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पोटका : नन बैंकिंग कंपनी का आॅफिस बंद, लोगों के करोड़ों रुपये फंसे

Updated at : 14 Mar 2019 9:28 AM (IST)
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पोटका : नन बैंकिंग कंपनी का आॅफिस बंद, लोगों के करोड़ों रुपये फंसे

पोटका : पोटका थाना अंतर्गत हाता में जुड़ी नन बैंकिंग कंपनी सरमदा ग्राम पंचायत औद्योगिक सहयोग समिति लिमिटेड का कार्यालय पिछले 10 माह से बंद है. इस बैंकिंग कंपनी में खाताधारकों के करोड़ों रुपये फंसे हैं. खाताधारक अपनी जमा राशि पाने के लिए कभी कार्यालय तो कभी कर्मियों के घर का चक्कर लगा रहे हैं. […]

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पोटका : पोटका थाना अंतर्गत हाता में जुड़ी नन बैंकिंग कंपनी सरमदा ग्राम पंचायत औद्योगिक सहयोग समिति लिमिटेड का कार्यालय पिछले 10 माह से बंद है. इस बैंकिंग कंपनी में खाताधारकों के करोड़ों रुपये फंसे हैं. खाताधारक अपनी जमा राशि पाने के लिए कभी कार्यालय तो कभी कर्मियों के घर का चक्कर लगा रहे हैं. हालांकि अभी तक किसी खाताधारकों ने थाने में कोई शिकायत दर्ज नहीं करायी है.
मई 2018 के बाद से बंद : जानकारी के अनुसार हाता में जुड़ी सरमदा ग्राम पंचायत औद्योगिक सहयोग समिति लिमिटेड के नाम से एक नन बैंकिंग कंपनी वर्ष 1996 से चल रही थी, जिसका निबंधन संख्या 5/1996 है. इसमें संपूर्ण बैंकिंग कारोबार होता था. इनके हजारों खाताधारक थे. इसमें दैनिक, मासिक के साथ-साथ बचत खाता भी संचालित होता था. ऋण भी दिये जाते थे. यह संस्थान मई 2018 तक ठीक-ठाक चला.
इसके बाद कार्यालय अचानक बंद हो गया. हाता स्थित कार्यालय में टांगराईन के घासीराम मंडल एवं नारदा के चंद्र शेखर मुर्मू कर्मचारी के तौर पर कार्यरत थे. दोनों कर्मचारी प्रतिदिन कार्यालय आते थे. लेकिन कार्यालय के अचानक बंद होने पर दोनों कर्मचारियों ने भी आना बंद कर दिया. इससे खाताधारकों के करोड़ों रुपये फंस गये. खाताधारक अपनी जमा राशि पाने के लिए प्रतिदिन कर्मचारियों के घरों का चक्कर लगा रहे हैं.
किसी ने बेटी की शादी, तो किसी ने बच्चों की पढ़ाई के लिए जमा किये थे पैसे : खाताधारकों ने बताया कि जमा राशि को निश्चित अवधि के बाद आठ प्रतिशत ब्याज सहित लौटायी जाती थी. इसलिए कई लोगों ने अपनी बेटी की शादी करने के लिए रुपये की जमा किये थे.
कई लोगों ने बच्चों की पढ़ाई की लिए राशि जमा की थी. लेकिन अब कंपनी के फरार हो जाने से सभी खाताधारक परेशान हैं. इधर, हाता-मुसाबनी सड़क किनारे संचालित कार्यालय के मकान मालिक के पुत्र मंडल ने कहा कि कंपनी ने सालभर से भाड़ा नहीं दिया है और कार्यालय खाली कर दिया है.
खाताधारक बोले :
बच्चों की पढ़ाई के लिए रुपये जमाकर रहे थे. वर्ष 2015 से प्रतिदिन 50 रुपये अप्रैल 2018 तक 33000 (तैंतीस हजार) रुपये जमा किये थे. आठ प्रतिशत ब्याज सहित कुल 40000 (चालीस हजार) रुपये भुगतान का वादा किया गया था, लेकिन संस्थान बंद होने से सारे रुपये फंस गये.
सुदर्शन गोप, होटल संचालक, हाता
कंपनी में एक छह सौ रुपये का मासिक खाता व एक दैनिक खाता खोले थे. करीब 60000 (साठ हजार) रुपये फंस गये. कर्मचारियों का भी पता नहीं चल पा रहा है. छोटा-मोटा व्यवसाय करते हैं. रुपये नहीं मिलने से काफी परेशानी हो रही है.
जीतेंद्र नाथ पाल, पावरू
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