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राष्ट्रीय लोक अदालत में 7921 मामलों का निष्पादन

Updated at : 13 Jul 2024 11:22 PM (IST)
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राष्ट्रीय लोक अदालत में 7921 मामलों का निष्पादन

सुलह व समझौते के आधार पर 3,73,17,854 रुपये की राशि का कराया गया समझौता

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गोड्डा. जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष पीडीजे राजेश कुमार वैश्य के निर्देश पर न्यायालय परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया. शुभारंभ पीडीजे राजेश कुमार वैश्य , एसपी नाथू सिंह मीणा, फेमिली जज अनिल कुमार पांडेय, जिला जज प्रथम जनार्दन सिंह, जिला जज द्वितीय निरुपम कुमार, जिला जज तृतीय ऋचा श्रीवास्तव, सीजेएम अर्जुन साव, बार अध्यक्ष सुशील कुमार झा, महासचिव योगेश चंद्र झा ने किया. इस दौरान आपसी सुलह के आधार पर 7921 मामलों का निष्पादन किया गया. 3,73,17,854 रुपये की राशि का समझौता हुआ. इनमें बैंक रिकवरी से संबंधित 278 मामलों के निष्पादन के तहत 8926767 रुपये का सुलह हुआ. वहीं क्रिमिनल कंपाउंडेबल के 320 मामले का निष्पादन किया गया. बिजली बिल व कंपाउंडेबल से संबंधित 172 मामले का निष्पादन कर 1702600 राशि का समझौता किया गया. एमएसीटी के 21 मामले का निष्पादन कर 16892067 रुपये का समझौता हुआ. मैट्रोमोनियल के 33 मामले का, एनआइएक्ट के तीन मामलों का निष्पादन कर 350000 रुपये पर समझौता किया गया. एक्साइज के 103 मामलों में 4560500 रुपये की वसूली के साथ सर्टिफिकेट के 376 मामले, एफएफ 186, स्थायी लोक अदालत में 72 मामले का निबटारा कर 37300 रुपये का समझौता हुआ.उपभोक्ता फोरम के एक मामले, फ्रंट आफिस के 4270 मामले , नियोजन से संबंधित 554 मामले, ट्रैफिक चालान के 1480 मामले में 4360100 रुपये की वसूली की गयी. कोटपा एक्ट के 36 मामले में 5760, माइनिंग एक्ट से संबंधित 16 मामले का निष्पादन कर 482760 रुपये का समझौता किया गया. संचालन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव डॉ प्रदीप कुमार ने किया. लोक अदालत सुलहनीय मामले के निष्पादन का उपयुक्त मंच : पीडीजे पीडीजे राजेश कुमार वैश्य ने कहा कि विवादों के निबटारा के लिए लोक अदालत सबसे सुलभ व उपयुक्त मंच है. समाज में एक-दूसरे के साथ किसी भी तरह का विवाद हो सकता है. विवाद का हल भी है. सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए सलह कराना बुद्धिमानी है. कहा कि सभी प्रकार के विवाद को परलोक जाने के पहले हल कराने की पहल हर हाल में लोगों को करनी चाहिए. एसपी नाथू सिंह मीणा ने ज्यादा से ज्यादा मामले के निष्पादन व जनजागरुकता की दिशा में गांव- गांव स्तर पर पुलिस पदाधिकारी द्वारा भी पहल को बताया. लाभ उठाने के साथ त्वरित निष्पादन कराने की बातों पर बल दिया. फेमिली जज अनिल कुमार पांडेय ने कहा कि लोक अदालत से ही जल्द न्याय मिल सकता है. अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष सुशील कुमार झा ने लोक अदालत में वादों का निशुल्क निष्पादन की जानकारी दी. कहा अपने इगो को त्यागकर सुलह- समझौता से मामले का निष्पादन कराने में ही भलाई है. महासचिव योगेश चंद्र झा ने भी विचार व्यक्त किया. कार्यक्रम के दौरान पीडीजे एवं जिला जज प्रथम ने दावाकर्ता के बीच चेक का वितरण किया. मामले के त्वरित निष्पादन को लेकर 12 न्यायिक बेंच का गठन किया गया था.

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