मुखिया ने घूस की राशि वापस की डीसी ने दिया जांच का आदेश
Updated at : 05 Jun 2019 5:06 AM (IST)
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गुमला : बिना घूस मुखिया काम नहीं करते, एक घर में चाहिए 20 हजार घूस… खबर को प्रभात खबर में प्रमुखता से प्रकाशित किये जाने के बाद गुमला उपायुक्त शशि रंजन ने मामले को गंभीरता से लिया है. मंगलवार को जनता दरबार में पहुंची पीड़िता कुलाबीरा पंचायत अंतर्गत पतिया गांव निवासी पुनी देवी को जहां […]
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गुमला : बिना घूस मुखिया काम नहीं करते, एक घर में चाहिए 20 हजार घूस… खबर को प्रभात खबर में प्रमुखता से प्रकाशित किये जाने के बाद गुमला उपायुक्त शशि रंजन ने मामले को गंभीरता से लिया है. मंगलवार को जनता दरबार में पहुंची पीड़िता कुलाबीरा पंचायत अंतर्गत पतिया गांव निवासी पुनी देवी को जहां उसका 20 हजार रुपये मुखिया व उसके पति अशोक कुमार महली से वापस कराया, वहीं उपविकास आयुक्त हरिकुमार केसरी को पूरे प्रकरण की जांच कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है.
मंगलवार को खबर प्रकाशित होने के बाद पुनी न्याय की आस लेकर उपायुक्त के जनता दरबार में पहुंची थी, जहां पुनी ने उपायुक्त के समक्ष अपना दु:खड़ा रखा और न्याय की गुहार लगायी. पीड़िता ने बताया कि वह बाबा साहब भीमराव आंबेडकर आवास योजना की लाभुक है.
उसे आवास निर्माण के लिए बैंक खाता के माध्यम से 40 हजार रुपये मिला, जिसमें से उसने 25 हजार रुपये निकासी की. पीड़िता ने बताया कि 25 हजार रुपये में से मुखिया के पति अशोक कुमार महली निर्माण सामग्री गिराने के नाम पर 20 हजार रुपये ले लिया, परंतु अशोक ने अब तक निर्माण सामग्री नहीं दी है. पीड़िता ने बताया कि अशोक को निर्माण सामग्री गिराने की बात कहने पर अशोक टालमटोल कर रहा है. पीड़िता ने बताया कि वह पूर्व में भी जनता दरबार में अपनी शिकायत रख चुकी है.
मामले को उपायुक्त ने गंभीरता से लिया और पंचायत की मुखिया असमिता देवी व अशोक कुमार महली को बुलावा भेजा. मुखिया व अशोक के आने के बाद उपायुक्त ने उन लोगों से पुनी को 20 हजार रुपये वापस दिलाया और मुखिया से ऐसे आपत्तिजनक कार्य करने के लिए जवाबदेही मांगा.वहीं मामले लेकर उपायुक्त ने उपविकास आयुक्त को जांच करने का निर्देश दिया.
कार्रवाई होगी, तभी डरेंगे : गुमला में कई ऐसे मुखिया हैं, जो सीधे भ्रष्टाचार में लिप्त हैं. यहां तक कि जाति, आय, आवासीय प्रमाण-पत्र में पहचानी के लिए हस्ताक्षर करने के एवज में भी मुखिया पैसा लेते हैं. विकास योजनाओं में तो लूट चरम पर है. इसलिए जरूरी है कि गलत करने वाले मुखिया पर कार्रवाई हो, तभी उनमें काम के प्रति ईमानदारी आयेगी.
अगर ऐसे मुखिया को जांच के नाम पर छोड़ते रहेंगे, तो मुखियाओं का हौसला बढ़ता जायेगा और वे घूस लेने से बाज नहीं आयेंगे. हालाकि कुलाबिरा पंचायत के मामले में जांच में घूस की पुष्टि हो चुकी है. इसी का परिणाम है कि मुखिया ने पैसा वापस किया. दूसरे मुखिया कोई गलती न करे, इसलिए घूस लेने वालों पर कार्रवाई करनी चाहिए, तभी व्यवस्था में सुधार होगा, नहीं तो सिस्टम पर सवाल उठते रहेंगे.
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