गोड्डा में शराब दुकानों का संचालन अब अस्थायी रूप से आबकारी विभाग के जिम्मे

Published by : SANJEET KUMAR Updated At : 26 Jun 2025 11:00 PM

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आउटसोर्सिंग कंपनियों की विदाई तय, जुलाई से फिर होगा निजीकरण, एक महीने तक विभाग ही देखेगा व्यवस्था

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गोड्डा जिले की शराब दुकानों के संचालन व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. आने वाले तीन-चार दिनों में जिले की सभी शराब दुकानों का संचालन अस्थायी रूप से आबकारी विभाग के जिम्मे होगा. वर्तमान में इन दुकानों का संचालन आउटसोर्सिंग कंपनियों के माध्यम से किया जा रहा है, लेकिन अब इन कंपनियों को इस कारोबार से हटा दिया जाएगा. आबकारी विभाग के सूत्रों के अनुसार, जुलाई माह के अंत तक इन दुकानों के संचालन की जिम्मेदारी विभाग स्वयं निभाएगा, उसके बाद पुनः टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से निजी संचालकों को दुकानें सौंपी जाएंगी. तब तक के लिए विभाग को करीब 38 शराब दुकानों की जिम्मेदारी खुद निभानी होगी.

स्टाफ की कमी बनी चुनौती, बाहर से कर्मचारियों की होगी व्यवस्था

बताया जा रहा है कि विभाग के पास पर्याप्त मैनपावर नहीं है, जिससे संचालन में परेशानियां आ सकती हैं. विभागीय अधिकारियों के अनुसार, इस अस्थायी अवधि के दौरान संभवतः बाहरी युवकों की भर्ती या अस्थायी हायरिंग के माध्यम से दुकानों को चलाया जाएगा. गौरतलब है कि वर्तमान व्यवस्था में आउटसोर्सिंग कंपनियों द्वारा स्वयं के कर्मचारी (कंपनी के लड़के) दुकान संचालन में लगाये गये थे, लेकिन अब नयी व्यवस्था में विभाग को ही सारी जिम्मेदारी उठानी होगी.

जिले में कुल 38 शराब दुकानें, टेंडर प्रक्रिया जुलाई में

गोड्डा जिले में वर्तमान में 38 शराब की दुकानें संचालित हैं, जिनमें देशी व विदेशी शराब के साथ-साथ बीयर की बिक्री की जाती है. यह सभी दुकानें अब विभाग के प्रत्यक्ष नियंत्रण में रहेंगी. यह व्यवस्था सरकारी नियंत्रण व पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से की गयी है. सूत्रों के अनुसार, जुलाई के अंत तक पुनः टेंडर जारी किया जाएगा, जिसमें इच्छुक निजी संचालक भाग ले सकेंगे. इसके बाद ही दुकान संचालन का पुनः निजीकरण किया जाएगा.

शराब दुकानों में तय दर से अधिक वसूली पर लगेगा अंकुश

गोड्डा जिले में शराब दुकानों के संचालन में एक जुलाई से होने वाले बदलाव के साथ उपभोक्ताओं को तय दर (एमआरपी) से अधिक राशि वसूलने की शिकायतों से राहत मिलने की उम्मीद है. अब तक शराब की बिक्री आउटसोर्सिंग कंपनियों द्वारा नियुक्त कर्मचारियों के जरिये की जा रही थी, जो लंबे समय से एमआरपी से अधिक दर पर शराब बेचने के लिए बदनाम रहे हैं. विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, यह अवैध वसूली इसलिए होती थी क्योंकि कंपनियां अपने कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं देती थीं, जिससे वे खुद की भरपाई ग्राहकों से अतिरिक्त राशि वसूलकर करते थे. यह गुप्त तरीके से चलता आ रहा था और कई बार विवाद और शिकायतों के बावजूद विभाग ने मौन साधे रखा. एक जुलाई से जब शराब दुकानों का संचालन स्वयं आबकारी विभाग के हाथ में होगा, तो उम्मीद की जा रही है कि इस प्रकार की मनमानी पर कड़ाई से अंकुश लगेगा. विभागीय निगरानी के तहत एमआरपी पर ही शराब बिक्री सुनिश्चित की जाएगी.

निजी संचालकों में भी नई व्यवस्था को लेकर उत्साह

उधर, शराब कारोबार से जुड़े निजी दुकान संचालकों में भी नयी व्यवस्था को लेकर उत्साह है. उन्हें उम्मीद है कि पुनः टेंडर प्रक्रिया के बाद समान अवसर और पारदर्शी व्यापारिक माहौल मिलेगा. इससे न केवल ग्राहकों को राहत, बल्कि व्यवसायियों को भी बेहतर माहौल मिल सकेगा. नये बदलाव से प्रशासन की जवाबदेही भी तय होगी, क्योंकि अब सीधे सरकारी नियंत्रण में होने से किसी भी गड़बड़ी की शिकायतों पर कार्रवाई की गुंजाइश बढ़ेगी. शराब की दुकानों में अब ग्राहक भी सहज रूप से अपने अधिकारों की मांग कर सकेंगे.नयी व्यवस्था के तहत एक जुलाई से शराब दुकानों का संचालन विभाग खुद करेगा. इसके पश्चात सरकार के निर्देशानुसार दुकानों के आवंटन के लिए लॉटरी प्रक्रिया आयोजित की जाएगी.

-नीलेश सिन्हा, उत्पाद विभाग के अवर निरीक्षकB

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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