. 15 नवंबर यानी आज के ही दिन धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की जयंती मनाते आ रहे हैं. आज का दिन इसलिए भी महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक है क्योंकि आज राजधानी रांची के पुराने जेल परिसर में भगवान बिरसा मुंडा स्मृति उद्यान सह स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय का उद्घाटन हुआ है. इस परिसर को राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार के प्रयास से एक नया रूप मिला है.

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सीएम श्री सोरेन ने कहा कि सरकार ने इस परिसर को एक ऐतिहासिक चिह्न बनाते हुए राज्य के कई आंदोलनकारी स्वतंत्रता सेनानियों और समाज के अगुआ लोगों का एक संग्रहण तैयार किया है, जिसके माध्यम से आने वाली पीढ़ी को बीते वक्त के इतिहास से अवगत कराया जा सकेगा.

देश में झारखंड राज्य का अलग इतिहास और पहचान

सीएम श्री सोरेन ने कहा कि देश में कई राज्य हैं. इन राज्यों में झारखंड एक छोटा सा राज्य है, लेकिन इस राज्य का एक अलग इतिहास और स्थान है. देश की आजादी का सपना देखने से पहले यहां के लोग जल, जंगल और जमीन की लड़ाई लड़े. झारखंड के वीर सपूतों ने अपने देश और राज्य की अस्मिता की लड़ाई से कभी डरे नहीं. सदैव उनका संघर्ष जारी रहा. झारखंड वीर भूमि के रूप में जाना जाता है. इस राज्य के संताल परगना, कोल्हान, उत्तरी छोटानागपुर, दक्षिणी छोटानागपुर तथा पलामू प्रमंडलों के कोने-कोने में वीर सपूतों ने जन्म लिया. जहां से इन महापुरुषों ने अपने और अपनी पीढ़ी को सुरक्षित करने तथा प्रकृति को संरक्षित करने की लड़ाइयां लड़ी.

आदिवासी वर्ग ने हमेशा सभी को एक समान और एक रूप में देखने का काम किया

उन्होंने कहा कि आज भौतिकवादी युग में हम चांद पर पहुंच चुके हैं और उससे भी आगे जाने की तैयारी में हैं, लेकिन यह भी आवश्यक है कि भौतिकवादी युग के साथ-साथ हम अपने अतीत का इतिहास को जाने और समझे. हम अपनी भाषा- संस्कृति को सहेज कर रखें. कहा कि झारखंड एक आदिवासी बहुल राज्य है. यहां का आदिवासी समुदाय किसी के साथ कोई भेदभाव, ऊंच-नीच, गुरुर या द्वेष भाव कभी नहीं रखा है. हमारे आदिवासी वर्ग के लोगों ने सभी को एक समान और एक रूप में देखने का काम किया है.

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सीएम श्री सोरेन ने कहा कि आज हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम इन वीर सपूतों के दिखाये रास्ते को अपना कर राज्य के सर्वांगीण विकास में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें. कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार के समन्वय और सहयोग से बने रांची स्थित भगवान बिरसा मुंडा स्मृति उद्यान सह स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगा. हम सभी का यह प्रयास होना चाहिए कि हमारे राज्य में और भी ऐसे वीर सपूत हैं, जिनकी संघर्षमय जीवनी को आनेवाले समय में इस संग्रहालय में जोड़ें, ताकि आनेवाली पीढ़ियों को हमारे वीर सपूतों के जीवनकाल की जानकारी से प्रेरणा मिले.

जानें भगवान बिरसा मुंडा स्मृति उद्यान सह संग्रहालय की खासियत

राज्य और केंद्र सरकार के सहयोग से रांची में स्थित पुराने जेल परिसर का संरक्षण एवं जीर्णोद्धार करते हुए इस परिसर को विकसित किया गया है. इस पर कुल 142.31 करोड़ राशि खर्च किये गये हैं. जिसमें 117.31 करोड़ रुपये झारखंड सरकार की ओर से एवं 25 करोड़ रुपये जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से प्रदान की गयी है. करीब 30 एकड़ क्षेत्र में इस उद्यान सह संग्रहालय का संरक्षण व जीर्णोद्धार हुआ है. इसमें करीब 25 एकड़ क्षेत्र में भगवान बिरसा मुंडा स्मृति उद्यान का विकास एवं निर्माण किया गया है, वहीं शेष करीब 5 एकड़ में अवस्थित भगवान बिरसा मुंडा जेल का संरक्षण एवं जीर्णोद्धार कार्य करते हुए इसे संग्रहालय के रूप में विकसित किया गया है.

