सादे लिबास में गांव में घुसा पुलिस गश्ती दल, ग्रामीणों ने अपराधी समझकर चारों ओर से घेरा

Updated at : 04 Nov 2018 8:14 PM (IST)
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सादे लिबास में गांव में घुसा पुलिस गश्ती दल, ग्रामीणों ने अपराधी समझकर चारों ओर से घेरा

– थानेदार ने कहा : पहचानने में देरी होती तो बड़ी घटना घट सकती थी दुर्जय पासवान, गुमला अपराधियों के खिलाफ गोलबंद हुए ग्रामीण शनिवार की रात को उस समय अपने ही गांव को चारों तरफ से घेर लिया, जब गांव में गश्ती के दौरान पुलिस घुसी. जब ग्रामीणों को पता चला कि गांव में […]

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– थानेदार ने कहा : पहचानने में देरी होती तो बड़ी घटना घट सकती थी

दुर्जय पासवान, गुमला

अपराधियों के खिलाफ गोलबंद हुए ग्रामीण शनिवार की रात को उस समय अपने ही गांव को चारों तरफ से घेर लिया, जब गांव में गश्ती के दौरान पुलिस घुसी. जब ग्रामीणों को पता चला कि गांव में सादे लिबास में घुसे लोग अपराधी नहीं पुलिस हैं तो सभी लोग अपने-अपने घर सोने चले गये. मामला घाघरा थाना के देवाकी गांव की है.

यहां बात दें कि रात्रि करीब नौ बजे घाघरा थाना प्रभारी उपेंद्र कुमार महतो पुलिस बल के साथ देवाकी गांव पहुंचे और अखाड़े के पास अपना वाहन खड़ा किया. तब रास्ते से तीन युवक आ रहे थे. जिसे देख पुलिस के जवानों ने आवाज देकर बुलाया. अंधेरा होने के कारण युवकों को पता नहीं चला कि आवाज देने वाले कौन हैं.

पुलिस के कड़क शब्द होने के कारण युवकों को लगा कि कोई अपराधी गांव में फिर घुस गया है. गांव में फिर कुछ अनहोनी होने वाली है. डर से तीनों युवक वहां से भागे और गांव के दूसरे लोगों को गांव में कुछ लोगों के घुसने की सूचना दी. पांच मिनट के अंदर सैकड़ों युवक जमा हो गये और देवाकी गांव से निकलने वाले प्रत्येक रास्‍ते को बंद कर दिया.

इसके बाद गांव के लोग अखाड़ा के पास आये तो पता चला कि घाघरा थाना प्रभारी और उनके जवान हैं. ग्रामीणों ने कहा हमें कन्फ्यूजन हो गया था. जिस तरह से पुलिस आवाज देकर युवकों को बुलायी थी. उन्हें लगा कि कोई अपराधी गांव में फिर घुस आया है. क्योंकि पुलिस इतने कड़क शब्द में युवकों को बुलायेगी इतना पता नहीं था.

ग्रामीण लाठी, डंडा, टांगी, बलवा व तलवार सहित पारंपरिक हथियार के साथ लैस हो कर गांव का घेराव किये थे. लेकिन जब उन्हें पता चला की पुलिस है तो सभी बैरन लौट गये. ग्रामीणों की पहल को देखकर थानेदार ने भी ग्रामीणों के एकजुटता को सलाम किया. उन्होंने कहा कि अगर ग्रामीण पुलिस को पहचाने में देर करते तो बड़ी घटना घट सकती थी.

उन्होंने कहा पूरा गांव सुनसान था. इतने में तीन युवक आ रहे थे. हमें उन तीनों युवकों पर संदेह हुआ. उन तीनों युवकों को पहचान के लिए बुलाया जा रहा था. परंतु यहां मामला ही दूसरा हो गया. यहां बता दें कि 10 दिन पूर्व देवाकी गांव में तीन अपराधी हथियार के साथ आ पहुंचे थे और एक ग्रामीण की गला रेतकर हत्या कर दी थी.

जिसके बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने भी एक अपराधी को पकड़ कर सेंदरा कर दिया था. जिसके बाद ग्रामीणों ने सैकड़ों की संख्या में बैठक कर निर्णय लिया कि गांव में 5:00 बजे के बाद घुसने वाले हर नये चेहरे से पूछताछ करेंगे. इसलिए रात में कुछ लोगों के गांव में घुसने पर ग्रामीणों ने घेराबंदी की थी.

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