गुमला. डुमरी-चैनपुर के टाटी नवगई के समीप नदी में बने हाई लेबल पुल ध्वस्त होने का मामला दिशा की बैठक में छाया रहा. दिशा सदस्य रमेश कुमार ने प्रभात खबर में छपी खबर का मुद्दा उठाते हुए पुल निर्माण करने वाली अल्टीमा कंपनी पर कार्रवाई करने की मांग की. साथ ही दोबारा पुल बनाने की मांग की गयी. इस पर बैठक में डीसी प्रेरणा दीक्षित ने कहा कि मामले को गहराई से देखा जा रहा है. फिलहाल में अल्टीमा कंपनी को उसी लागत पर दोबारा पुल बनाने का निर्देश दिया गया है. विभाग के अनुसार उक्त पुल सात करोड़, 50 लाख रुपये की लागत से एक साल पहले बना था. पुल ध्वस्त होने के बाद उसी लागत पर कंपनी को पुल बनाने के लिए कहा गया है. पुल ध्वस्त होने के बाद स्लैप का कुछ हिस्सा लटका हुआ है, जिसे जेसीबी मशीन से तोड़ा जा रहा है, ताकि पुल को नये सिरे से बनाया जा सके. बता दे कि यह पुल बरसात में ही क्षतिग्रस्त हो गया था. उसी समय खबर छाप कर प्रशासन का ध्यान पुल की ओर आकृष्ट कराया गया था. परंतु प्रशासन व विभाग ने उस पर ध्यान नहीं दिया, जिसका नतीजा है कि जैसे ही पुल पर आवागमन शुरू हुआ. 15 दिन पहले गाड़ियों का भार पड़ते पुल ध्वस्त हो गया है. कार्यपालक अभियंता महादेव उरांव ने कहा है कि कंपनी को जल्द पुल बनाने का निर्देश दिया गया है.
एइ व जेइ की भूमिका पर भी उठे सवाल
पुल का निर्माण घटिया हुआ है. इसकी जानकारी पहले से थी. परंतु सहायक अभियंता व कनीय अभियंता ने इस पर ध्यान नहीं दिया. घटिया पुल का निर्माण कंपनी करती रही. परंतु इसे रोकने का प्रयास नहीं किया गया. जब कार्यपालक अभियंता को इसकी जानकारी हुई, तो उन्होंने पुल निर्माण पर सवाल खड़ा किया था. परंतु तब तक देर हो चुकी थी. पुल पूरा बन गया था. पुल पूरा बनने के बाद इसकी जांच की गयी, तो कमजोर पुल बनने का मामला उजागर हुआ था. इसके बाद भी उक्त पुल पर वाहनों का आवागमन शुरू करा दिया गया. इसका नतीजा पुल ध्वस्त हो गया. खैरियत रही कि पुल ध्वस्त होने के समय कोई वाहन नदी में नहीं समाया.
अल्टीमा कंपनी के सभी कार्यों की जांच हो
पूर्व सांसद प्रतिनिधि भोला चौधरी ने कहा है कि अल्टीमा कंपनी शुरू से विवादित काम करता रही है. उसके हर काम में भ्रष्टाचार हुआ है. कंपनी खुद पैसा कमाने के चक्कर में हर काम को जैसे-तैसे कराया है. इस कारण चैनपुर व डुमरी क्षेत्र में कंपनी द्वारा कराया गया हर काम भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता रहा है. प्रशासन से मांग करूंगा कि अल्टीमा कंपनी के सभी कार्यों की जांच हो. क्योंकि आरइओ विभाग से कंपनी ने कई सड़कों का काम कराया है. परंतु कोई भी सड़क पांच से छह महीना नहीं चली और टूट गयी है. यहां तक की साढ़े सात करोड़ रुपये का पुल भी अल्टीमा कंपनी ने घटिया बनाया, जिससे पुल ध्वस्त हो गया.
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