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सबूत लाइये, तो प्रमाण-पत्र जल्द बन जायेगा, दो माह से शहीद के परिजनों को राशन भी नहीं मिला है.

Updated at : 27 Nov 2018 6:44 AM (IST)
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सबूत लाइये, तो प्रमाण-पत्र जल्द बन जायेगा, दो माह से शहीद के परिजनों को राशन भी नहीं मिला है.

दुर्जय पासवान, गुमला : श्रीलंका में 31 साल पहले शहीद हुए पालकोट प्रखंड के देवगांव बड़काटोली निवासी वीर सपूत फेदलिस एक्का (स्व) का नाम शहीदों की सूची में है. केंद्रीय रिजर्व पुलिस बटालियन रांची (सीआरपीएफ) के पास फेदलिस की पूरी जानकारी है. कब नौकरी शुरू की, कब शहीद हुए, सभी सबूत है. यहां तक कि […]

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दुर्जय पासवान, गुमला : श्रीलंका में 31 साल पहले शहीद हुए पालकोट प्रखंड के देवगांव बड़काटोली निवासी वीर सपूत फेदलिस एक्का (स्व) का नाम शहीदों की सूची में है. केंद्रीय रिजर्व पुलिस बटालियन रांची (सीआरपीएफ) के पास फेदलिस की पूरी जानकारी है. कब नौकरी शुरू की, कब शहीद हुए, सभी सबूत है.
यहां तक कि शहीद के पैतृक गांव में शहीद की प्रतिमा लगी है, जहां पूरी जानकारी खुद सीआरपीएफ ने अंकित की है. इसके बावजूद शहीद के परिजनों को गुमला के सरकारी बाबू मृत्यु प्रमाण-पत्र, घर में शौचालय व पक्का घर बनवाने के लिए सरकारी कार्यालयों का चक्कर कटवा रहे हैं.
हैरत वाली बात यह है कि शहीद का मृत्यु
प्रमाण-पत्र बनाने के लिए प्रशासन ने उसकी बेटी बसंती एक्का से सबूत मांगा है. प्रशासन ने कहा है कि पिता के शहीद होने का सबूत लाइये. इसके बाद तुरंत प्रमाण-पत्र बन जायेगा. ज्ञात हो कि प्रभात खबर में शहीद का मृत्यु प्रमाण-पत्र व परिजनों को सरकारी सुविधा नहीं मिलने की खबर छपने के बाद गुमला प्रशासन हरकत में आया. सोमवार को पालकोट बीडीओ ने शहीद की बेटी बसंती को अपने कार्यालय में बुलाया, जहां बीडीओ ने शहीद की पूरी जानकारी ली.
बीडीओ ने शहीद की बेटी से कहा कि आप अपने पिता की मौत का दस्तावेज प्रस्तुत करें, जिससे शहीद का मृत्यु प्रमाण-पत्र जल्द बना कर दे सकें. बीडीओ ने शहीद के घर व शौचालय है या नहीं, इसकी भी जानकारी ली. शहीद की बेटी बसंती ने कहा कि अभी भी कच्ची मिट्टी के घर में रह रहे हैं. शौचालय नहीं रहने के कारण शौच के लिए खेत जाना पड़ता है. इसपर बीडीओ ने कर्मचारियों से कहा कि शहीद के परिजन के सदस्य का नाम सूची में शामिल करें, जिससे उनके नाम से पक्का घर व शौचालय बनवाया जा सके.
बीडीओ ने कहा कि जो संभव होगा, शहीद के परिजनों को सहायता की जायेगी. मौके पर शहीद की बेटी ने नर्सिंग में नौकरी की मांग की है. उसने कहा है कि मेरे पिता ने देश के लिए जान दी है, लेकिन मेरा परिवार दयनीय स्थिति में जी रहा है. उन्होंने कहा कि अगर सरकारी सुविधा के साथ नर्सिंग में नौकरी मिल जाये, तो घर की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी. बसंती ने बताया कि सिर्फ उसकी मां को पेंशन मिलती है. इसके अलावा किसी प्रकार की सुविधा नहीं है. दो माह से राशन नहीं मिलने की जानकारी बीडीओ को दी. इसपर बीडीओ ने राशन दिलाने का आश्वासन दिया.
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