1977 सर्वे जमीन को खारिज करने की मांग, निकाला जुलूस

Updated at : 14 May 2025 10:36 PM (IST)
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1977 सर्वे जमीन को खारिज करने की मांग, निकाला जुलूस

1977 सर्वे जमीन को खारिज करने की मांग, निकाला जुलूस

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डुमरी. आदिवासी अधिकार मंच जिला कमेटी गुमला ने हाल सर्वे नया खतियान 1976 व 1977 सर्वे जमीन को तत्काल खारिज व 1932 खतियान आधारित जमीन ऑन लाइन को शीघ्र लागू करने व किसानों की जनमुद्दों को लेकर बुधवार को किसानों की विशाल रैली प्रदर्शन व जनसभा डुमरी में हुई. रैली डुमरी बाजारटांड़ से शुरू होकर नवाडीह चौक से होते हुए मुख्यालय परिसर होते हुए सागवान बगीचा पहुंच कर सभा में तब्दील हो गयी. रैली में डुमरी व जारी प्रखंड के हजारों लोग शामिल हुए. रैली के दौरान आवाज दो हम एक हैं. दुनिया के किसान मजदूर एक हो. नया खतियान हाल सर्वे जमीन ऑनलाइन तत्काल खारिज करो. 1932 खतियान आधारित जमीन ऑनलाइन शीघ्र लागू करो. बीडीओ व सीओ होश में आओ. डुमरी थाना प्रभारी होश में आओ. तख्त बदल दो ताज बदल दो बेईमानों का राज बदल दो. आदिवासी अधिकार मंच जिंदाबाद समेत अन्य नारों के साथ हाथों में तख्ती लिए लोग जुलूस में चल रहे थे. मुख्य अतिथि पूर्व सांसद व पूर्व मंत्री जितेंद्र चौधरी, विशिष्ट अतिथि पूर्व सांसद संयोजक, आदिवासी अधिकार राष्ट्रीय मंच के पुलिन बिहार बास्के और अध्यक्ष आदिवासी अधिकार मंच झारखंड के प्रफुल्ल लिंडा उपस्थित थे. पूर्व सांसद व पूर्व मंत्री जितेंद्र चौधरी ने कहा कि 19 साल बीतने के बाद भी अभी तक हिंदुस्तान का बड़े-बड़े राज्य में साथ झारखंड प्रदेश में भी ऐसा आदिवासी परिवार है, जो सदियों से निवास कर रहे हैं. लेकिन उनको वन अधिकार नहीं मिला. जब अधिकारियों के पास जाते हैं, तो फॉरेस्ट के अधिकारी इसको हटा देते हैं. गुजरात में एक करोड़ से भी ज्यादा पहाड़ों में बसने वाले आदिवासी रहते हैं. 10 फीसदी आदिवासियों को वन कानून में जमीन नहीं दी गयी. लेकिन मैं गर्व से बोल सकता हूं कि हिंदुस्तान में भी एक त्रिपुरा प्रदेश है, जहां 100 प्रतिशत आदिवासियों को जमीन दी है. आज यह ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन व जमीन का रजिस्ट्रेशन के नाम पर आदिवासियों के जमीन जो हेमंत सरकार हड़पने का काम कर रही है. झारखंड में आदिवासियों का शिकार किया जा रहा है. आदिवासी अधिकार मंच व भारत के कम्युनिस्ट मार्क्सवादी पार्टी हम पूरे हिंदुस्तान में यह लड़ाई जारी रखेंगे. हम सभी को लाल झंडा लेकर झारखंड में भी लड़ाई जारी रखनी है. कार्यक्रम के बाद डुमरी बीडीओ के नाम से प्रखंड बड़ा बाबू को राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा गया. मौके पर प्रफुल लिंडा, सुखनाथ लोहरा, डॉ कृति सिंह मुंडा, बिना लिंडा, मिला कुजूर, सीमा केरकेट्टा, सुरेंद्र उरांव, मोहन उरांव, शंकर उरांव, विल्सन मिंज, दीपिका बाड़ा, फ्रैंकलिन तिर्की, आलोइस मिंज मौजूद थे.

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