गरीब मरीजों को खून और अल्ट्रासाउंड की सुविधा न मिलने से हो रही कठिनाई, रक्तदान किये जाने की जरूरत

Updated at : 23 Mar 2026 11:23 PM (IST)
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गरीब मरीजों को खून और अल्ट्रासाउंड की सुविधा न मिलने से हो रही कठिनाई, रक्तदान किये जाने की जरूरत

गोड्डा सदर अस्पताल में ब्लड बैंक और अल्ट्रासाउंड की भारी कमी

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गोड्डा जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल इन दिनों अव्यवस्थाओं की मार झेल रहा है. ब्लड बैंक में रक्त की भारी कमी और अल्ट्रासाउंड मशीन की अनुपलब्धता के कारण गरीब मरीजों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. अस्पताल के ब्लड बैंक में विगत एक सप्ताह से रक्त की कमी बनी हुई है. थैलेसीमिया, एड्स, अप्लास्टिक एनीमिया और ल्यूकेमिया से पीड़ित करीब 125 बच्चों और प्रसव के लिए आयी महिलाओं के परिजनों को खून के लिए दर-दर भटकना पड़ता है. हालांकि सरकार ने ब्लड बैंक की आधारभूत संरचना उपलब्ध करा दी है, लेकिन रक्तदाताओं की कमी बड़ी बाधा बनी हुई है.

अल्ट्रासाउंड मशीन की अनुपलब्धता

सदर अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन न होने के कारण मरीजों को निजी क्लीनिकों का रुख करना पड़ता है, जहां उनसे मोटी रकम वसूली जाती है. सिविल सर्जन ने एक माह पूर्व मशीन लगाने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया.

जनभागीदारी से समाधान की आवश्यकता

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और प्रबुद्ध नागरिकों का मानना है कि केवल सरकारी प्रयासों से समस्या का समाधान संभव नहीं. इसके लिए स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं को नियमित रक्तदान शिविर आयोजित करना होगा. गोड्डा वासियों को रक्तदान के प्रति भ्रांतियों को दूर कर आगे आना चाहिए. कॉलेज छात्रों और युवाओं को इमरजेंसी ब्लड डोनर ग्रुप से जुड़ने की आवश्यकता है.

मरीजों की संख्या, जिन्हें सबसे ज्यादा रक्त की जरूरत

थैलेसिमिया : 98

एड्स : 05

अप्लास्टिक एनीमिया : 05

ल्यूकेमिया : 10

अन्य : 7

क्या कहते हैं डीएस

जब तक जिला वासी और स्थानीय सामाजिक संगठन जागरूक होकर रक्तदान को एक मुहिम नहीं बनाएंगे, तब तक ब्लड बैंक में रक्त की आपूर्ति सुनिश्चित करना कठिन है. एक यूनिट रक्त किसी का जीवन बचा सकता है. सदर अस्पताल में सुविधाओं का सुदृढ़ीकरण प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन ब्लड बैंक को जीवित रखना समाज का कर्तव्य है. यदि गोड्डा के लोग और एनजीओ एकजुट हों, तो रक्त की कमी से किसी की जान नहीं जाएगी. वहीं, अल्ट्रा साउंड मशीन लगाने की स्वीकृति मिल चुकी है और बहुत जल्द मरीजों को जांच के लिए निजी क्लिनिक की ओर नहीं रुख करना पड़ेगा.

-तारा शंकर झा, डीएसB

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