आकर्षक और आधुनिक सुविधाओं का है संगम

भगवान बिरसा मुंडा स्मृति उद्यान सह संग्रहालय के अंतर्गत परिसर में विशेष आकर्षक साज-सज्जा, बागवानी, म्यूजिकल फाउंटेन, फूड कोर्ट, चिल्ड्रन पार्क, इंफिनिटी पुल, पार्किंग तथा अन्य सामुदायिक सुविधाओं का निर्माण किया गया है.

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भगवान बिरसा मुंडा उद्यान सह संग्रहालय का सबसे बड़ा आकर्षण का केंद्र यह संग्रहालय है, जो जहां एक ओर भगवान बिरसा मुंडा एवं झारखंड के अन्य वीर शहीदों की जीवनी एवं देश की आजादी के लिए उनके द्वारा किये गये संघर्ष की कहानी से राज्य, देश एवं विदेश के लोगों को अवगत करायेगा, वहीं यह राज्य के पर्यटन उद्योग को एक नयी दिशा देते हुए पर्यटन के विकास में मील का पत्थर साबित होगा.

भगवान बिरसा मुंडा की 25 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा

जेल परिसर के बाहर भगवान बिरसा मुंडा की 25 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा स्थापित की गयी है. इस पूरे परिसर में लेजर और लाइट शो, चित्रपट एवं म्यूजिकल फाउंटेन के माध्यम से जनजातीय क्रांति एवं झारखंड के वीर स्वतंत्रता सेनानियों के जीवनी एवं संघर्षों को प्रदर्शित किया जायेगा.

इन जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों की भी प्रतिमा स्थापित

मुख्य भवन के आगे प्रांगण में जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों की 9 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की गयी है. इसमें गंगा नारायण सिंह, पोटो हो, भागीरथी मांझी, वीर बुधु भगत, तेलंगा खड़िया, सिदो-कान्हू, नीलाम्बर-पीताम्बर, दिवा-किसुन, गया मुंडा एवं टाना भगत. प्रत्येक प्रतिमा के पीछे उनकी संघर्षपूर्ण जीवन को म्यूरल्स द्वारा प्रस्तुत किया गया है.

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म्यूजिकल फाउंटेन और वाटर स्क्रीन शो के द्वारा झारखंड के प्रमुख धार्मिक स्थलों यथा बाबाधाम मंदिर देवघर, चतरा का भद्रकाली इटखोरी मंदिर, रामगढ़ स्थित मां छिन्नमस्तिके मंदिर और गिरिडीह स्थित सम्मेद शिखर पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया जायेगा. इसका मुख्य उद्देश्य लोगों में झारखंड की लोक आस्था, धार्मिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक स्थलों के संदर्भ में जागरूकता का संचार पैदा करना है, जिससे लोग झारखंड की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहरों एवं कला को संरक्षित और संवर्धित करने के लिए प्रेरित होंगे.

रांची स्थित कार्यक्रम स्थल पर राज्यपाल रमेश बैस, केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा, केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जी किशन रेड्डी, झारखंड के कल्याण मंत्री चंपई सोरेन के अलावा रांची सांसद संजय सेठ, राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश, समीर उरांव, रांची विधायक सीपी सिंह, रांची मेयर आशा लकड़ा, मुख्य सचिव सुखदेव सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजीव अरुण एक्का, प्रधान सचिव वंदना डाडेल, मुख्यमंत्री के सचिव विनय कुमार चौबे, सचिव केके सोन, राज्य सरकार के अन्य वरीय पदाधिकारीगण सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे.

Posted By : Samir Ranjan.

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