घर के अभाव में पेड़ को बनाया आशियाना

Published at :02 Jun 2018 5:12 AM (IST)
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घर के अभाव में पेड़ को बनाया आशियाना

विवशता. दो साल पहले बारिश में घर हो गया ध्वस्त, किसी ने नहीं ली सुध मामला : घाघरा के बियार बरटोली का. खाना-पीना, सोना सब पेड़ के नीचे होता है. प्रशासन से मदद की उम्मीद. तसवीरें जो अगापीत की पेड़ में गुजर रही जिंदगी बयां कर रही है गुमला : एक वृद्ध किसान की जिंगी […]

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विवशता. दो साल पहले बारिश में घर हो गया ध्वस्त, किसी ने नहीं ली सुध

मामला : घाघरा के बियार बरटोली का.
खाना-पीना, सोना सब पेड़ के नीचे होता है.
प्रशासन से मदद की उम्मीद.
तसवीरें जो अगापीत की पेड़ में गुजर रही जिंदगी बयां कर रही है
गुमला : एक वृद्ध किसान की जिंगी पेड़ के नीचे गुजर रही है. घर के अभाव में दो साल से वह पेड़ को ही अपना आशियाना बना लिया है. यह कोई कहानी नहीं‍, बल्कि हकीकत है. मामला घाघरा प्रखंड के सुदूरवर्ती गांव बियार बरटोली का है. गांव का किसान अगापीत केरकेट्टा (55) दो सालों से पेड़ के नीचे रह रहा है. अगापीत पेड़ को घर बना लिया है. पेड़ के नीचे सोता है. वहीं पास सुबह-शाम भोजन बनाता है. घर का सारा सामान पेड़ के नीचे रखा हुआ है. कुछ कीमती सामान व खाने-पीने की सामग्री को पेड़ में कील ठोकर टांग कर रखा है.
अगापीत जो भोजन बनाता है, उसे पेड़ की टहनियों के ऊपर रखता है, ताकि कोई जानवर उसके भोजन को खा न जाये. अगापीत की जिंदगी पूरी तरह पेड़ पर निर्भर हो गयी है. वह कहता भी है कि अब पेड़ ही मेरा घर है. प्रशासन से मदद की उम्मीद भी छोड़ दी है.
बारिश में घर ध्वस्त हो गया है
वर्ष 2016 में बरसात के मौसम में अगापीत का घर धंस गया है. दो साल से वह घर बनवाने की मांग प्रशासन से कर रहा है, परंतु पंचायत के प्रतिनिधि ध्यान नहीं दे रहे हैं. ध्वस्त घर की मरम्मत नहीं होने के कारण अगापीत अपने पुश्तैनी घर को छोड़ कर एक पेड़ के नीचे रहने को विवश है. अगापीत ने बताया कि उसकी पत्नी का निधन हो चुका है. एक बेटा और एक बेटी है. लेकिन दोनों गांव में नहीं हैं.
बीडीओ विजय कुमार ने कहा
घाघरा के बीडीओ विजय कुमार ने कहा कि बियार बरटोली गांव विमरला पंचायत में पड़ता है. अगापीत का नाम पीएम आवास योजना की सूची में है या नहीं देखना होगा. ऐसे मैंने पता किया है तीन साल पहले उसे इंदिरा आवास मिला था. प्रथम किस्त भी दिया गया, परंतु उसका घर नहीं बना है. यह जांच का विषय है. मुखिया, पंचायत सेवक व वार्ड सदस्य से पूछताछ होगी. मैं खुद गांव जाकर अगापीत की स्थिति की जांच कर घर बनवाने का प्रयास करूंगा.
बेटा-बेटी तीन साल से हैं गायब
अगापीत का बेटा और बेटी लगभग तीन साल पहले रोजगार की तलाश में गांव से निकले थे, परंतु वर्तमान में उन दोनों का कुछ पता नहीं है. अगापीत ने बताया कि उसका बेटा और बेटी रोजगार की तलाश में तीन साल पहले गांव से निकले हैं. कहां गये हैं, कहां हैं, किस हाल में हैं? यह भी पता नहीं है. वह अपने बेटा व बेटी को देखना चाहता है. लेकिन दूरस्थ गांव होने व पंचायत के प्रतिनिधियों द्वारा हालचाल नहीं पूछे जाने के कारण वह अकेले किसी प्रकार खेतीबारी कर जी रहा है.
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